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राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को दिखाया आइना

PM Modi Rajya Sabha

2014 से 2019 तक के शासन में हमने देख लिया है कि प्रधानमंत्री मोदी मिशन मोड पर काम करते हैं। उनकी इस कार्यशैली का देश को बहुत लाभ हुआ है। ‘हैव्स और हैव्स नॉट’ के बीच जो बड़ी खाई थी, उन्होंने काफी हद तक पाट दिया है। अब उनका मिशन लोगों के एसपिरेशन यानि आकांक्षा को पूरा करने से जुड़ गया है। राज्य सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा के जवाब में पीएम मोदी ने 26 जून को अपने जवाब में इस एसपिरेशन को पूरा करने का रोड मैप खुले दिल से प्रस्तुत किया। लोकसभा की तरह यहां भी उन्होंने सदन का मिजाज कड़वाहट से दूर सौहार्द के साथ चलाने का संकल्प दुहराया। पीएम की बातों पर अधिकांश समय विपक्ष के नेता मुस्कराते रहे। राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर नाम लिया और श्री आजाद ने भी प्रधानमंत्री की बातों का मेज थप -थपाकर स्वागत किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सभा में अपने भाषण की शुरूआत हाल ही में दिवंगत राज्यसभा सदस्य और राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष मदन लाल सैनी को श्रद्धांजलि से की। अपने अभिन्न मित्र अरूण जेटली को भी याद किया, जो आजकल स्वास्थ्य कारणों से सदन में आ नहीं पा रहे हैं।

चुनाव सुधार

चुनाव सुधार प्रधानमंत्री का पसंदीदा विषय है। अभी से नहीं, बल्कि एक साल पहले से ही वे कहते आ रहे हैं कि वन नेशन वन इलेक्शन होना चाहिए। इससे ना सिर्फ पैसे की बचत होगी, बल्कि काम काज का समय जाया होने से भी बचेगा। प्रधानमंत्री ने हाल ही में इस संबंध में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन कांग्रेस समेत कई दलों ने इस बैठक से अपने को दूर रखा। राज्यसभा में अपने दिए भाषण में प्रधानमंत्री ने लगभग 20 मिनट चुनाव सुधार को दिया। उन्होंने दिल खोलकर इस मुद्दे पर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनाव सुधार पर देश में खुले मन से विचार होना चाहिए। हो सकता है कि आप हमारी बातें ना मानो, लेकिन इस पर चर्चा तो हो।

पीएम मोदी ने विपक्ष के उन तमाम शंकाओं का समाधान करने की कोशिश की, जिन्हे विपक्ष अनौपचारिक तौर पर उठा रहा है।  विपक्ष मीडिया के जरिए यह आरोप लगा रहा है कि एक देश एक चुनाव के पीछे भाजपा की यह साजिश है कि क्षेत्रीय दल को समाप्त कर दिया जाए। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा – ‘2019 में लोकसभा चुनाव के साथ आंध्रप्रदेश और उड़ीसा जैसे बड़े राज्यों में भी विधान सभा के चुनाव हुए और इन दोनों राज्यों में क्षेत्रीय दलों को जीत हासिल हुई। आंध्रप्रदेश में जगन की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस जीती तो उड़ीसा में नवीन पटनायक की बीजेडी।‘ पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष की इस आशंका में भी दम नहीं है कि यदि एक साथ सभी चुनाव कराए जाएंगे तो मतदाता भ्रमित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें जागरूक मतदाता के विवेक पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने फिर से उड़ीसा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ऐसा भी हुआ है कि जिन लोकसभा सीटों पर भाजपा जीती है, उनके नीचे आने वाले अधिकतर विधानसभा सीटों पर बीजू जनता दल को जीत मिली है। स्पष्ट है कि जनता इस बात से पूरी तरह सजग है कि उसे किसको किस काम के लिए वोट देना है।

एक देश एक वोटर लिस्ट

प्रधानमंत्री ने विपक्ष से कहा कि ‘यदि एक देश एक चुनाव पर सहमत नहीं है तो क्याएक देश एक वोटर लिस्ट पर सहमत हो सकते हैं?’ उन्होंने कहा कि इस समय जितने तरह के चुनाव होते हैं उतने तरह की वोटरों की सूची भी होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी राज्य के मुख्यमंत्री क्या ऐसा नहीं कर सकते कि जो वोटर लिस्ट पंचायत के चुनावों के लिए तैयार की जाती है उसी वोटर लिस्ट से देश का आम चुनाव भी हो। उन्होंने कहा कि चूंकि पंचायत चुनाव में एक एक वोट का महत्व है, जीत हार का अंतर 30 -40 वोटों का होता है, इसलिए उसमें ऐसी संभावना नहीं है कि किसी का नाम छूट जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1952 से ही चुनाव सुधार की प्रक्रिया चल रही है। जिसे आगे भी चलना चाहिए। इस पर खुल कर चर्चा होनी चाहिए।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर आरोप बेबुनियाद

