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पीएम मोदी ने 5 साल में देश को ऐसे किया आपदा से लड़ने को तैयार

Modi government disaster reduction

चक्रवाती तूफान ‘वायु‘ के कमजोर होते ही गुजरात पर छाया संकट समाप्त हो गया। आशंका थी कि 150 किलोमीटर की ज्यादा की रफ्तार से गुजरात के पोरबंदर और अन्य छह जिलों की ओर बढ़ रहे चक्रवाती तूफान ‘वायु’ कहीं भारी तबाही ना मचा दे। हालांकि इलाकों में भारी आंधी और बारिश के कारण कुछ नुकसान जरूर हुआ है।

अब इसे प्रकृति की दया कहें या फिर गुजरात सरकार की मुक्कमल तैयारी, राहत की बात यह है कि इंसानी जानों का नुकसान नहीं हुआ। इसके लिए जितना श्रेय हम भगवान को देते हैं उतना ही हमें गुजरात प्रशासन को भी देना चाहिए जिसने सूरत, भुज, केशोद, कांडला, जामनगर, वडोदरा, अहमदाबाद के साथ साथ दीव, पोरबंदर और भावनगर में भी विशेष सतर्कता बरती थी। इसके पहले फेनि चक्रवात के आने के समय उड़ीसा सरकार ने भी जानमाल के नुकसान की आशंका से बचने के लिए जबर्दस्त तैयारी की थी।

हमें राज्य सरकारों के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी की भी सराहना करनी चाहिए, जिन्होंने प्राकृतिक आपदा की किसी भी सूचना को ना हल्के में लिया और न राज्य सरकारों को लेने दिया। उन्होंने पहले से जानकारी प्राप्त कर आपदाओं को यु़द्ध की तैयारी की तरह लिया और उसकी निगरानी खुद की। चाहे वह आम चुनाव के बीच में आया फेनि चक्रवात ही क्यों ना हो। चक्रवाती तूफान फेनि ने उड़ीसा में अपना विकराल रूप दिखाया। यह कुछ बेहद भयानक तूफानों में से एक था। फेनि जितना भयानक और शक्तिशाली था उससे काफी इंसानी जानों का नुकसान हो सकता था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने जीरो कैजुअल्टी की नीति अपनाई और मौसम विभाग को हाई अलर्ट पर रखते हुए सटीक चेतावनी समय पर प्राप्त कर हर नुकसान को कम किया ।

प्रधानमंत्री की इस सक्रियता और लोगों को हर हाल में बचाने की उनकी कोशिश की तारीफ खुद संयुक्त राष्ट्र संघ ने किया। यूएन ऑफिस के ‘डिसास्टर रिस्क रिडक्शन’ के प्रवक्ता डेनिस मैक्कलीन ने जेनेवा में कहा कि भारत में इस तूफान से निपटने के लिए शानदार कदम उठाए गए। संभावित मौतों की संख्या को कम करने में भारत सरकार की जीरो कैजुअल्टी पॉलिसी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा यहां का मौसम विभाग भी काफी अलर्ट था। उसकी प्रारंभिक चेतावनी सटीक थी, प्रशासन भी काम अच्छे से कर रहा था।

केरल में 2018 में भयंकर बाढ़

इसके पहले केरल में 2018 में भयंकर बाढ़ आई। इस त्रासदी में लगभग 500 लोगों की मौत हो गई, हजारों लोग बेघर हो गए। प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित की, बल्कि 500 करोड़ की अंतरिम मदद देने के साथ साथ दिन रात केरल सरकार के साथ समन्वय में लगे रहे। प्रधानमंत्री ने घोषणा कर दी कि राज्य में राहत कार्य के लिए जो भी चाहिए केंद्र मुहैया कराएगा। सेना, नौसेना और एनडीआरएफ की टीम पूरी तरह से जुटी रही।

चेन्नई की बाढ़

2015 में तमिलनाडु में भी भयंकर बाढ़ आई थीं। तब एआईडीएमके के प्रमुख जयललिता जीवित थी। उस समय विपक्षी पार्टी डीएमके बाढ़ को भी राजनीति का अखाड़ा बनाने में लगी थी। जयललिता ने प्रधानमंत्री से चेन्नई की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का अनुरोध किया। उनका अनुरोध पीएम मोदी ने तुरंत स्वीकार कर लिया। यह जयललिता जी के शब्द  हैं- ‘मेरे अनुरोध को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने बाढ़ नुकसान को गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित किया है।‘ इतना ही नहीं दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने चेन्नई और उसके आसपास के क्षेत्रों का स्वयं हवाई सर्वेक्षण किया। उनके अनुरोध पर संसद के सचिवालय ने सांसदों को अधिसूचना जारी की कि वे बाढ़ प्रभावित जिलों में अपनी सांसद निधि से एक करोड़ रुपये कीमत तक के पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।

