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लोकसभा में दिखा नया अवतार

Modi in Lok Sabha

300 से अधिक सीटें जीत कर सत्ता में लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आक्रामक तेवर के विपरीत लोकसभा में विनम्र, आत्मविश्वास से लबरेज और सबको साथ लेकर चलने वाले नेता के रूप में नजर आए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देने के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर हमलावर होने के बजाय उनको आइना दिखाकर साथ आने की गुजारिश की। लगभग एक घंटे के भाषण में प्रधानमंत्री ने नये भारत में सबके लिए समान अवसर और देश के विकास में सबकी भागीदारी पर पूरा जोर दिया। देश निर्माण मे सभी दलों और पूर्ववर्ती सरकारों के योगदान की सराहना की तो साथ ही कांग्रेस को बताया कि उनके यहां अभी भी एक परिवार के आगे की सोच नहीं है। प्रधानमंत्री ने 2019 के आम चुनाव से लेकर तीन तलाक तक सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। जिसने ना तो दर्प था और ना कोई अतिश्योक्ति थी।

सबसे पहले जनता का धन्यवाद

प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 में मिली विजय को जनता द्वारा अपने काम का अनुमोदन बताते हुए इस जनादेश की तुलना 1977 में जनता पार्टी को मिली जनादेश से की। प्रधानमंत्री ने कहा- आपातकाल में जब मीडिया पर ताले लग चुके थे, हर किसी को लगता था कि शाम को पुलिस आएगी और पकड़ लेगी, ऐसे वातावरण में जाति पंथ, संप्रदाय सबसे उपर उठकर देश ने उस समय चुनाव नतीजा दिया था और लोकतंत्र के लिए वोट किया था। लोकतंत्र को पुनः प्रतिस्थापित किया था। इस बार फिर एक बार जाति, पंथ संप्रदाय, भाषा सब से परे उतर कर सिर्फ और सिर्फ देश के उज्जवल भविष्य के लिए एक देश ने मतदान किया।‘ प्रधानमंत्री ने जनता को धन्यवाद करते हुए यह संतोष जाहिर किया कि जनता ने उनके काम पर मुहर लगा दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा 2014 में देश ने एक प्रयोग किया, लोगों ने सोचा चलो ‘इनसे’ तो बचेंगे। लेकिन 2019 का जनादेश पूरी तरह कसौटी पर कसने के बाद ,तराजू पर तौलने के बाद, हर तरह से परखने के बाद, सोच समझ कर हमें अनुमोदन देकर दुबारा बिठाया है। यही लोकतंत्र की ताकत है। एक व्यकित के रूप में इससे बड़ा संतोष नहीं हो सकता कि आपके काम को जनता अनुमोदित करती है ।

कांग्रेस की गाली का जवाब शालीनता से

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री पर बहुत खराब टिप्पणियां की थी। मोदी की तुलना गंदी नाली और राक्षस से कर दी थी। लोगों को यह लग रहा था कि प्रधानमंत्री इसका कोई कठोर प्रतिवाद करेंगे। कांग्रेस को अपनी पुरानी शैली में जवाब देंगे। लेकिन पीएम मोदी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। बेहद शालीन भाषा में कांग्रेस के नेता की गालियों पर सिर्फ यह टिपपणी की – ‘कुछ लोग चुनावी कटुता से बाहर नहीं निकले हैं।’ लेकिन प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के उन आरोपों पर खुल कर अपनी बात रखी, जो आरोप तथ्यों के विपरीत लगाए गए थे। मसलन कांग्रेस के नेता ने कहा कि मोदी सरकार ऐसा प्रदर्शन करती है मानों इसके पहले किसी ने कुछ किया ही नहीं। पहले प्रधानमंत्रियों को मोदी श्रेय बिल्कुल नहीं देते।

