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गर्व: मोदी सरकार आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस को दे रही है सच्ची श्रद्धांजलि

महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 125 वीं जयंती है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजादी के वो सच्चे नायक हैं, जिन्हें गुमनामी के अंधेरे में ढकेल दिया गया। जिन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए क्रांति का बीज बोया और आजादी के बाद उसी महानायक को भुल दिया गया।

नेताजी की जयंती पराक्रम दिवस के रूप में

मोदी सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। केंद्र सरकार ने देश के प्रति नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अदम्य भावना और निस्वार्थ सेवा का सम्मान करने और उन्हें याद करने के लिए देश की जनता विशेषकर युवाओं को प्रेरणा देने के लिए, हर साल 23 जनवरी को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।

पराक्रम दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘महान स्वतंत्रता सेनानी और भारत माता के सच्चे सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी जन्म-जयंती पर शत-शत नमन। कृतज्ञ राष्ट्र देश की आजादी के लिए उनके त्याग और समर्पण को सदा याद रखेगा।’

पीएम मोदी ने पूरी की नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अधूरी इच्छा

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूरे होने पर 21 अक्टूबर 2018 को लाल किले पर तिरंगा फहराया था। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि आज मैं उन सभी सैनिकों को नमन करता हूं, जिन्होने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होने कहा था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे,  उन्होने लाल किले पर तिरंगा फहराने का एलान किया था। पीएम मोदी कार्यक्रम के दौरान आजाद हिंद फौज की टोपी पहने नजर आए थे साथ ही उन्होने देश को आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूरे होने पर शुभकामनाएं भी दी थीं। ये भी एक तथ्य है कि अभी तक देश के प्रधानमंत्री सिर्फ 15 अगस्त को ही लाल किले पर झंडारोहण करते आए थे, लेकिन 21 अक्टूबर 2018 को भी लाल किले पर झंडारोहण करने करने वाले नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए और इसके साथ ही उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अधूरी इच्छा पूरी की।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे

– पीएम मोदी, 21 अक्टूबर 2018

दरअसल 21 अक्टूबर 1943 को नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने हुकूमत ए आजाद हिंद के रूप में आज़ाद भारत की पहली अस्थाई सरकार की नींव रखी थी। कई देशों ने अस्थाई भारत सरकार को मान्यता भी प्रदान की थी।

पीएम मोदी ने किया सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जनवरी 2019 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर ही लाल किले में सुभाषचंद्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन किया था। प्रधानमंत्री मोदी उसी जगह पर याद-ए-जलियां संग्रहालय (जलियांवाला बाग और प्रथम विश्वयुद्ध पर संग्रहालय), 1857 में हुए भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर बने संग्रहालय और भारतीय कला पर बने दृश्यकला-संग्रहालय का भी उद्घाटन किया था।

संग्रहालय में संजोई गई है नेताजी की स्मृतियां

संग्रहालय में नेताजी द्वारा इस्तेमाल की गई लकड़ी की कुर्सी और तलवार के अलावा आईएनए से संबंधित पदक, बैज, वर्दी और अन्य वस्तुएं शामिल हैं। आईएनए के खिलाफ जो मुकदमा दायर किया गया था, उसकी सुनवाई लाल किले के परिसर में ही हुई थी, इसीलिए यहां संग्रहालय बनाया गया।

संग्रहालय में आने वालों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो ऐसे में इसे खास तौर से डिजाइन किया गया है। संग्रहालय में आईएनए से संबंधित पुराने रिकॉर्ड, अखबारों की कतरने, ऑडियो-विडियो क्लिप, मल्टीमीडिया, पेंटिंग, फोटो के साथ-साथ एनिमेशन के जरिए नेता जी और आईएनए का योगदान प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है।

उनकी बहादुरी और उपनिवेशवाद का विरोध करने में नेता जी के अमिट योगदान के लिए देश सुभाष चंद्र बोस का हमेशा आभारी रहेगा। वह एक ऐसे शूरवीर थे, जिन्होंने प्रत्येक भारतीय को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध किया कि वे सम्मान का जीवन जीने के हकदार हैं। सुभाष बाबू अपनी बौद्धिक कुशलता और संगठनात्मक कौशल के लिए भी जाने जाते थे। हम उनके आदर्शों को पूरा करने और एक मजबूत भारत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

– पीएम मोदी

इसके अलावा पीएम मोदी सरकार द्वारा ऐतिहासिक विक्टोरिया मेमोरियल भवन, कोलकाता में एक स्थायी प्रदर्शनी और नेताजी पर एक ध्वनि एवं प्रकाश का एक स्थाई कार्यक्रम शुरु करने की योजना बनाई गई।

सुभाष चंद्र बोस से संबंधित गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक-सुलभ बनाने का निर्णय

2015 में, मोदी सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने और उन्हें जनता के लिए सुलभ बनाने का निर्णय लिया था। 4 दिसंबर, 2015 को 33 फाइलों की पहली खेप को जारी किया गया था। लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के लिए 23 जनवरी, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेताजी से संबंधित 100 फाइलों की डिजिटल प्रतियां जारी की गई थीं।

नेताजी सुभास चंद्र बोस द्वीप देश को समर्पित किया

2018 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी बोस द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद की अंतरिम सरकार को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान द्वीपों का प्रशासन किया। प्रधानमंत्री ने अंडमान और निकोबार में 3 द्वीपों का नाम बदला। जिसमें रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभास चंद्र बोस द्वीप, नील द्वीप को शहीद द्वीप के रूप में, और हैवलॉक द्वीप का नाम बदलकर स्वराज द्वीप रखा गया। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक स्मारक डाक टिकट, ‘फर्स्ट डे कवर’ और 75 रुपया का सिक्का भी जारी किया। साथ ही उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर एक मानद विश्वविद्यालय की स्थापना की भी घोषणा की थी।

राजपथ पर पहली बार दिखे थे आजाद हिंद फौज के सेनानी

26 जनवरी 2019 के गणतंत्र दिवस समारोह में बहुत कुछ नया और पहली बार देखने को मिला था। राजपथ पर पहली बार आजाद हिंद फौज (आईएनए) के चार सेनानी परेड का हिस्सा बने थे। आईएनए के चार पूर्व सेनानी एक खुली जीप में सवार थे। सेनानियों की उम्र 90 साल से ज्यादा थी। उनकी जीप पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की श्वेत श्याम तस्वीर लगी थी। आजाद हिंद फौज के सेनानियों परमानंद, ललित राम, हीरा सिंह और भागमल के राजपथ से गुजरते समय वहां मौजूद दर्शकों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया था। आजाद हिंद फौज एक सशस्त्र बल था जिसकी स्थापना 1942 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दक्षिण पूर्व एशिया में राष्ट्रवादी रास बिहारी बोस ने की थी। बाद में ब्रिटिश सेना के खिलाफ जंग में नेताजी ने आजाद हिंद फौज का कार्यभार संभाला।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी में जो भूमिका निभाई वो अद्वितीय है, पर विडंबना ये भी रहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें वो सम्मान नहीं दिया जिसके नेताजी सुभाष चंद्र बोस हकदार थे। मोदी सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनका खोया सम्मान वापस दिलाकर वाकई उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है।

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