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क्या अब अमेरिका सिखाएगा धार्मिक स्वतंत्रता?

USCIRF report 2019

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन रिपोर्टऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) 2019 की रिपोर्ट, इन दिनों काफी चर्चा में है। इस रिपोर्ट में भारत के बारे में भी कहा गया है कि यहां 2018 में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में सरकारें या तो शामिल थी या फिर बलवाइयों को खूली छूट दे रही थी। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने वालों के लिए यह एक नया हथियार  है, वे इस रिपोर्ट के बहाने मोदी सरकार पर कीचड़ उछालने का अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं। आइये जानते है, क्या है ये रिपोर्ट और कैसे चलाया जा रहा है भारत के खिलाफ एक प्रोपेगंडा।

क्या है यूएससीआईआरएफ

यूएससीआईआरएफ अमेरिकी सरकार द्वारा गठित अपनी तरह का दुनिया का एक मात्र ऐसा आयोग है, जो विदेशों में रह रहे लोगों की धार्मिक आजादी और उनके विश्वास की रक्षा का दावा करता है। यूएससीआईआरएफ विभिन्न देशों में धार्मिक आजादी को भंग करने के साक्ष्यों और हालात की समीक्षा करता है और उसके अनुसार अमेरिकी नीति बनाने की सलाह राष्ट्रपति, सेक्रेटरी आफ स्टेट और यूएस कांग्रेस को देता है। यूएससीआईआरएफ के आयुक्तों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिका के दोनों राजनीतिक पार्टियों के चुने हुए सांसदों के नेता करते हैं। इस आयोग का गठन 20 साल पहले जून 1999 में किया गया था। 2000 में जारी अपनी पहली रिपोर्ट में यूएससीआईआरएफ ने तीन देशों, रूस, सूडान और चीन, को शामिल किया था। अपनी पहली रिपोर्ट में भी आयोग ने कहा था कि चीन के उइघुर मुसलमानों की धार्मिक और मानवाधिकार आजादी को कुचला जा रहा है। उनको बिना कारण गिरफ्तार कर यातनाएं दी जा रही हैं और बिना सुनवाई के उन्हें मौत की सजा दी जा रही है।

यूएससीआईआरएफ में शमिल देशो की सूची

यूएससीआईआरएफ ने 10 ऐसे देशों की सूची बनाई है जिसे वे कंट्रीज ऑफ़ पार्टिकुलर कंसर्नस (सीपीसी) कहते हैं। यानी वे देश जिसे लेकर वे ज्यादा चिंतित हैं।

चीन को लेकर ज्यादा तल्ख रिपोर्ट

यूएससीआईआरएफ 2019 की रिपोर्ट में भी चीन को लेकर सबसे ज्यादा तल्ख टिप्पणी की गई है। कहा गया है कि 20 साल बाद भी उइघुर मुस्लिमों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उनके फोन छीन लिए जाते हैं और उसकी जांच की जाती है। उनके डीएनए को एकत्रित करने के लिए उनकी चमड़ी में छेद कर कभी भी खून का नमूना ले लिया जाता है। चीन की सरकार ने अमानवीय तरीके से उइघुर मुसलमानों के 8 लाख परिवारों के 20 लाख व्यस्कों को एकांत शिविरों में रखा है और उनके बच्चों को अनाथालयों में जबरन भेज दिया है। सरकार की इतनी कड़ी निगरानी है कि परिवार के लोग एक दूसरे से संपर्क भी नहीं कर सकते। उइघुर मुस्लिमों को यह भी नहीं मालूम है कि उनके चहेते जिंदा हैं भी कि नहीं।

ईरान पर भी कठोर टिप्पणी

यूएससीआईआरएफ 2019 की रिपोर्ट में चीन के बाद ईरान के लिए सबसे अधिक कड़े शब्द कहे गए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान में धार्मिक आजादी पर लगातार खतरा बढ़ता ही जा रहा है। यहां 2017 की तुलना में हालात और खराब हो गए हैं। ईरान में योजनाबद्ध तरीके से सुन्नी मुसलमानों, बहाइयों, ईसाइयों और सूफियों को निशाना बनाया जा रहा है।  सरकार एक तरफा कार्रवाई कर बहाइयों को जेल भेज रही है, उनके आर्थिक और शैक्षणिक सस्थाओं को खत्म कर रही है। सैकड़ों सूफियों को गिरफ्तार कर उनके साथ मार पीट की गई और उन्हें तन्हाई में डाल दिया गया। जिन मुसलमानों ने ईसाई धर्म को कबूल किया है उनको भयंकर यातनाएं दी जा रही हैं। सुन्नी मुसलमानों के साथ राजनीतिक भेदभाव किया जाता है और उन्हें नौकरियों से भी वंचित  रखा जाता  है। सुधारवादी शिया मुसलमानों को भी लंबे समय तक जेल में बंद रखा जाता है और उन्हें मार डालने की धमकी दी जाती है।

