Rama Returns

इतिहास के झरोखे से राम मंदिर का संघर्ष

ram mandir timeline

त्रेता युग ने अयोध्या से भगवान राम का राज्य देखा था। हिंदुओं के अराध्य भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या उनके भक्तों के लिए उनकी तरह ही प्रिय है। समय की कसौटी पर राम मंदिर भी कसा गया। भगवान राम के अस्तित्व से लेकर उनके जन्म स्थान तक को विवाद की श्रेणी में खड़ा करने का षड़यंत्र रचा गया। अब जब राम मंदिर की पुनर्स्थापना हो रही है तो इतिहास के जरिए जानते हैं राम मंदिर की पूरी कहानी।

आक्रमण और विध्वंस

सन 1528 में मुग़ल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बाक़ी ने राम मंदिर ध्वस्त करवाकर उस जगह एक मस्जिद का निर्माण करवाया। कई साल बाद 1766 में ऑस्ट्रियाई जेसुइट जोसेफ टाईफेंथेलर ने अवध का दौरा किया और उन्होंने देखा कि  मस्जिद के भीतर हिंदू समुदाय एक वेदी की पूजा करते हैं और मुसलमानों ने कभी नमाज अदा नहीं किया।

आस्था का संरक्षण

1858 में एक निहंग, फकीर सिंह खालसा ने जन्मस्थान के अंदर हवन और पूजा किया। साथ ही ये भी साफ हो गया कि परिसर में श्री भगवान का प्रतीक स्थापित है। 1885 में महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला न्यायालय में विवादित ढांचे के बाहर टेंट बनाने की अनुमति देने की अपील की, पर याचिका खारिज की गई।

हिंदू चेतना का उदय

साल था 1949, जब रामलला की मूर्तियां विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद के नीचे मिलीं, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मूर्तियों को हटाने का आदेश दिया। प्रशासन को मूर्तियां हटाने के लिए विवश किया जाने लगा तो फैजाबाद के जिला मजिस्ट्रेट केके नायर ने मंदिर से हिंदू मूर्तियों को हटाने से इनकार कर दिया। जवाहरलाल नेहरू और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जीबी पंत ने केके नायर को निलंबित कर दिया। वक्त बीतता रहा और राम मंदिर पर राजनीति की आंच लगातार पड़ती रही।

साल 1983 में  विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए देशव्यापी आंदोलन शुरू किया और  21 जुलाई 1984 को राम जन्मभूमि योजना समिति का गठन किया गया।  महंत अवैद्यनाथ को इसका अध्यक्ष बनाया गया। आखिरकार  1 फरवरी, 1986 को स्थानीय अदालत ने राज्य सरकार को हिंदू उपासकों के लिए स्थल खोलने का आदेश दिया। इसके तीन साल बाद नवंबर 1989 में वीएचपी ने अयोध्या में शिलान्यास समारोह किया और योजनाबद्ध राम मंदिर का पहला पत्थर रखा गया।

साल आया 1990 और  सितंबर में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान बिहार में आडवाणी गिरफ्तार हो गए। फिर रामभक्तों ने राजनीति का एक बदरंग चेहरा देखा, जब  नवम्बर 1990 को यूपी के  तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर यू.पी. पुलिस ने कारसेवकों पर गोलियां बरसाईं, इस गोलीकांड में कई कारसेवकों की मौत हो गई।  6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा गिरा।

आखिरी जंग

24 अक्टूबर, 1994 को सुप्रीम कोर्ट  ने ऐतिहासिक इस्माईल फारुकी मामले में फैसला सुनाया और कहा  मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। कई साल की लड़ाई के बाद  अप्रैल, 2002 में  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित स्थल के स्वामित्व को निर्धारित करने के लिए सुनवाई शुरू की। 8 साल और बीते जो बेनतीजा रहे।  30 सितंबर, 2010 हाईकोर्ट ने  2: 1 बहुमत में  सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच विवादित क्षेत्र का तीन-तरफा विभाजन का फैसला दिया। 9 मई, 2011 को  सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर हाईकोर्ट  के फैसले को बरकरार रखा।

2014 में सत्ता परिवर्तन हुआ और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। नई सरकार के अंतर्गत विकास कार्यों में तेजी आने लगी। राम मंदिर के मामले में न्यायालय अपना काम करती रही। 21 मार्च, 2017 को  सीजेआई जेएस खेहर ने प्रतिद्वंद्वी दलों को कोर्ट के बाहर निपटान का सुझाव दिया।

एक साल बाद 27 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ को सौंपने का फैसला किया। मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर को नवगठित तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा की गई। 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के समय को तय करने के जनादेश के साथ एक उपयुक्त पीठ के समक्ष जनवरी के पहले सप्ताह को फिक्स किया।

राम मंदिर का सपना धीरे-धीरे सच होने के करीब होने जा रहा था।  8 जनवरी  2019 को सुप्रीम कोर्ट  ने मामले की सुनवाई के लिए पांच जजों की संवैधानिक पीठ का गठन किया। इसी बीच 29 जनवरी 2019 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट  से 67 एकड़ अधिग्रहित भूमि को मूल मालिकों को वापस करने की अनुमति मांगी।

अभी तक राम मंदिर पर कोई रास्ता नहीं निकल पाया था। 26 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का पक्ष जताया और 5 मार्च को अदालत द्वारा नियुक्त मध्यस्थ को मामले को संदर्भित करने का आदेश दिया गया। इसके बाद 8 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कल्लीफुल्ला की अध्यक्षता वाले पैनल द्वारा मध्यस्थता के लिए विवाद को संदर्भित किया।

2 अगस्त 2019 को मध्यस्थता विफल हौ गई। फिर सुप्रीम कोर्ट ने  6 अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला किया।  6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट  ने भूमि विवाद पर प्रतिदिन सुनवाई शुरू की।

राम मंदिर का सवेरा

आखिरकार वो दिन आ गया, जिसका सैकड़ों साल से इंतजार था। भारत की आजादी के करीब 70 साल बाद रामलला को अपने घर का अधिकार मिला। 9 नवंबर 2019 वो ऐतिहासिक दिन है, जब सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में पूरे 2.77 एकड़ विवादित भूमि को रामलला को आवंटित किया साथ ही केंद्र और यूपी सरकार को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला सुनाया

राम मंदिर शिलान्यास की शुभ घड़ी

2020 के दूसरे महीने में 5 फरवरी को पीएम मोदी ने अयोध्या राम मंदिर के लिए 15 सदस्यीय ट्रस्ट की घोषणा की साथ ही  संसद में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन आवंटित की गई।

5 अगस्त वो शुभ घड़ी, जिसका रामभक्तों को दशकों से इंतजार था। राम मंदिर के भूमिपूजन में पीएम मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल।

सैकड़ों सालों बाद भगवान राम को वापस अपना घर मिला है। न्याय की जीत हुई और न्यायपालिका में लोगों का भरोसा और भी पुख्ता हुआ।

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