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जानिए! किस तरह राहुल ने गढ़ी राफेल की झूठी कहानी?

Rafale Lies by Rahul Gandhi

पिछले 5 साल में देश ने एक भी घोटाला नहीं देखा। ऐसा शायद हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार ही हुआ होगा, जब एक सरकार बिना किसी घोटाले के दाग के साथ अगले चुनाव में जनादेश माँगने जा रही हो। पर विपक्ष को भी पता था कि बिना किसी दाग के प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव में हराना बहुत मुश्किल होगा। वो कहते हैं ना, अगर आप किसी को समझा नहीं सकते तो उसे भ्रमित कर दो। विपक्ष और कांग्रेस पार्टी ने भी इन्ही पक्तियों को आधार बनाकर रफाल डील के आस पास एक ताना बाना बुनना शुरू किया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को इस षड्यंत्र को रचने के लिए बहुत सारे झूठों का सहारा लेना पड़ा हैं। आज हम इस ताने बाने के हर झूठ को अपने पाठकों के सामने रख रहे हैं।

दिमाग को हिला कर रख देने वाली इस रिपोर्ट में सारे झूठ एक एक करके प्रस्तुत किये गए हैं।

1. सुप्रीम कोर्ट के नाम पर झूठ

अभी हाल ही में राहुल गांधी ने अपने झूठ के लिए सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी है। इसी साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत सिन्हा व अरूण शौरी द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट कुछ ऐसे दस्तावेजों को अगली सुनवाई में शामिल करने पर विचार करने को कहा था कि जिनके बारे में सरकार का यह कहना था कि ये कागजात किसी ने चुराकर एक अंग्रेजी दैनिक को दिया था और उस अंग्रेजी दैनिक ने अपने हिसाब से इसके कुछ हिस्से को छापा था। इसलिए इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि ये दस्तावेज शामिल किए जाएंगे। बस क्या था राहुल गांधी उछल पड़े और अमेठी में अपने चुनाव प्रचार के दौरान यह बयान दे दिया कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया कि प्रधानमंत्री करप्शन में शामिल हैं और कह दिया कि चौकीदार चोर है।

भाजपा की सांसद व मीनाक्षी लेखी ने इस पर आपत्ति जताई और राहुल गांधी द्वारा अपनी बात को सुप्रीम कोर्ट के मुंह में डालने को लेकर अदालत की अवमानना का केस सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया और राहुल गांधी को नोटिस जारी कर दिया। बस क्या था, सारी हेकड़ी निकल गई। उन्होंने तुंरत माना कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर चौकीदार चोर है कहने में झूठ का सहारा लिया। राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से झूठ बोलने पर माफी भी मांगी। बहाना बनाया कि चुनाव की गहमा गहमी में उन्होंने ऐसा कह दिया । लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मासूमियत को मानने से इनकार कर दिया और अभी भी यह मामला चल रहा है।

2. दिवंगत मनोहर पारिकर के मामले में भी झूठ

राहुल गांधी ने पूर्व रक्षा मंत्री व दिवंगत मनोहर पारिकर के मामले में भी झूठ बोला । राहुल गांधी ने दिवंगत मनोहर पारिकर से गोवा में उनके गिरते स्वास्थ्य के बारे जानने के बहाने मुलाकात की। लेकिन उनसे मुलाकात के बाद उन्होंने कोच्ची में अपनी रैली में कहा – ‘’दोस्तों पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पारिकर ने मुझसे स्पष्ट कहा कि उनका उस राफेल डील से कोई लेना देना नहीं है जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए किया है।‘’ राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति के स्तर को और नीचे गिराते हुए यह शर्मनाक झूठ बोला था। उल्लेखनीय है कि कि स्वर्गीय मनोहर पारिकर ने तुंरत ही एक बयान जारी कर राहुल गांधी के झूठ को ध्वस्त कर दिया था। राहुल गांधी के इस तरह से सरासर झूठ बोलने से परेशान मनोहर पारिकर ने भरे मन से कहा था ‘’कि मैं राहुल गांधी के व्यवहार से बहुत दुखी महसूस कर रहा हूं। स्वास्थ्य जानकारी के लिए महज पांच मिनट की मुलाकात में न उन्होंने राफेल के बारे में कहा ना मैने। वास्तव में बातचीत में राफेल का जिक्र भी नहीं आया।‘’

