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सौर उर्जा शक्ति संपन्न होता भारत- इकोनॉमी और पर्यावरण एक-दूसरे के पर्याय

rewa Madhya Pradesh solar project

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के रीवा में 750 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि इससे मध्य प्रदेश साफ-सुथरी और सस्ती बिजली का हब बन जाएगा। इससे हमारे किसानों, मध्यम, गरीब परिवारों और आदिवासियों को फायदा होगा।

दुनिया के सबसे बड़े सिंगल साइड सौर सयंत्रों में से एक रीवा सोलर प्रोजेक्ट

रीवा के गुढ़ में स्थापित यह सौर ऊर्जा संयंत्र परियोजना 750 मेगावाट की है और 1590 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित है। यह दुनिया के सबसे बड़े सिंगल साइड सौर सयंत्रों में से एक है। इस सौर ऊर्जा प्लांट में कुल तीन इकाइयां है। प्रत्येक इकाई में 250 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है। परियोजना से पैदा हुई बिजली का 76% हिस्सा मध्य प्रदेश के राज्य बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को और 24% दिल्ली मेट्रो को दिया जा रहा है।

सोलर एनर्जी 21वीं सदी में ऊर्जा का एक बड़ा माध्यम बनने जा रही है। ये श्योर, प्योर और सिक्योर है। श्योर इसलिए कि जब सभी संसाधन खत्म हो जाएंगे, सूर्य हमेशा चमकता रहेगा। प्योर इसलिए, क्योंकि इससे पर्यावरण पूरी तरह से सुरक्षित और साफ-सुथरा बना रहेगा। सिक्योर इसलिए कि इससे बिजली की जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।– पीएम मोदी

सोलर एनर्जी में टॉप-5 देशों में भारत

पीएम मोदी ने कहा कि हम सौर ऊर्जा के मामले में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में पहुंच गए हैं। इसमें भारत आत्मनिर्भर बन रहा है। जब हम आत्मनिर्भरता की बात करते हैं, तब इकोनॉमी उसका एक सबसे जरूरी भाग है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस बात को लेकर पसोपेश में रहे हैं कि उद्योग बढ़ाएं कि पर्यावरण को। भारत ने ये दिखाया है कि इकोनॉमी और पर्यावरण एक-दूसरे के पर्याय हो सकते हैं। बिजली आधारित परिवर्तन के लिए नए रिसर्च होने लगी हैं। ऐसे अनेक प्रयास हैं, जो इंसान के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे हैं।’

भारत अब स्वच्छ ऊर्जा का सबसे शानदार बाजार बन गया है और इस क्षेत्र में देश मॉडल बनकर दुनिया के सामने उभरा है।-पीएम मोदी

पर्यावरण के लिए संजीवनी

यह परियोजना इस मायने में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें प्रति यूनिट की क्रय दर 2 रुपए 97 पैसे है, जो अब तक की न्यूनतम दर है। सौर परियोजना को पर्यावरण की दृष्टि से देखें तो रीवा सौर परियोजना से हर साल 15.7 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उर्त्सजन को रोका जा रहा है, जो 2 करोड़ 60 लाख पेड़ों को लगाने के बराबर है।

आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता है संभव

पीएम मोदी ने कहा कि सोलर पावर की ताकत को हम तब तक पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाएंगे, जब तक हमारे पास देश में ही बेहतर सोलर पैनल, बेहतर बैटरी, उत्तम क्वालिटी की स्टोरेज कैपेसिटी का निर्माण ना हो। अब इसी दिशा में तेजी से काम चल रहा है। आत्मनिर्भरता सही मायने में तभी संभव है जब हमारे भीतर आत्मविश्वास हो। आत्मविश्वास तभी आता है, जब पूरा देश, पूरा सिस्टम, हम सभी मिलकर आत्मनिर्भरता की ओर चल पड़े। सोलर प्लांट ऐसी जमीन पर लगेगा, जो उपजाऊ नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि मध्य प्रदेश के किसान साथी भी अतिरिक्त आय के इस साधन को अपनाने और भारत को पावर एक्सपोर्टर बनाने के इस व्यापक अभियान को जरूर सफल बनाएंगे।

भारत की पहल अंतर्राष्ट्रीय सोलर गठबंधन उर्जा से परिपूर्ण देशों को कर रहा एकजुट

अंतर्राष्ट्रीय सोलर गठबंधन की शुरुआत भारत और फ्रांस ने मिलकर नवम्बर 2015 में COP 21 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान किया था। इसका फ्रेमवर्क समझौता दिसम्बर, 2017 में लागू हुआ था। इसका स्थापना दिवस 11 मार्च, 2018 को मनाया गया था। इसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान (NISE) में स्थित है। यह ऐसी पहली अंतर्राष्ट्रीय अंतरसरकारी संधि है जिसका मुख्यालय भारत में स्थित है।

ISA का उद्देश्य सौर उर्जा से परिपूर्ण देशों को एकजुट करके सौर उर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। बड़ी मात्रा में सौर उर्जा उत्पादन के कारण इसकी उत्पादन लागत भी कम आएगी। सौर उर्जा उत्पादन के सदस्य देशों में अनुसन्धान व विकास कार्य में मिलकर काम करेंगे।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मोदी सरकार के अभूतपूर्व कार्य
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी ने देश की सौर क्षमता के बारे में 748 GW का आकलन किया है, जिससे 3% बेकार भूमि क्षेत्र को सौर पीवी मॉड्यूल द्वारा कवर किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय मिशन का लक्ष्य 2022 तक 100 GW ग्रिड कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्रों को स्थापित करना है। भारत के इंटेंडेट नेशनली डेटरमाइंड कॉन्ट्रीब्यूशंस (INDCs) ने इसके लिए 2030 तक 2005 के स्तर से जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 33-35 प्रतिशत की कमी करने और 2030 तक गैर जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा स्रोतों से 40% ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा।
सौर उर्जा से परिपूर्ण आत्मनिर्भर गांव की कहानी

पूरी दुनिया जहां प्रदूषण, बिजली और पानी के संकट से घिरती जा रही है, वहीं भारत में एक ऐसा गांव भी है जो ऊर्जा और पानी की ज़रूरतों के लिए अब किसी का मोहताज नहीं है। ये गांव कहीं और नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के बैतूल जिले का आदिवासी बाहुल्य गांव बाचा है। गांव में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत सितंबर 2017 में शुरू हो गई थी। और इस योजना के तहत सौर ऊर्जा पैनल, बैटरी और चूल्हा लगाने का काम 2018 में पूरा हो गया। केवल 10 महीनों के अंदर ये देश का पहला सोलर विलेज बन गया। वहीं अब इस गांव को वाटर विलेज की उपाधि भी मिलने जा रही है, क्योंकि पानी के मामले में भी बाचा पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है।

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