कांग्रेस के इस आरोप का प्रधानमंत्री ने कठोर नहीं लेकिन असरदार शब्दों से जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने कहा –‘2004 से पहले अटल जी की सरकार  थी। मैं चुनौती देता हूं कि 2004-2014 तक शासन में बैठे लोगों ने अधिकृत कार्यक्रम में एक बार भी अटल जी की सरकार की तारीफ की हो, उनके अच्छे कामों का उल्लेख किया हो तो जरूर इस पटल पर रखें । अटल जी को छोड़िए नरसिंह राव की सरकार की कोई तारीफ की हो वो रखें । इतना ही नहीं अभी के भाषण में एक बार भी डॉ मनमोहन सिंह का नाम बोले होते।‘

कांग्रेस के पास कोई जवाब नहीं था। अधीर रंजन ने प्रधानमंत्री मोदी पर अपने भाषण के दौरान यह कटाक्ष किया था कि आप जितना भी कर लो कांग्रेस की ऊचाइयों को कम नहीं कर सकते। इस पर प्रधानमंत्री ने हास्य और व्यंग्य के जरिए कांग्रेस को पानी पानी कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा – ऊचाइयों को कम हम करेंगे भी नहीं। ऐसी गलती हम नहीं करते । लकीर छोटी करने में समय नहीं गवाते अपनी लकीर बड़ी करते हैं। आपकी ऊंचाई आपको मुबारक। आप इतनी ऊंचाई पर पहुंच गए हैं कि आपको जमीन दिखाई नहीं देती। जमीन पर प्राणी तुच्छ  दिखता है। आपका और ऊँचा होना मेरे लिए संतोष की बात है। कामना है कि आपकी ऊंचाई और बढ़े। ऊंचाई से हमारी  प्रतिसपर्धा है नहीं। हमारा काम जड़ों से जुड़ने का है। हमारा रास्ता जड़ों से जुड़ कर ही आगे बढ़ने का है।

पीएम मोदी ने कांग्रेस समेत पूरे सदन को यह याद दिलाया कि संभवतः वही अकेले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने लाल किले के प्राचीर से दो बार यह कहा कि आजादी के बाद से जितनी भी केंद्र या राज्य सरकारें आईं, उन सबका देश के विकास में योगदान है। प्रधानमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि संभवतः कांग्रेस सिर्फ एक परिवार के नाम के बारे में बात करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में एक परिवार से बाहर किसी के बारे में सोचा ही नहीं जाता।

आपातकाल से सबक

25 जून 1975 को श्रीमती इंदिरा गांधी ने आधी रात को देश में आपातकाल लगा दिया था। प्रधानमंत्री ने आपातकाल को याद तो किया साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि वे आपातकाल की चर्चा किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं कर रहे हैं,बल्कि इसलिए कर रहे हैं कि इसको याद करके हम लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत करे साथ मिलकर चले। आपातकाल की भर्तस्ना इसलिए भी करें ताकि फिर कोई ऐसे कदम उठाने की हिम्मत ना कर सके। पीएम मोदी ने आपातकाल को याद करते हुए कहा- 25 जून की वो रात, जब देश की आत्मा का को कुचल दिया गया था । भारत में लोकतंत्र संविधान के पन्नों से पैदा नहीं हुआ है, भारत में लोकतंत्र सदियों से हमारी आत्मा है। देश के मीडिया को दबोच दिया गया था। देश के महापुरुषों को जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था। पूरे हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था सिर्फ इसलिए कि किसी की सत्ता चली न जाए ।आपातकाल को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस समेत सभी दलों का भी यह आह्वा कर डाला कि आज 25 जून को हम लोकतंत्र के प्रति फिर से एक बार अपना संकल्प और समर्पण व्यक्त करें।

