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‘प्रभावशालियों’ पर कार्रवाई है स्पष्ट और सख्त संदेश

narendra modi on black money

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा जोरदार ढंग से ये कहते आए हैं कि ‘जिसने भी देश को लूटा है उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।’ धीरे-धीरे उनके कहे शब्दों के असल मायने दिखने भी लगे हैं। मोदी सरकार ने जांच एजेंसियों को कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता दी है, जिसके परिणाम स्वरूप जांच एजेंसियों ने कई रसूखदार और प्रभावशाली व्यक्तियों-नेताओं पर कार्रवाई की है। इस कार्रवाई का संदेश साफ है कि चाहे भ्रष्टाचारी हों या देश विरोधी ताकतें, जो अब तक अपने रसूख के दम पर कानून से खेलते आए अब उनको बख्शा नहीं जाएगा।

प्रफुल्ल पटेल

प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के बड़े और कद्दावर नेता हैं, लेकिन कानून ने उन पर अपना शिकंजा कसना शुरु कर दिया है। पूर्व केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल का मुंबई के पॉश इलाके वर्ली स्थित सीजे हाऊस जब्त होगा। मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जल्द ही सीजे हाऊस को जब्त करने की तैयारी में है। आरोप है कि प्रफुल्ल पटेल परिवार की कंपनी मिलेनियम डेवलपर्स ने ड्रग तस्कर इकबाल मिर्ची की जमीन पर 15 मंजिला सीजे हाऊस का निर्माण किया था। पूछताछ के दौरान प्रफुल्ल पटेल ईडी के पास मौजूद दस्तावेजों को नकार नहीं सके।

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम

पी चिदंबरम देश के प्रभावशाली लोगों में से एक हैं, लेकिन न्याय व्यवस्था सबके लिए बराबर है। सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में चिदंबरम पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का आरोप है। सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया केस दो साल पहले दर्ज किया था।

आईएनएक्स मीडिया केस मे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और सीबीआई रिमांड से आने के बाद से चिदंबरम लगातार तिहाड़ जेल मे हैं।

आईएनएक्स घोटाले में आरोप है कि तमाम नियम कानूनों को ताक पर रख कर वित्त मंत्रालय एफआईपीबी के तहत आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये विदेशों से लाने की इजाजत दी और अलग अलग दो आदेश निकाले। उस समय वित्त मंत्री के पद पर पी चिदंबरम थे। आरोप है कि अपने बेटे कार्ति को फायदा पहुंचाने के लिए चिदंबरम ने ये कदम उठाया था।

इस मामले मे आईएनएक्स की पूर्व निदेशक इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बन चुकी हैं और उन्होंने अपने बयानों में कहा कि चिदंबरम ने अपने बेटे की कंपनियों का ख्याल रखने को कहा था और इसके बदले उनके बेटे से जुड़ी कथित कंपनियों मे पैसा भी गया। मोदी सरकार की नीतियों के चलते पी चिदंबरम की गिरफ्तारी संभव हो सकी है।

डीके शिवकुमार

कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पिछले साल सितंबर में आयकर विभाग की एक चार्जशीट यानी अभियोजन शिकायत के आधार पर शिवकुमार और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। बेंगलुरू की विशेष अदालत में दाखिल आरोपपत्र में शिवकुमार पर मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला के जरिए करोड़ों रुपए का लेनदेन करने का आरोप है।

साल 2016 की नोटबंदी के बाद से डीके शिवकुमार इनकम टैक्स और ईडी के रडार पर थे। 2 अगस्त 2017 को उनके नई दिल्ली आवास पर इनकम टैक्स ने छापा मारा था, जिसमें 8.59 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए थे। इसके बाद आयकर विभाग ने कांग्रेस नेता और उनके चार अन्य सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

डीके शिवकुमार का नाम कांग्रेस के सबसे अमीर प्रत्याशियों में आता है। वे 850 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं।

रॉबर्ट वाड्रा

सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में ज़मानत पर हैं और वहीं रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ भी ईडी की जांच चल रही है। वहीं हरियाणा सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा की स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को जमीन विकसित करने के लिए दिए रियल एस्टेट डेवलपमेंट के लाइसेंस को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोप है कि वाड्रा की कंपनी ने गुड़गांव के शिकोहपुर में 3.53 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। इस पर कंपनी ने कॉलोनी बनाने के लिए लाइसेंस हासिल किया, लेकिन खुद कॉलोनी डेवलप करने के बजाय कंपनी ने जमीन 58 करोड़ रुपए में डीएलएफ को बेच दी थी।

सज्जन कुमार

जितना दर्दनाक था सिख दंगा उससे भी ज्यादा दर्दनाक था आरोपियों का तीन दशक तक खुलेआम घूमना। दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी पाया। दंगा भड़काने और साजिश रचने के आरोपी सज्जन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

सज्जन कुमार को दिल्ली के कैंट इलाके में आपराधिक षडयंत्र रचने, हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया।

इससे पहले 1984 सिख दंगा मामले में 2013 में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था, जबकि सज्जन कुमार के अलावा बाकी और आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था।

यासीन मलिक

अलगाववादियों पर मोदी सरकार ने सख्ती से काम लिया। इसी का नतीजा है कि भारतीय वायुसेना के चार जवानों की हत्या को लेकर 30 साल बाद जम्मू की टाडा कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में जेकेएलएफ का चीफ और अलगाववादी नेता यासीन मलिक मुख्य आरोपी है।

पुलवामा हमले के बाद यासीन मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया था और वो इस समय जेल में है। उसके संगठन जेकेएलएफ पर आतंकी गतिविधियों को समर्थन करने का आरोप कई बार लगता रहा है। इसे लेकर कई एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या का मामला और मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबैया सईद के अपहरण का मामला शामिल है। यह संगठन आतंक को बढ़ावा देने के लिए अवैध तरीके से धन मुहैया कराने के लिए जिम्मेवार रहा है।

इस पूरे मामलों में एक बात साफ है कि प्रभावशालियों पर कार्रवाई से देश की जनता के बीच एक स्पष्ट संदेश गया है। संदेश यह है कि कोई भी, चाहे वह कितने भी ऊंचे आोहदे पर क्यों न हो, कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कितना भी रसूखदार क्यों न हो,कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसे भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, देश विरोधी कृत्य या किसी भी तरह के अन्य मामलों में बख्शा नहीं जाएगा।

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