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प्रधानमंत्री मोदी की जीत का कारण – उन्होंने सच जनता के सामने रखा और विपक्षी झूठ परोसते रहे

PM Modi Win Lok Sabha Election 2019

लोकसभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर सरकार का गठन करने जा रहे हैं। दुनिया अचंभित है कि स्वतंत्र भारत में नेहरू और इंदिरा के बाद कैसे मोदी ने लगातार दो कार्यकाल के लिए इतना भारी बहुमत प्राप्त किया। राजनीति में यह असंभव सा लगने वाला कीर्तिमान आखिर कैसे बन गया। आइए हम जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने किन मुद्दों पर जनता के समक्ष अपनी बात रखी और जनता ने कैसे अपनी सहमति के रूप में भारी समर्थन दिया।

राष्ट्रीय सुरक्षा

इसमें कोई दो राय नहीं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश को एक नया आयाम दिया है। मोदी पिछली सरकारों की तरह राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मामले किसी तरह की कोई ढिलाई या किंतु परंतु में विश्वास नहीं करते। पुलवामा के बाद बालाकोट में एयरस्ट्राइक कर उन्होंने जता दिया कि पहले की तरह अब नहीं चलेगा। पिछली सरकारों ने सिर्फ बातों में ही समय जाया कर दिया। ना तो उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई की और ना ही  इस मामले में भारत के पक्ष में अंतराष्ट्रीय स्तर पर माहौल बनाने का ही कोई प्रयास किया। मोदी ने ठीक इसके उलट राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई की, बल्कि यह भी दिखा दिया कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति जीरो टोलरेंस की है। चुनाव के दौरान मोदी ने जनता के समक्ष अपना यह दृष्टिकोण रखा और देश की सुरक्षा में लगे जवानों को अधिकतम संभव सम्मान का भाव युवा वर्ग में जगाया। राष्ट्रीय अभिमान का यह भाव लोगों ने पसंद किया और मोदी जी को वोट दिया।

पाकिस्तान को जवाब कार्रवाई से न कि सिर्फ बात से

जब नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से आतंकवाद पर अपने यहां कार्रवाई करने और नही तो परिणाम भुगतने की बात कही तो पाकिस्तान ने इस पर कोई उत्साह नहीं दिखाया। अलबत्ता वह यह बताने में व्यस्त रहे कि भारत ने ही यह कार्रवाई खुद कराई है। पीएम मोदी ने तब यह तय किया कि अब भारत पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देगा। बालाकोट पर एयरस्ट्राइक करके उन्होंने इमरान खान को बता दिया कि भारत अब और अपने जवानों या या नागरिकों की शहादत नहीं दे सकता। भारत अब वहीं जाकर आतंकवादियों को मारेगा जहां से वह भारत पर हमले की तैयारी करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ना सिर्फ पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब दिया, बल्कि इस मामले में पूरी दुनिया का भी समर्थन प्राप्त किया। पहली बार विश्व के बड़े देशों ने इस मामले में भारत का खुल कर साथ दिया और यह माना कि भारत को अपने खिलाफ हमले का जवाब देने का अधिकार है। एक तरफ तो मोदी ने आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर जाकर खत्म करने का आदेश सेना को दिया वहीं पाकिस्तान दिवस पर बधाई देकर यह भी संदेश दिया कि भारत का पाकिस्तान के नागरिकों से कोई वैर नहीं। चुनाव में पीएम मोदी का यह हुंकार कि आतंकवादियों को उनके घर में घुस कर मारेंगे जनता को बहुत पसंद आया और लोगों को लगा कि भारत में नरेन्द्र मोदी की ही सरकार एक मजबूत भारत का निर्माण कर सकती है। लोगों ने पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने का मोदी का अंदाज बहुत पंसद किया और जम कर मोदी के पक्ष में वोट भी किया।

चुनाव आचार संहिता पर विपक्ष की नासमझी

जब प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष मिसाइल ए-सैट के सफल परीक्षण की घोषण चुनाव के बीच में ही की तो विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघण है। प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान जनता के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि क्या रक्षा तैयारियों को चुनाव के लिए रोकना ठीक है। उन्होंने विपक्ष के इस दावे को भी खारिज किया कि इस परीक्षण की क्षमता भारत के पास पहले से थी लेकिन उन्होंने अपने समय इसका परीक्षण करना उचित नहीं समझा। पीएम मोदी ने जनता को यह समझाया कि देश में एक निर्णायक सरकार क्यों जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि अगर देश में कोई आपात काल आ जाए तो क्या हम आचार संहिता को देखकर फैसला लेंगे। उन्होंने कहा कि ए-सैट के परीक्षण की घोषणा उन्होंने चुनाव को देखकर नहीं किया। वैज्ञानिकों ने इसकी तिथि तय की और हमने यह परीक्षण कर दिया। जनता को यह बात समझ में आई और वोट मोदी जी को गया।