यह सबको मालूम है कि प्रधानमंत्री मोदी की बापू में गहरी आस्था है। और वे हर संभव कोशिश करते हैं कि बापू के विचार नई पीढ़ी तक असरदार तरीके से पहुंचे। इस वर्ष बापू की 150  वीं जयंती है और साथ ही देश आजादी की 75 वीं वर्षगाठ भी मना रहा है। ये दोनों विषय राष्ट्रपति के अभिभाषण में शामिल हैं। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि ये दोनों महापर्व देश के सभी लोग मनाए। ये पर्व खानापूर्ति वाले सरकारी कार्यक्रम ना बन कर रह जाएं। इसलिए उन्होंने विपक्ष समेत सभी दलों को साथ आने का आह्वान किया। पीएम ने कहा – आज हमारे पास पूज्य बापू से बड़ी केाई प्रेरणा नहीं है। आज हमारे पास आजादी के लिए मर मिटने वाले वीरों से बड़ी कोई यादें नहीं हैं। ये अवसर खोना नहीं चाहिए। इन तारीखों को अवसर बना कर देश में एक बार फिर वहीं जज्बा पैदा कर सकते हैं। यह सरकार का एजेंडा नहीं हो सकता, किसी दल का एजेंडा नहीं हो सकता। ये पूरे देश का एजेंडा हो सकता है। हमारे लिए संकल्प की घड़ी है। आजादी से पहले देश के लिए मर मिटने का मिजाज था आज आजादी 75 पर देश के लिए जीने का मिजाज पैदा करने का हमें अवसर मिल रहा रहा है। मैं सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि राष्ट्रपति जी ने जो हमसे अपेक्षा की है, उस अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए हम आगे आएं, जनसामान्य को जोड़ने का प्रयास करें।

सरदार सरोवर बांध परियोजना

कांग्रेस के नेताओं ने अपने भाषण में जोर देकर उन परियोजनाओें के नाम गिनवाएं जो कांग्रेस के शासनकाल में पूरी हुईं थी। उनमें से ही एक परियाजना सरदार सरोवर की थी। प्रधानमंत्री के लिए यह विषय उनके दिल के करीब रहा है। वे इस परियोजना के लिए काफी परेशान भी हुए हैं। उन्होंने अपने भाषण में इस परियोजना को लेकर कांग्रेस के रवैये की पोल खोल कर रख दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हो सकता है कि मेरी बातों को याद ना रखा जाए लेकिन मुझे यह संतोष मिलेगा कि मैंने इस विषय पर सच्चाई जनता के सामने रखी। पीएम मोदी ने सरदार सरोवर बांध परियोजना के बारे में दिल कर खोल बताया, उन्होंने कहा – 1961 में सरदार सरोवर की नीव नेहरू ने रखी । पटेल का सपना था। दशको तक बिना मंजूरी के 6 हजार करोड़ की यह परियोजना पूरा होते होते 60 हजार करोड़ से उपर पहुंच गई। कांग्रेस ने देश की यही सेवा की। इतना ही नहीं यूपीए सरकार के कार्यकाल में इसे रोकने का प्रयास किया गया। 6 हजार करोड़ का खर्चा  62 हजार करोड़ पहुंचा। हमने आकर इसे पूरा किया। मुख्यमंत्री होते हुए भी मुझे यूपीए सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठना पड़ा था, क्योंकि सारी चीजें रोक दी गई थीं। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैने इसे पूरा किया। आज करीब 4 करोड़ लोगों तक पीने का शुद्ध पानी पहुचं रहा है।

भाषण में कुछ ठोस बातें

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कुछ ठोस बातें और अपने सुझाव भी रखे। मसलन उन्होंने कहा कि उनकी सरकार चुनाव में जीत का जश्न मनाने के बजाय पहले दिन से ही काम में सक्रिय है। समय के एक एक पल का सदुपयोग हो रहा है। सरकार ने पहले सप्ताह में ही किसानों और दुकानदारों की पेंशन योजना मंजूर कर दी। पीएम किसान के दायरे में देश के सभी किसानों को शामिल कर उसका लाभ देने का वादा भी पूरा कर दिया गया। सेना के जवानों के बच्चों के वजीफे बढ़ाने के साथ साथ इस योजना का लाभ स्थानीय पुलिस के जवानों के बच्चों को भी मिले इस पर महत्वपूर्ण निर्णय ले लिया गया। 2022 के लक्ष्यों को पूरा करने लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुला ली गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के काम काज की गति मापें तो हर दिन तीन महत्वपूर्ण काम नजर आंएगे। इसके साथ प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में कार्पोरेट इनवेस्टमेंट और देश में टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

