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भारत की अंतरिक्ष में बढ़ती प्रभुता

Space Missions India

मार्च में ठीक आम चुनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष में सैटेलाइट को मार गिराने वाले एंटी मिसाइल ‘‘एसैट’’ को लांच करने की घोषणा करते हुए कहा था – शांति एवं सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए एक मजबूत भारत का निर्माण जरूरी है’। तब शायद कम ही लोगों को यह अहसास हुआ होगा कि भारत आर्थिक और सामरिक क्षमता के साथ साथ अतंरिक्ष में भी अपनी प्रभुता स्थापित करने वाले देशों में शामिल हो गया है। भारत अंतरिक्ष में सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता रखने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। इसके पहले यह क्षमता अमरीका, रूस और चीन के पास थी। अब भारत अंतरिक्ष में 2022 के बाद स्पेस स्टेशन लांच करने की भी योजना बना रहा है, जिस पर भारत के अंतरिक्ष मानव मिशन गगनयान के 2022 में पूर्ण होने पर कार्य प्रारम्भ हो जायेगा ।

क्या है स्पेस स्टेशन ?

स्पेस स्टेशन मानव निर्मित एक ऐसा अंतरिक्ष यान है जो पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष के निचली कक्षा में स्थित होता है। अभी तक पूरे अंतरिक्ष में एक ही स्पेस स्टेशन है जिसे हम आईएसएस यानी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कहते हैं, जिसे विश्व के पांच बड़े देशों या संगठनों ने मिलकर बनाया है। जिसमें अमेरिका का नासा,  रूस का रोसकोसमोस, जापान का जाक्सा, यूरोप का ईएसए और कनाडा का सीएसए शामिल हैं। इसे वर्ष 2000 में स्थपित किया गया और यह 2030 चलता रहेगा। आईएसएस की गति इतनी अधिक है, कि यह पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 90 मिनट में लगा लेता है। यह एक दिन में पृथ्वी का साढ़े 15 चक्कर लगा लेता है। यह स्पेस स्टेशन अनुसंधान और अंतरिक्ष मे हो रही गतिविधियों पर रिपोर्ट देने के साथ साथ अतंरिक्ष पर्यटनगाह भी है। यहां अंतरिक्ष यात्री ठहरते भी हैं।

भारत की स्पेस स्टेशन योजना

अंतरिक्ष में स्पेस स्टेशन स्थापित करने की घोषणा भारत के इसरो प्रमुख के सिवन ने की।  उनके पास इस स्पेस स्टेशन को लेकर जो कल्पना है, उसके अनुसार यह महत्वकांक्षी परियोजना गगनयान मिशन का ही विस्तार होगा। मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के साथ ही भारत अपना स्पेस स्टेशन तैयार करने की योजना बना रहा है। इसरो प्रमुख ने यह स्पष्ट कर दिया कि हम अलग अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, हम आईएसएस का हिस्सा नहीं होंगे। हमारा अंतरिक्ष स्टेशन बहुत छोटा होगा। जिसका इस्तेमाल माइक्रोग्रैविटी प्रयोग के लिए किया जाएगा। भारत के अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 20 टन होने की संभावना है। अंतरिक्ष स्टेशन की योजना बनाते समय इसरो अंतरिक्ष पर्यटन के बारे में नहीं सोच रहा है। 2022 तक गगनयान मिशन पूरा होने के बाद इस परियोजना को मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगां।

मिशन शक्ति

मार्च 2018 में भारत ने अंतरिक्ष में एंटी मिसाइल से एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराते हुए अपना नाम अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर दर्ज करा दिया। भारत अंतरिक्ष में निचली कक्षा में लाइव सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता रखने वाला विश्व का चैथा देश बन गया है. इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन के पास ही ऐसी उपलब्धि थी। एंटी सैटेलाइट विपन्स यानी ASAT का उपयोग शत्रु के उपग्रहों को नष्ट करने या निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। भारत से पहले ASAT क्षमता विकसित करने वाले देशों में अमेरिका (1958 में), रूस (1964 में सोविंयत संघ के रूप में ) और चीन (2007 में ) शामिल है। हालांकि भारत के रक्षा अनुसंधान से जुड़े डीआरडीओ ने फरवरी 2010 में ही घोषणा कर दी थी कि भारत अंतरिक्ष में दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने के लिए एक हथियार बनाने के लिए आवश्यक तकनीक विकसित कर रहा है।

पीएम मोदी ने ASAT के सफल परीक्षण की घोषणा करते समय कहा था कि भारत के इस परीक्षण से किसी अंतरराष्ट्रीय कानून या संधि का उल्लंघन नहीं हुआ है.। भारत हमेशा से अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ के विरूद्ध रहा है और इस ASAT क्षमता के बाद भी देश की इस नीति में कोई परिवर्तन नहीं आया हैं। प्रधानमंत्री मोदी के इस जिम्मेदारीपूर्ण वक्तव्य के बाद किसी भी देश ने भारत की आलोचना नहीं की।

मानव मिशन- 2022

मानव मिशन-2022 के तहत भारत अंतरिक्ष में दो मानवरहित यानों के साथ-साथ एक ऐसा यान भेजने जा रहा है जिसमें अंतरिक्ष यात्री भी होंगे। अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा है। इस परियोजना के लिए मोदी सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के गगनयान मिशन को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री मोदी की कल्पना है कि जब 2022 हम भारतीय स्वतंत्रता की 75वीं सालगिरह मनाए तो भारत की धरती से भारतीय यान द्वारा भारत की कोई एक लड़की या लड़का अंतरिक्ष में भेजा जाए। यह अब तक का सबसे महत्वकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम है, क्योंकि इससे देश के अंदर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। यह देश के युवाओं को भी बड़ी चुनौतियां लेने के लिए प्रेरित करेगा और देश की मर्यादा को बढ़ाने में भी सहयोग करेगा।

चंद्रयान अभियान के बाद सूर्य अभियान

इसरो चंद्रयान अभियान 2 के बाद सूर्य को लेकर भी अभियान शुरू करने वाला है। इसके तहत 2020 की पहली छमाही में आदित्य एल1 लॉन्च किया जाएगा। शुक्र के लिए भी एक अंतरग्रहीय अभियान को अगले 2-3 वर्षों में लॉन्च किया जाएगा। आदित्य 1 उपग्रह है, जो सोलर ‘कोरोनाग्राफ’ यंत्र के जरिए सूर्य के सबसे भारी भाग का अध्ययन करेगा। इससे कॉस्मिक किरणों, विकिरणों और एक हजार किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से चलने वाली सौर हवाओं के अध्ययन में मदद मिलेगी।

भारत के अंतरिक्ष में बढ़ते कदमों की नींव दशकों के प्रयासों के बाद रख पायी है, परन्तु पिछले 5 वर्षों में एक मजबूत सरकार ने वैज्ञानिकों के इरादों को इतना बल दिया है कि वे आज विश्वस्तरीय और बड़े मिशन के बारे में योजनाएं बना पा रहे है।

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