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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: कम जोखिम किसानों की समृद्धि सुनिश्चित

मोदी सरकार ने 13 जनवरी, 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को मंजूरी दी थी। यह देश के किसानों को किफायती फसल बीमा प्रदान करते हुए और सभी संबंधित जोखिमों के व्यापक कवरेज के संदर्भ में सर्वोत्तम विकल्प प्रदान करने के लिए लॉन्च किया गया था। भारतीय किसान पीएमएफबीवाई के साथ स्वयं के एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख समृद्धि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के फायदे

पीएमएफबीवाई में फसल चक्र के सभी गैर-रोके जाने योग्य प्राकृतिक जोखिम को कवर किया गया है– बुवाई से लेकर फसल की कटाई तक। इसके तहत 23 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों को कवर किया गया साथ ही महज 4 वर्षों में 7.2 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। महज 17450 करोड़ रुपये के प्रीमियम के मुकाबले 87000 करोड़ रुपये से अधिक के दावे का भुगतान किया गया है। सरकारी सब्सिडी पर ऊपरी सीमा नहीं, अगर बैलेंस प्रीमियम 90% है तो भी यह सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों को अपनी फसलों का बीमा कराने के लिए बहुत मामूली प्रीमियम देना पड़ता है। प्रत्येक 100 रुपये के लिए जो किसानों ने प्रीमियम के रूप में भुगतान किया है, किसानों को दावे के रूप में 532 रुपये प्राप्त हुए। पीएम फसल बीमा योजना के तहत बीमा राशि प्रति हेक्टेयर 2.5 गुना से अधिक बढ़ी है।

योजना के लक्ष्य

1-प्राकृतिक आपदा, कीड़े और रोग की वजह से सरकार द्वारा अधिसूचित फसल में से किसी नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा कवर और वित्तीय सहायता देना।

2-किसानों की खेती में रुचि बनाये रखने के प्रयास एवं उन्हें स्थायी आमदनी उपलब्ध कराना।

3-किसानों को कृषि में नवाचार एवं आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।

4-कृषि क्षेत्र में लोन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2.0

पीएम फसल बीमा योजना का पुनर्गठन कवरेज को बढ़ाने और किसानों को अधिक लाभ देने के लिए किया गया। किसानों के फीडबैक के बाद इस योजना की सदस्यता को स्वैच्छिक बनाया गया है।

2020 में योजना के सबसे हालिया सुधार के बाद, यह दूरदराज के क्षेत्रों में अधित लाभ के लिए राज्यों द्वारा अधिसूचना को बढ़ावा देने और किसानों के अधिक कवरेज की सुविधा प्रदान करता है। केंद्र और उत्तर पूर्वी राज्यों के बीच प्रीमियम सब्सिडी साझा करने के पैटर्न को 50:50 से बदलकर 90:10 कर दिया गया है।

पीएमएफबीवाई 2.0 से दावों का जल्द और पारदर्शी निपटारा

पीएम फसल बीमा योजना के तहत औसतन 87% से अधिक दावों का निपटारा किया गया और किसानों को भुगतान किया गया है। राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल ने किसानों, बीमा कंपनियों, राज्य सरकारों और बैंकों को एक साथ जोड़ा है। हर सीजन में 1.75 लाख से अधिक बैंक शाखाएं और 44,000 कॉमन सर्विस सेंटर पोर्टल पर किसानों का डेटा दर्ज करते हैं।  इससे उपज का पारदर्शी और समय पर मूल्यांकन और किसानों के दावों का त्वरित निपटान सुनिश्चित हुआ है। किसानों को उनके दावों के भुगतान में देरी के मामले में जुर्माना भी मिलेगा। वहीं बीमा कंपनियों को अब राज्यों द्वारा एक वर्ष के बजाय 3 साल के लिए चुना जाएगा जिससे उनकी प्रतिबद्धता और जवाबदेही बढ़ेगी। संशोधित पीएमएफबीवाई 2.0 के साथ  सरकार समय पर मूल्यांकन और दावों के भुगतान को प्रभावित करने वाले मुद्दों का समाधान करने के लिए व्यापक रूप से प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की परिकल्पना कर रही है।

किसानों के जोखिम को कम करने के लिए अधिक कवरेज

किसानों के जोखिम को कम करने के लिए कटाई के बाद के नुकसान और बेमौसम व चक्रवाती वर्षा, ओलावृष्टि भी कवर किया गया है। योजना लागू करने में राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए लचीलापन होगा साथ ही उनके पास प्रतिबंधित बुवाई, लोकल डिजास्टर, मिड सीजन में विपरीत परिस्थिति और फसल कटाई के बाद के नुकसानों जैसे एडिशनल रिस्क कवर में से कोई एक या अनेक चुनने का विकल्प होगा। राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश ओला-वृष्टि आदि जैसे विशिष्ट एकल जोखिम/इंश्योरेंस कवर की पेशकश पीएमएफबीवाई के अंतर्गत बेस कवर के साथ और बेस कवर के बिना दोनों स्थितियों में कर सकते है।

इसके अलावा इस योजना के अंतर्गत ऐसी प्राकृतिक आपदाएं भी शामिल हैं जिससे होने वाले नुसान की भरपाई की जाएगी। इसके अंतर्गत असफल बुवाई, रोपण, फसल के माध्यम में होने वाली हानि, स्थानीय आपदाओं को शामिल किया गया है।

असफल बुवाई- अगर प्रतिकूल मौसम के चलते किसी कारणवश बुवाई न हो पाए तो कुल बीमित राशि का 25% दावा देय होगा फिर बीमा समाप्त हो जाएगा।

मध्यावधि आपदा मध्य फसल के दौरान मौसम से नुकसान बाढ़, अकाल, सूखा, कीट और रोगनाशक, भूस्खलन, प्राकृतिक आग, बिजली, आंधी, तूफान, चक्रवात, आदि को भी शामिल किया गया है।

स्थानीय आपदा योजना के अंतर्गत स्थानीय आपदा जैसे ओला वृष्टि, जल भराव, बिजली गिरना, प्राकृतिक आग, बादल फटना, भूस्खलन, होने पर बीमित किसानों को व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।

फसल नुकसान का दो चरणों में होगा आकलन

फसल नुकसान के आकलन के लिए दो चरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह प्रक्रिया डिफाइंड क्लीयरेंस मैट्रिक्स पर बेस होगी और इसमें वेदर इंडीकेटर्स, सेटेलाइट इंडीकेटर्स इत्यादि का इस्तेमाल प्रत्येक क्षेत्र के लिए सामान्य सीमा और अंतर सीमाओं के साथ किया जाएगा। पीएमएफबीवाई में पैदावार नुकसान निर्धारण के लिए केवल अंतर वाले क्षेत्र ही फसल कटाई प्रयोगों यानी कि सीसीई के अधीन होंगे। सीसीई संचालन में स्मार्ट सैंपलिंग टेक्निक और सीसीई की संख्या के ज्यादा उपयोग को अपनाया जाएगा.

उम्मीद है कि इन बदलावों से किसान बेहतर तरीके से उपज उत्पादन में जोखिम प्रबंधन करने में सक्षम होंगे और कृषि आय को स्थिर बनाने में सफल होंगे। ये बदलाव जल्द और सटीक पैदावार आकलन को सक्षम बनाएंगे, जिससे दावों का निपटारा तेजी से होगा। इन परिवर्तनों को पूरे देश में खरीफ 2020 सीजन से लागू करने का प्रस्ताव है।

 

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