तीन तलाक बिल और महिलाओं के प्रति कांग्रेस का नजरिया

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस से अपील कि वह महिलाओं को अधिकार देने वाले तीन तलाक विधेयक को किसी संप्रदाय से जोड़ कर ना देखे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी यह गलती कर चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा – महिला सशक्तिकरण की बात करें तो कांग्रेस को कई अच्छे अवसर मिले ,पर पता नहीं क्यों इनको ये चीजें दिखती नहीं है, छूट जाती हैं। 50 के दशक में यूनिफार्म सिविल कोड की चर्चा चली। कांग्रेस के पास अवसर था, लेकिन कांग्रेस उसको मिस कर गई और हिंदू कोड बिल लाकर अपनी गाड़ी चला ली। उसके 35 साल बाद कांग्रेस को दूसरा अवसर मिला। शाहबानों केस में सुप्रीम कोर्ट ने पूरी मदद की थी। देश में जेंडर इक्विलिटी के लिए अच्छे वातावरण की संभावना बनी थी, लेकिन उस उचाई ने नीचे की चीजें देखने से मना कर दिया और वो भी मिस कर गए।  अब फिर 35 साल के बाद एक मौका आया है। हम इस देश की नारी के गौरव के लिए बिल लेकर आए हैं। मैं चाहूंगा कि कांग्रेस इसमें सहयोग करे।

साथ ही प्रधानमंत्री ने देश के सामने यह चौकाने वाला तथ्य रखा कि आखिर मुसलमानों के प्रति कांग्रेस की सोच क्या है। पीएम मोदी के इस खुलासे से पूरा सदन स्तब्ध रह गया कि राजीव गांधी के एक मंत्री ने शाहबानों केस के संदर्भ में कहा था कि मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है। ‘इफ दे वांट टू लिव इन द गटर लेट देम बी’। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुसलमान इस देश के नागरिक हैं कम से कम कांग्रेस की यह सोच तो नहीं होनी चाहिए।

नेहरू की इच्छा

अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री को उद्धृत करते हुए कहा कि 1951 के पहले चुनाव में कांग्रेस की घोषणा पत्र तैयार करते हुए नेहरू जी ने कहा था- दुनिया को भारत की बड़ी सीख यह है कि यहां सबसे पहले कर्त्तव्य आते हैं और इन्हीं से अधिकार निकलते हैं। आज के आधुनिक भौतिकवादी विश्व में जहां हर तरफ टकराव दिखाई पड़ते हैंए वहां हर कोई अपने अधिकारों और सुविधाओं की बात करता है। शायद ही कोई कर्त्तव्य की बात करता हो। यही टकराव की वजह है। यह वास्तविकता है कि अधिकारों और सुविधाओं के लिए ही हम लड़ाई लड़ते हैं। लेकिन ऐसा करने में हम अगर कर्तव्यों को भूल जाएं तो यह अधिकार और सुविधाएं भी हमारे पास नहीं रह पाएंगी।‘ यह साफ साफ दर्शन है। जिस महापुरूष ने यह बात कही हे उसे भुला दिया गया। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए यह पूछा कि क्या पंडित जी की उस  इच्छा को पूरा करने के लिए देश के कर्त्तव्य को रास्ते पर ले जाने के लिए हम आगे बढ़ सकते हैं?

प्रधानमंत्री का भाषण केवल एक मझे हुए राजनीतिज्ञ का भाषण नहीं था। उनकी वाणी में यह तड़प थी कि देश के लिए काम करने में सब लोग साथ आए। नए भारत का निर्माण, जहां सब बराबर हो और सबके लिए समान अवसर हों, केवल सरकार की ही जिम्मेदारी ना बने। राजनीति से लेकर समाज जीवन के लोगों को भी साथ आना चाहिए। लोकसभा में प्रधानमंत्री सचमुच एक नए अवतार में नजर आए।

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