भारत के बारे में

यूएससीआईआरएफ 2019 की रिपोर्ट में भारत में बढ़ रही धार्मिक असहिष्णुता और हिंसा की बात कहने से पहले यह बहुत जोर देकर कहा गया है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। संविधान सभी को धार्मिक आजादी की गारंटी देता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की न्याय व्यवस्था बहुत सुदृढ़ है और यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों को भी तुरंत न्याय मिलता है।

भारत में धार्मिक आजादी को खतरे के बारे में उन तमाम घटनाओं का जिक्र किया गया है जो पिछले दिनों सामने आईं । रिपोर्ट के अनुसार यहां सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले की एक तरह से इजाजत दी। खासकर मॉब लिंचिग के मामले में। सबसे बड़ी आपत्तिजनक बात यह है कि इस रिपोर्ट में सरकार और निजी संगठन दोनों को शामिल माना गया है। इस रिपोर्ट में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा जबरन धर्मांतरण पर रोक और गोहत्या पर प्रतिबंध को भी धार्मिक आजादी पर कुठाराघात माना गया है।

विदेशों से धन प्राप्त कर भारत में अपनी गतिविधियां चलाने वाले गैर सरकारी संगठनों पर प्रतिबंध को भी धार्मिक आजादी में खलल माना गया है। इस रिपोर्ट में 2018 में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी को शामिल किया गया है जिसमें कहा गया है कि कुछ राज्यों में धार्मिक असिहष्णुता बढ़ी है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी कभी भी धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे भीड़ के हमले की भर्तस्ना नहीं करते और अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगलने वाले उनकी पार्टी के कई सांसद अतिवादी हिंदू संगठनों से जुड़े हैं।

यूएससीआईआरएफ - विवादों से घिरा संघठन

यूएससीआरआईएफ पूरी तरह से अमेरिका का संगठन है और इसका किसी अतंरराष्ट्रीय संस्था या संगठन से कोई लेना देना नहीं है। इसके गठन से लेकर आज तक कई विवाद उठ चुके हैं। कहा जाता है कि इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में इसाइयों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न पर ध्यान रखना है। इसे इस्लाम विरोधी कमीशन भी कहा जाता है। इसके साथ काम कर चुकी साफिया गोरी अहमद ने अमेरिका के इक्वल एम्प्लॉयमेंट अपरच्यूनिटी कमीशन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे यूएससीआईआरएफ से इसलिए निकाल दिया गया कि क्योंकि वह एक मुस्लिम है। इस आयोग पर आपस में विवाद पैदा करने और नकारा होने का भी आरोप लगता रहा है। ह्यूमन राइट्स वाच के जेमेरा रोने ने इसकी रिपोर्ट के बारे में कहा- मेरे हिसाब से इस अधिनियम का विधायी इतिहास यह दिखाता है कि इसकी इसाइयों के अधिकारों की रक्षा के प्रति विशेष रूचि है। 2018 में हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने भी तब इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाया था जब टोनी परकिंस को इसका आयुक्त बनाया गया था। टोनी परकिंस को गैर इसाइयों के प्रति घृणा का भाव रखने वाला माना जाता है।

यूएससीआईआरएफ - कैसे चलाता है प्रोपेगंडा

यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट भारत सहित कई देशों पर दबाब बनाने का एक जरिया है। इस रिपोर्ट के साथ विभिन्न देशों के प्रति अमेरिका का क्या रुख होना चाहिए इसका सुझाव भी अमेरिकी प्रशासन को दिया जाता है। जैसे भारत के बारे में यूएससीआईआरएफ 2019 की रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि अमेरिकी प्रशासन भारत पर यह दबाव डाले कि आयोग के एक प्रतिनिधिमंडल को भारत आकर विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत करने की अनुमति दे ताकि भारत में धार्मिक या विश्वास की स्वतंत्रता की जांच की जा सके। यह भी सुझाव दिया है कि अमेरिकी प्रशासन भारत पर यह दबाव डाले कि राज्य सरकारें उन धार्मिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और मीडिया कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे जो धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के दोषी हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाया जाए कि वह अंतरराष्ट्रीय एनजीओ और मानवाधिकार संगठनों पर विदेशों से फंड लेकर भारत में अपनी गतिविधियों को चलाने पर लगी रोक हटाए।

भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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