प्रधानमंत्री ने विपक्ष के ईवीएम पर आरोप को बेबुनियाद बताते हुए कई मजबूत तर्क दिए। उन्होंने अपने तर्कों से यह साबित करने की कोशिश की कि ईवीएम को लागू करने में कांग्रेस की भूमिका सबसे बड़ी है और कांग्रेस इसी ईवीएम के जरिए कई जीत का स्वाद चख चुकी है। पीएम मोदी ने कहा कि मतदान के लिए मशीन के उपयोग की चर्चा 1977 में ही शुरू हो गई थी। ईवीएम का पहला प्रयोग भी 1982 में हो गया था। तब देश में कांग्रेस की ही सरकार थी। ईवीएम से सबंधित कानून संसद से 1992 में पास कराया गया, तब भी कांग्रेस ही सत्ता में थी। तब से लेकर 113 विधानसभा और 4 लोकसभा का आम चुनाव इसी ईवीएम से हुआ है और इसके जरिए देश की सत्ता बदलती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम को लेकर कई अदालतों से भी इसके पक्ष में फैसले आ चुके हैं, फिर भी विपक्ष यदि ईवीएम पर सवाल उठाता है तो उसकी मंशा चुनावी प्रक्रिया को पटरी पर से उतारने की है। पीएम मोदी ने विपक्ष को यह समझाते हुए कहा कि भारत की चुनाव प्रक्रिया पूरी दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया है और इसके जरिए देश में निष्पक्ष चुनाव होने से पूरे विश्व में भारत का सम्मान बढ़ता है। पीएम पोदी ने कहा कि वीवीपैट के शत प्रतिशत सफल होने के बाद ईवीएम को और प्रमाणिकता मिल गई है।

चुनाव में अपनी हार को लोकतंत्र की हार बताना मतदाताओं का अपमान

पीएम मोदी उस वक्त थोड़े तल्ख हो गए जब उन्होंने किसी कांग्रेस सदस्य द्वारा 2019 के चुनाव में भाजपा को मिली जीत को लोकतंत्र की हार बताने और भारत के हारने के वक्तव्य का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने लगभग नाराजगी जताते हुए कहा- दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के परिपक्व जनमत की ग्लोबल वैल्यू है। अपनी विकृति के कारण इतने बड़े जनादेश को देश का चुनाव हारना कहना मतदाताओं का घोर अपमान है। इससे ज्यादा भारत के लोकतंत्र का अपमान नहीं हो सकता। कांग्रेस का यह आरोप गंभीर रूप से देश को सोचने पर मजबूर करती हैं। प्रधानमंत्री ने उल्टे सवाल करते हुए कहा कि क्या वायनाड में भी हिंदुस्तान हार गया?  क्या रायबरेली में भी हिंदुस्तान हार गया? क्या अमेठी में भी हिंदुस्तान हार गया ? उन्होंने सदन से पूछा – कांग्रेस हारी तो देश हार गया क्या? प्रधानमंत्री ने कहा –अहंकार की एक सीमा होती है। जो 17 राज्यों में एक भी सीट नहीं जीत पाया वह कह रहा है कि देश हार गया।

किसान बिकाऊ नहीं

प्रधानमंत्री ने इस कथन की भी पूरजोर भर्तस्ना की जिसमें किसी कांग्रेस के नेता ने कहा था कि किसान 2 हजार रुपये पर बिक गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश के 15 करोड़ किसान परिवारों का अपमान है। हमारे देश के किसान बिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार पुरूषों और महिलाओं के मत प्रतिशत एक हैं। अन्यथा महिलाएं मताधिकार में पिछड़ जाती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2019 के जनमत का वह सिर झुकाकर अभिवादन करते हैं।

सभी विषयों पर विरोध उचित नहीं

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के एक कथन को उद्धृत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि बहुमत मिलने वाले को जनता शासन करने का अधिकार देती है, जिनको बहुमत नहीं मिलता उन्हें विरोध करने का अधिकार देती है लेकिन किसी को भी जनता कार्य अवरूद्ध करने का अधिकार नहीं देती। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें मालूम है कि राज्यसभा में हमारा बहुमत नहीं है इस कारण पिछले कार्यकाल में हमारे कार्यों में बहुत अवरोध पैदा किया गया, लेकिन यह सदन जान ले कि जिन लोगों ने जानबूझ कर जनता के कामों को अटकाया, उसमें अड़ंगा लगाया, जनता ने उनकी पार्टी को इस बार सबक सिखा दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अपोजिशन का मतलब विरोध करना है लेकिन सभी विषयों पर विरोध उचित नहीं है। यहां तो विपक्ष ने हर मुद्दे पर विरोध किया, चाहे वह जनधन खाते की बात हो, या डिजिटल पेमेंट की या फिर आधार या जीएसटी की। बस विरोध के लिए विरोध। प्रधानमंत्री ने विपक्ष से अनुरोध किया कि वे देश को निराशा में धकेलने का पाप ना करें।

जनता को नये भारत की प्रतीक्षा

चर्चा के दौरान विपक्ष के एक नेता ने यह भी कहा था कि उन्हें न्यू इंडिया नहीं चाहिए उन्हें तो ओल्ड इंडिया ही चाहिए। इस पर प्रधानमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वह ओल्ड इंडिया चाहिए जहां केबिनेट के फैसले को प्रेस परिषद में फाड़ दिया जाता है। वह ओल्ड इंडिया चाहिए जहां रोज घोटाले से लोग परेशान होते हैं या वह ओल्ड इंडिया चाहिए जिसमें टुकडे टुकडे गैंग का समर्थन करने लोग पहुंच जाते है। इस ओल्ड में भारत के लोग कभी नहीं जाना चाहेंगे जहां बिना बिचौलिए के रेल रिजर्वेशन नहीं होता था, जहां गैस के लिए लंबी कतारें लगती थी। जहां पासपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था और जहां इंस्पेक्टर राज लागू था। देश की जनता नये भारत की प्रतीक्षा कर रही है। हमने नीति, रणनीति, वृति और प्रवृति में आवश्यक बदलाव किया है।  प्रधानमंत्री ने अंत में यह अपील की कि लोकसभा के चुनाव में देश ने बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है। इस बात को लेकर हमारे साथ राज्यसभा के सांसद नयाय करेंगे, ऐसी अपेक्षा रहेगी।

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