3. फ्रासं के पूर्व राष्ट्रपति को लेकर भी झूठ

राहुल गांधी देश के लोगों के नाम से झूठ तो बोलते ही हैं उन्होंने फ्रासं के पूर्व राष्ट्रपति होलांदे को भी उद्धृत करते हुए एक सफेद झूठ बोला। राहुल ने कहा ‘खुद फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकोइस होलांदे जी ने कहा है कि मोदी चोर है। भारत के प्रधानमंत्री चोर हैं’। जबकि सच्चाई तो यह है कि पूर्व राष्ट्रपति होलांदे ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ कभी भी किसी तरह के असम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।

होलांदे ने फ्रांस की एक मीडिया एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार में यह भी कहा था कि भारत की ओर से रिलांयस या अनिल अंबानी को ऑफसेट पार्टनर बनाने के किसी भी कथित दबाव के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, बल्कि इस मामले में दसाल्ट एविएशन ही कुछ बता सकता है। राहुल गांधी की झूठ यहां भी पकड़ी गई।

4. फ्रांस के वर्तमान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के मामले में भी झूठ

राहुल गांधी ने संसद में यह दावा किया था कि स्वयं फ्रांस के वर्तमान राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रोन ने उनसे कहा था कि राफेल डील में उनके देश और भारत के बीच कोई ‘‘सिक्रेसी क्लॉज़’’ नहीं है।  जो कि बाद में पूरी तरह झूठ साबित  हुआ । फ्रांस सरकार ने राहुल गांधी के इस बयान के फौरन बाद यह बयान जारी किया कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे में सिक्रेसी क्लॉज़ है जिसके मुताबिक भारत और फ्रांस दोनों में से कोई भी देश राफेल विमान को लेकर खास जानकारी किसी भी स्थिति में सार्वजनिक नहीं करेंगे। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने एक अलग साक्षात्कार में राहुल गांधी के इस दावे की कड़ी भर्त्सना की थी।

5. राहुल गांधी ने फ्रांस की मीडिया एजेंसी को उद्धृत करने में झूठ बोला

फ्रांस की मीडिया एजेंसी मीडियापार्ट ने अक्टूबर 2018 में राफेल पर एक रिपोर्ट छापी। राहुल गांधी ने उस रिपोर्ट को गलत तरीके से उदधृत करते हुए यहां तक कहा कि मीडियापार्ट कहता है कि दसाल्ट पर यह दबाव डाला गया था कि यदि यह डील चाहते हो तो अनिल अंबानी की कंपनी को आफसेट पार्टनर बनाओं नहीं तो यह डील कैंसिल हो जाएगी। राहुल गांधी का यह बयान पूरी तरह से गलत था, क्योंकि मीडियापार्ट ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था कि भारत ने दसाल्ट एविएशन से यह कहा है कि आफसेट पार्टनर चुनो ताकि डील आगे बढ़ाई जा सके। भारत सरकार ने रिलायंस क्या किसी भी कंपनी का नाम नहीं लिया। जाहिर है दसाल्ट की कई कंपनियों के साथ आफसेट पार्टनरशिप हैं उनमें से एक रिलायंस भी एक है।  दसाल्ट के सीईओ ने यह स्पष्ट कहा था कि आफसेट पार्टनर चुनना उनका विशेषाधिकार है। भारत और फ्रांस की सरकारों का इसमें कोई दखल नहीं है।

6. जब राहुल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी टीका टिप्पणी की

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर फैसला करते हुए कोर्ट ने यह स्पष्ट कह दिया था कि उनका काम कीमत या तकनीकी विवरण पर चर्चा करना नहीं है। कोर्ट सिर्फ यह देखेगी कि राफेल के अधिग्रहण में प्रकिया का पालन हुआ है कि नहीं । वह भी सुप्रीम कोर्ट ने खुले में इसकी सुनवाई से इनकार कर दिया। बल्कि केवल एक सील लिफाफे में सौदे (राफेल) पर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर एक रिपोर्ट देने के लिए कहा। इसे भी कांग्रेस ने ऐसे चित्रित करने की कोशिश की जैसे कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस सौदे पर सरकार से सवाल किया हो।

