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आत्मनिर्भर भारत की मिसाल नेशनल अटॉमिक टाइमस्केल, भारतीय निर्देशक द्रव्य और नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंटर्ड्स लेबोरेट्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जनवरी को नेशनल मेट्रोलॉजी कॉन्क्लेव का उद्धाटन किया. उन्होंने नेशनल अटॉमिक टाइमस्केल और भारतीय निर्देशक द्रव्य राष्ट्र को समर्पित किया साथ ही नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंटर्ड्स लेबोरेट्री की आधारशिला भी रखी.

CSIR-NPL ने जिस नेशनल एटॉमिक टाइम स्केल को देश को सौंपा है, उससे भारत नैनो सेकंड, यानि एक सेकंड के एक अरबवें हिस्से तक समय को मापने में भी आत्मनिर्भर बन गया है। 2.8 नैनो सेकंड का एक्युरेसी लेवल हासिल करना अपने आप में बहुत बड़ा सामर्थ्य है।

किसी भी प्रगतिशील समाज में अनुसंधान हमारे ज्ञान और समझ को विस्तार देने में सहायता प्रदान करता है. एयर क्वालिटी और इमीशन को मापने की तकनीक से लेकर टूल्स तक हम दूसरों पर निर्भर रहे हैं. आज इसमें भी आत्मनिर्भरता के लिए हमने बड़ा कदम उठाया है.- पीएम मोदी

 इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि नेशनल अटॉमिक टाइमस्केल के जरिए भारत अब सेकंड के अरबवें हिस्से को मापने में सक्षम है. अतीत ने हमें सिखाया कि जितना एक देश विज्ञान पर जोर देगा, उतनी ही उसकी तकनीक आगे बढ़ेगी. इस टेक्नोलॉजी के जरिए नई इंडस्ट्रीज बनेंगी और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगी.

 

देश 2022 में अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे कर रहा है,  2047 में हमारी आजादी के 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं. हमें आत्मनिर्भर भारत के नए संकल्पों को ध्यान में रखते हुए, नए मानकों, नए पैमानों, नई स्टैंडर्ड्स और न्यू बेंचमार्क को सेट करने की दिशा में आगे बढ़ना ही है- पीएम मोदी

 

आज भारत दुनिया के उन देशों में है जिनके पास अपने नेविगेशन सिस्टम है. आज इसी ओर एक और कदम बढ़ा है. भारतीय निर्देशक द्रव्य हमारे उद्योग जगत को क्वालिटी प्रोडक्ट्स बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

क्या है नेशनल अटॉमिक टाइमस्केल

नेशनल एटॉमिक टाइमस्‍केल भारतीय मानक समय 2.8 नैनो सेकंड की सटीकता के साथ देता है. यानी भारत सेकंड के अरबवें हिस्से को भी माप सकता है.

किसी भी शोध का प्रभाव वाणिज्यिक, सामाजिक और हमारी समझ को बढ़ाता है. कई बार भविष्य में अनुसंधान के अन्य संभावित उपयोगों का पहले से अनुमान नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित है कि रिसर्च कभी भी बर्बाद नहीं होती है. जैसे हमारे शस्त्रों में कहा गया है कि आत्मा अमर है, वैसे ही शोध भी.” पीएम मोदी

राष्ट्रीय निर्देशक द्रव्य

भारतीय निर्देशक द्रव्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक क्वॉलिटी सुनिश्चित करने के लिए लैब में जांच और मापांकन में सहयोग कर रहा है.

नेशनल मेट्रोलॉजी कॉन्क्लेव के बारे में

नेशनल मेट्रोलॉजी कॉन्क्लेव को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल फिजिकल लैबोरेट्री (CSIR-NPL) आयोजित कर रहे हैं, जिसके 75 साल पूरे हो रहे हैं. इस कॉन्क्लेव की थीम है मेट्रोलॉजी फॉर द इन्क्लूसिव ग्रोथ ऑफ द नेशन.

नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंटर्ड्स लेबोरेट्री

आर्थिक विकास ने भारत में पर्यावरण के क्षेत्र में विभिन्न उद्योगों और अन्य हितधारकों के लिए विशाल व्यावसायिक अवसरों का निर्माण किया है. इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नीतियां शुरू की गई हैं, जो भारत में उद्योगों को नए प्रोत्साहन और अवसर प्रदान कर रही हैं. कड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण, भारत में उद्योगों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए समर्थन की आवश्यकता है.

वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों के लिए अपेक्षित परीक्षण और अंशांकन सुविधा विकसित करने के लिए, सीएसआईआर-एनपीएल विभिन्न एयर एम्बिएंट और उत्सर्जन प्रदूषण निगरानी उपकरणों जैसे ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमरी मॉनिटरिंग इक्विपमेंट, कंटीन्यूअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम आदि के प्रदर्शन को मापने के लिए नेशनल एनवॉयरमेंटल स्टैंडर्ड लेबोरेट्री यानी ‘राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला’ की स्थापना कर रहा है. यह वायु प्रदूषण निगरानी के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को सुगम बनाएगा. नेशनल एनवायरनमेंट स्टैंडर्ड्स लैबोरेट्री में उन उपकरणों की क्वालिटी चेक की जाएगी जिसके जरिए वायु और औद्योगिक प्रदूषण और उत्सर्जन की जांच की जाती है.

सीएसआईआर-एनपीएल

सीएसआईआर-एनपीएल नई दिल्ली सीएसआईआर द्वारा स्थापित प्रमुख प्रयोगशालाओं में से एक है, एनपीएल की स्थापना देश की स्वतंत्रता से पहले 04 जनवरी, 1947 को की गई थी.

सीएसआईआर और एनपीएल भारत का टाईकीपर है. यानि भारत की समय की देख रेख, व्यवस्था इनके हीं जिम्मे है. समय का बदलाव भी इनसे शुरू होगी. हमें अपने वैज्ञानिकों के योगदान पर गर्व है. नए साल में देश को दो-दो वैक्सीन मिले– पीएम मोदी

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