Rama Returns

रामायण में है खुशहाल और सफल जीवन का सार

Ramayan

रामायण सिर्फ एक काव्य नहीं हैं, बल्कि संस्कारों की जीवित पाठशाला है। रामायण में वर्णित हर कोई आज भी प्रासंगिक है। हर व्यक्ति हमारे दैनिक जीवन को न सिर्फ प्रभावित करते हैं, बल्कि उनसे सीख लेकर जीवन की बाधाओं को पार किया जा सकता है। खासकर युवाओं को रामायण के इन योद्धाओं से सीख लेनी चाहिए, जो सिर्फ पात्र नहीं सत्य का अंश हैं।

राम

राम युवाओं को प्रेरित करते हैं कि मेरी तरह बनो। राम ने हमेशा प्रतिकूलताओं का सामना किया। संघर्षों से घबराए नहीं, बल्कि सच्चाई और नैतिकता के साथ खड़े रहे। राम में संयम था तो दुष्टों पर उनका क्रोध भी बरपा। कमजोरों के साथ खड़े रहे, उनका साथ दिया। अपने वचन पर खरे उतरे। परिवार से लेकर प्रजा तक हर कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन किया। राम ने हमें सिखाया कि हालात कैसे हों, पीछे मुड़कर मत देखो, लड़ो और जीतो।

सीता

सीता की तरह बनो। सीता, एक स्वतंत्र महिला, जिन्होंने रावण से अपनी अस्मिता की रक्षा की। सीता की तरह मजबूत बनो, जिन्होंने अपनी इच्छा से अग्नि परीक्षा देने का साहस किया। सीता, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों को हंसकर गले लगाया और पतिव्रता स्त्री की तरह संकट के समय भी अपने पति का साथ नहीं छोड़ा। सीता की तरह इसलिए भी बनो, क्योंकि उन्होंने बुराई के खिलाफ कभी हार नहीं मानी।

हनुमान

युवा हनुमान से सीख लें। उनकी तरह बुद्धिमानी, मजबूती और स्वामीभक्ति सीखें। महाबली होने के बावजूद हनुमान विनम्र थे। आप भी माता-पिता, संतों और बुद्धिमानों के प्रति सम्मान दिखाएं, हनुमान की तरह। हनुमान की तरह बनो, जरूरत पड़ने पर हमेशा लोगों की सेवा करने के लिए उत्सुक रहो।

भरत

भरत शिक्षा देते हैं कि हमेशा सही और उचित के लिए खड़े रहो। सेवा और कर्तव्य की गहरी भावना रखने वाले, भरत की तरह बनिए।  हमेशा सभी के हितों की रक्षा करने के लिए तैयार रहो। भरत की तरह हमेशा सर्वसम्मति से निर्णय लेने के लिए तैयार रहना सीखो।

लक्ष्मण

लक्ष्मण सिखाते हैं कि हमेशा बड़ों की इच्छा के आज्ञाकारी बनो। लक्ष्मण के लिए कर्तव्य की भावना हमेशा सर्वोपरि थी। लक्ष्मण से हम सीख सकते हैं कि हमेशा सतर्क रहो और बुराई से निपटने के लिए सतर्क रहो और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के खेमे में घुस कर उनका सर्वनाश कर दो।

सुग्रीव

सुग्रीव की तरह बनो, जो अपने दोस्त के लिए सब कुछ दांव पर लगा देतें है। ऐसे मित्र बनो, जो अंत तक तुम्हारे लिए लड़े। तुम्हारे निर्णयों पर तुम्हारा साथ दे।

जनक

राजा जनक शिक्षा देते हैं कि अपनी बेटियों को शिक्षित करो। सीखने की कला विकसित करो। जनक के समान बनो, जो ज्ञान को बल देते थे। जनक की तरह बनो, जो उच्च और निम्न के बीच भेदभाव नहीं करते थे।

नल-नील

नल-नील की तरह रहें  और टीम के होनहार और सच्चे खिलाड़ी बनें। कौशल में उत्कृष्ट हों। चुनौती से कभी मत भागो और किसी भी कर्तव्य को पूरा करने के लिए संसाधनपूर्ण बनो।

जटायु

जटायु की तरह हमेशा सही के साथ खड़े होने के लिए तैयार रहो। जटायु को अपने अराध्य श्री राम की शक्ति पर पूरा भरोसा था। जटायु हमें अंत तक लड़ना सिखाते हैं। वफादारी और स्वाभक्ति के मायने बताते हैं।

विभीषण

विश्व के हितों को ध्यान में रखते हुए विभीषण की तरह बनें। विभीषण की तरह इसलिए भी बनो, क्योंकि उन्होंने असत्य के बीच रहते हुए भी सत्य का अनुसरण किया। सत्य के मार्ग पर चलने लिए अपने कुल और परिवार तक को त्याग दिया।

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