7. रक्षा मंत्रालय में एक अधिकारी को ‘दंडित‘ करने के मामले में भी झूठ बोला

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 27 सितंबर, 2018 को अपने ट्वीट में दावा किया कि रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को इसलिए जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया कि उसने राफेल सौदे पर असहमति जताया था। राहुल गांधी ने इसे ऐसे प्रचारित करने की कोशिश कि जैसे मोदी सरकार ने उक्त अधिकारी को दंडित ’किया था। राहुल गांधी के इस झूठ का पोल उसी अधिकारी ने खोल दिया जब सबके सामने आकर उसने ना सिर्फ इस दावे को गलत बताया, बल्कि यह भी बताया कि स्टडी लीव पर जाने  का उसका फैसला बहुत पहले का था और राफेल पर उसकी असहमति का इससे कुछ लेना देना नहीं था।

8. राहुल का एक और झूठ - फिल्म में फाइनेंस के बदले दसाल्ट ने रिलायंस को आफसेट पार्टनर बनाया।

कांग्रेस ने यह भी दावा किया था कि चूंकि रिलायंस ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति की महिला साथी गेयट की फिल्म का फाइनेंस किया था उसी के बदले में ही दसाल्ट ने रिलायंस को आफसेट पार्टनर बनाया।

यह फिर से एक झूठ को सच बनाने की कवायद थी। इस मामले में खुद रिलायंस ने स्पष्ट किया कि एक फ्रेंच फाइनेंसिंग फर्म विसविर्स कैपिटल के माध्यम से गेयट की फिल्म में भाग लिया था। लेकिन इस फिल्म में उसकी भागीदारी सिर्फ 15 प्रतिशत तक थी। रिलायंस ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि जूली गायेट या उनकी कंपनी, रूज इंटरनेशनल के साथ कोई समझौता नहीं किया है और रिलायंस एंटरटेनमेंट द्वारा कभी भी फिल्म के संबंध में कोई पैसा नहीं दिया गया हैं।

9. राहुल गाँधी और राफेल की अलग अलग कीमतें

राफेल के झूठ का सबसे बड़ा झूठ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा दी गयी अलग अलग कीमतें हैं। वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने राफेल कांग्रेस के समय न हुए सौदे से ज्यादा दामों पर ख़रीदा हैं। लेकिन जब सरकार द्वारा चुकाई जा रही प्रति राफेल की कीमत बताते हैं तो हर जगह एक अलग आकंड़ा सामने रखते हैं।

  • संसद में – 520 करोड़
  • कर्नाटक में – 526 करोड़
  • राजस्थान में – 540 करोड़
  • दिल्ली में – 700 करोड़

वैसे राहुल गाँधी की आंकड़ों से बहुत पुरानी दुश्मनी प्रतीत होती हैं वो आजकल अपनी न्याय स्कीम के भी इतने अलग अलग आंकड़े देते हैं कि जनता को वो स्कीम भी अन्याय लगने लगी हैं। ख़ैर, राफेल की राहुल गाँधी द्वारा बताई गयी अलग अलग कीमतें स्पष्ट करती हैं कि झूठ आपको अपने जाल में खुद ही फंसा लेता हैं।

राहुल गांधी को सत्ता चाहिए। लेकिन 10 साल के भ्रष्टाचार से भरे कांग्रेस के शासन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के बाद भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलायी हैं। कांग्रेस के लिए यह बर्दाश्त करना मुश्किल था। एक ही रास्ता बचा था कि कोई षडयंत्र कर एनडीए सरकार को बदनाम किया जाए। खासकर प्रधानमंत्री मोदी पर कोई कलंक लगाया जाए। और उसी षडयंत्र के तहत राफेल ‘घोटाले’ का निर्माण किया गया। फिर उस षडयंत्र पर झूठ के मुल्लमें चढ़ाए गए। एक के बाद एक। लेकिन जैसे जैसे उन्होंने झूठ बुना वैसे वैसे सच्चाई भी सामने आती गई और उनके झूठ को ध्वस्त करती चली गई।

किन्तु, राष्ट्र को विचार करने की आवश्यकता हैं क्यूंकि कांग्रेस और राहुल गांधी के प्रयासों से ऐसा लगता है 2019 के चुनाव में मोदी सरकार को बदनाम कर चुनावी फायदा उठाने के अलावा इसके पीछे और भी कोई बड़ा एजेंडा है।

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