वंशवाद पर प्रहार

प्रधानमंत्री मोदी जानते थे कि देश में वंशवाद की राजनीति देश को गर्त में ले जा रही है। इसलिए उन्होंने वंशवाद पर जबर्दस्त प्रहार किया। उन्होंने जतना को यह समझाया कि जब कोई पार्टी परिवार के लिए काम करती है तो क्या परिणाम मिलता है और जो पार्टी देश के लिए काम करती है उसका परिणाम क्या होता है। जब पार्टी परिवार के लिए काम करती है तो वह एक प्राइवेट कंपनी जैसी बन जाती है, जहां अध्यक्ष या कोषाध्यक्ष जैसे पद परिवार के बाहर के लोगों को नहीं दिए जाते। प्रधानमंत्री ने वंशवाद का मुद्दा केवल कांग्रेस के लिए हीं नहीं टीडीपी और समाजवादी पार्टी के खिलाफ भी उठाया। वंशवाद के मुद्दे को जनता ने पंसद किया और भाजपा को जबर्दस्त समर्थन दिया।

कांग्रेस की विश्वसनीयता और उनकी बड़ी-बड़ी घोषणाएं

चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार कांग्रेस की विश्वसनीयता के बारे में जनता को बताया। प्रधानमंत्री ने स्मरण कराया कि 2004 और 2009 के घोषणापत्र में कांग्रेस ने जो बड़ी बड़ी घोषणाएं की थी उस पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने क्या काम किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने इन दोनों चुनावों में घोषणा की थी कि वे किसानों को प्रत्यक्ष आय सहयोग राशि देंगे। लेकिन उन्होंने नहीं दिया। जबकि यूपीए 1 और यूपीए 2 सरकार को 10 साल का समय मिला। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कैसे उनकी सरकार ने किसानों के हित में कदम उठाए हैं और 2022 तक किसानों की आमदनी दुगनी करने वाली योजनाएं शुरू की है। प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को यह भी याद दिलाया कि किस तरह से 50 साल से कांग्रेस गरीबी हटाओ का नारा दे रही है और जनता को बेवकूफ बनाती आ रही है। जनता के पीएम मोदी की बातों पर भरोसा किया और दबा के वोट दिया।

नौकरियों पर जवाब

नौकरियों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से ढेंर सारे सवाल पूछे गए। और पीएम मोदी ने अतीत का जिक्र करते हुए यह बताया कि कैसे एक राजनीतिक वर्ग के इशारे पर मीडिया ने वाजपेयी सरकार के दौरान रोजगार सृजन की झूठी तस्वीरें पेश कर लोगों को गुमराह किया। प्रधानमंत्री ने सेक्टर वाइज जवाब दिया कि किस तरह उनकी सरकार ने हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर बनाए। उन्होंने ईपीएफओ डेटा, सड़कों और रेलवे के निर्माण के दोहरीकरण और सौर ऊर्जा उद्योग मे माध्यम से से नौकरियों के निर्माण का ब्यौरा दिया। विपक्ष सिर्फ आरोप लगाता रह गया। जनता ने मोदी के आकड़ों पर भरोसा किया और पूरा समर्थन दियां।

राजनीति से परे सुशासन की बात

एक तरफ मोदी ने एक ऐसे राजनेता के रूप में अपनी छवि प्रस्तुत की जो हर हाल में देश का विकास करना चाहता है और इसके लिए वह किसी के साथ भी मिल कर आगे चलना चाहता है। जबकि विपक्ष ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियता के बजाय निजी दुश्मनी की तरह व्यवहार किया। पीएम मोदी ने जनता को बताया कि किस तरह विपक्ष के नेताओं ने अपने क्षुद्र राजनीतिक हितों के लिए बालाकोट पर सशस्त्र बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाया।

पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान एक रचनात्मक राष्ट्र-निर्माण का एजेंडा लोगों के सामने रखा और उसका उन्हें भरपूर समर्थन भी मिला।

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