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मोदी सरकार की NMP योजना से अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार!

मोदी सरकार द्वारा अपने पहले कार्यकाल में  अनेक कल्याणकारी योजनाओं को सफलता से लागू करने के बाद दूसरे कार्यकाल में भी एक नहीं कई कल्याणकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा रहा है। उन्ही में से एक योजना है एनएमपी योजना।

इस योजना के बारे में विपक्ष भ्रम फैलाने में लगा कि सरकार देश की संपत्तियों को बेच रही है, पर योजना को विस्तार से जानने से पहले ये समझ लेना जरूरी है कि ये योजना संपत्तियों को किराए पर देने का प्रस्ताव करती है, जिसका पूरा मालिकाना हक सरकार के पास रहेगा। जैसे कोई मकान मालिक अपनी संपत्ति को किराएदार को लीज या किराए पर देता ठीक वैसे ही सर्वाधिकार सरकार के पास ही रहेंगे। कहते हैं जिसका काम उसी को साजे तो सरकार का काम है सुविधाएं प्रदान करना और व्यापार को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाना। अब बात करते हैं NMP प्रोग्राम की।

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन प्रोग्राम NMPP को पेश किया। इसके तहत सरकार अपनी कम इस्तेमाल में आ रहीं संपत्तियों के जरिए करोड़ों रुपए जुटाना चाहती है। इसके लिए सरकार अपनी कोई संपत्ति नहीं बेचेगी और इसके लिए कोई निजीकरण भी नहीं होगा।

नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन प्रोग्राम NMPP

इस प्रोग्राम का नाम है नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन यानि NMP। सरकार अपनी संपत्तियों के जरिए अगले चार साल यानी वित्त वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक छह लाख करोड़ रुपये की कमाई कर सकती है। वित्त मंत्री के 2021-22 के बजट भाषण में इसका जिक्र भी था। सरकार ने इन संपत्तियों के लिए एक समयसीमा निर्धारित की है। सरकार ने तय किया है कि मौजूदा वित्‍त वर्ष में 88 हजार करोड़ रुपए और अगले चार वर्षों के अंदर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति को मॉनेटाइज किया जाएगा। सरकार, संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन को केवल सिर्फ फंडिंग का जरिया ही नहीं बल्कि इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स के रखरखाव और विस्तार की बेहतर रणनीति के तौर पर देख रही है।

अफवाहों से बचें, कुछ बेच नहीं रही है सरकार

अब कुछ लोग अफवाह फैला रहें हैं सरकार इन संपत्तियों को बेच देगी, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है। आप अफवाहों पर बिलकुल भी ध्यान मत दीजिए, क्योंकि सच तो ये है कि सरकार का सरकारी संपत्तियों पर मालिकाना हक बरकरार रहेगा। बस इसे प्रयोग करने का अधिकार निजी कंपनियों या निवेशकों को दिया जाएगा यानी सरकार ही इससे जुड़े फैसले लेगी। एक तरह से सरकार संपत्तियों को लीज यानि कि किराए पर देगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा है कि इन संपत्तियों का मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा, बस इन्हें कमाने के लिए ही निजी फर्मों को दिया जाएगा, जिसे वे कुछ साल बाद सरकार को वापस कर देंगे। इससे सरकार को भी करीब 6 लाख करोड़ रुपये की आमदनी होगी, जो जनहित कार्यों पर खर्च होंगे।

NMP योजना सिर्फ ब्राउनफील्ड असेट्स के लिए

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि NMP योजना सिर्फ ब्राउनफील्ड असेट्स के लिए है। यानी ऐसी संपत्तियां, जिनमें केंद्र सरकार ने निवेश किया है और जहां संपत्ति या तो बेकार पड़ी है या फिर उससे पूरी तरह कमाई नहीं हो पा रही है या फिर उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

जो सेक्टर हैं इस योजना के दायरे में

अब बात करते हैं उन सेक्टर्स की जो इस योजना में शामिल हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग, रेल, ऊर्जा, पाइपलाइन और प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, जहाजरानी, बंदरगाह और जल मार्ग, दूरसंचार, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, खनन, कोयला, शहरी आवास जैसे मंत्रालयों को इस योजना के दायरे में लाया गया है। अभी राज्य सरकारों की संपत्तियों को इस योजना के दायरे में नहीं लाया गया है।

कहां से कितना जुटेगा पैसा

सरकार ने इस प्रोग्राम में 6 लाख करोड़ रुपए की जिस संपत्ति की पहचान की है, उसमें सड़क सबसे ऊपर है। मोदी सरकार का मकसद हाइवे को बिल्‍ड ऑपरेट ट्रांसफर यानि कि BOT मॉडल पर ट्रांसफर करके 1.5 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य है। इसके बाद है रेलवे, जिसमें सरकार ने 1 लाख 52 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्‍य रखा है। इसके बाद पावर सेक्‍टर यानी पावर ग्रिड की ट्रांसमिशन लाइन को मॉनेटाइज करके सरकार 45 हजार 200 करोड़ रुपए जुटाएगी। NTPC, NHPC या कोल इंडिया के हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट्स को मॉनेटाइज करके सरकार ने 39 हजार 832 करोड़ रुपए का लक्ष्‍य तय किया गया है। गैस सेक्‍टर में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड  की पाइपलाइन को मॉनेटाइज करके करीब 24,000 करोड़ रुपए का लक्ष्‍य रखा गया है। IOCL और HPCL की पाइपलाइन को मॉनेटाइज करके 22,000 करोड़ रुपए का लक्ष्‍य तय किया गया है। इन तय लक्ष्‍यों के आधार पर ही आगे चलकर हर हफ्ते और हर तीन महीने में मीटिंग होगी।

जनहित के कार्यों पर खर्च होगा पैसा, होगी समीक्षा

सरकार की कोशिश इससे पैसा जुटाकर दूसरे जनह‍ित कार्यों पर खर्च करने की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 2021-22 के बजट भाषण में नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए एसेट मॉनेटाइजेशन को एक बहुत महत्वपूर्ण वित्त-पोषण विकल्प बताया था। सरकार, संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन को केवल सिर्फ फंडिंग का जरिया ही नहीं बल्कि इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स के रखरखाव और विस्तार की बेहतर रणनीति के तौर पर देख रही है।

विपक्ष मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए कितनी भी अफवाह फैलाती रहे, पर सच तो ये है कि आने वाले दिनों में NMP योजना न सिर्फ कारगर साबित होगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को ऊंचाई पर ले जाने में सहायक भी होगी।

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