कौन भूल सकता है कश्मीर में आई बाढ़

2014 में जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ को भला कौन भूल सकता है। किस तरह भारतीय सेना ने अपनी जान जाोखिम में डालकर लोगों को वहां बचाया। आतंकवाद प्रभावित इस राज्य में फंसे हर व्यक्ति को बचाने की जिम्मेदारी सरकार ने पूरी गंभीरता से उठाई, भले ही वे अलगाववादी ही क्यों ना हों। प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ जम्मू कश्मीर के लिए बाढ़ से राहत और पुनर्वास के लिए 1000 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता की घोषणा की, बल्कि बाद में उन्होंने बाढ़ पीड़ित कश्मीरियों के प्रति विशेष सद्भावना दर्शाते हुए उस साल दीपावली के अवसर पर पूरा दिन कश्मीरियों के साथ व्यतीत किया। बाद में विशेष पैकेज की भी घोषणा की।

मोदी प्राकृतिक आपदा का दंश जानते हैं

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी स्वयं प्राकृतिक आपदा का दंश झेले हुए हैं और उससे निपटने का उनका फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस भी है। 2001 में गुजरात में आए भूकंप में जिस तरह से जान माल का नुकसान हुआ था, वह अपने आप में अद्वितीय था। गुजरात का भुज शहर बुरी तरह से प्रभावित हुआ था जिसके बाद तत्कालीन नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की देख-रेख में भुज को पुनर्जीवित किया गया।  मुख्यमंत्री के रूप में अपने उस अनुभव को देश के अन्य हिस्से में भी उपयोग करने का प्रस्ताव उस समय मोदी ने दिया जब 2013 में केदार घाटी में भयंकर प्रलयकारी सैलाब आया था। जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। लेकिन तब राजनीति आड़े आ गई और उत्तराखंड के तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने केदार घाटी के पुनरुद्धार के उनके प्रस्ताव को ठुकरा दियां। बाद में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने इस काम को पूरा किया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई भी कि अगर उत्तराखंड सरकार की तैयारियां पुख्ता होती और राहत व बचाव अभियान वक्त रहते हो पाता, तो इस आपदा में कई और जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

प्राकृतिक आपदा से लड़ने के लिए तैयार

प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ भावनात्मक आधार पर ही देश की हर आपदा से खुद को नहीं जोड़ा, बल्कि देश को किसी भी संभावित प्राकृतिक आपदा से लड़ने के लिए तैयार भी किया। बचाव व राहत के कार्य को टेक्नोलाजी से जोड़ा। एनडीआरएफ और सेना को इसके लिए पूरी तरह तैयार किया। सैटेलाइट के जरिए मौसम पर नजर रखने की मुक्कमल व्यवस्था करवाई। प्राकृतिक आपदा से लड़ने और कम से कम हानि सहने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने कई स्तर पर नये प्रयोग किए।

मसलन भारत दुनिया का पहला देश है जिसने आपदा में मदद के लिए फेसबुक के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी की है। कई आईटी कंपनियों को भी आपदा संबंधित चुनौतियों का सामना करने के लिए समाधान के उपाय करने की जिम्मेदारी दी है। इसके अलावा देश के विभिनन भागों में एनडीआरएफ की टीमें पूरे इंतजाम के साथ जमी हैं। उनके पास अब पर्याप्त संख्या में आपातकालीन लाइट्स, सोलर लाइट्स, गैस कटर और वुड कटर उपलब्ध होते हैं।

आपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम के तहत देश में प्राकृतिक आपदाओं के कुशल प्रबंध के लिए अपेक्षित आंकड़ों व सूचनाओं को उपलब्ध कराने के लिए इसरो द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित आधारभूत संरचनाओं से भी अब काफी मदद मिल रही है। भू-स्थिर उपग्रह, भू-प्रेक्षण उपग्रह, हवाई सर्वेक्षण प्रणाली से अब देश अब पूरी तरह लैस है। उपग्रह चित्रों के माध्यम से आपदा से निपटने की तैयारी, पूर्व चेतावनी, प्रतिक्रिया, राहत, बेहतर पुनर्वास तथा रोकथाम जैसे आपदा प्रबंधन के सभी चरणों के लिए अपेक्षित सूचनाएं समय पर मिलने लगी हैं।

भारत संचार निगम लिमिटेड ने दूरसंचार उपकरण बनाने वाली भारतीय कंपनी विहान नेटवर्क्स से हाथ मिलाया है। इसके तहत किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आपात मोबाइल नेटवर्क स्थापित किया जाएगा जो फंसे लोगों का पता लगाने में मददगार होगा। इससे एक घंटे में मोबाइल नेटवर्क काम करना शुरू कर देगा। यह समाधान सभी तरह के नेटवर्क बंद होने पर भी मोबाइल सिग्नल की मदद से मलबे में दबे या फंसे लोगों को खोजने में मदद करेगा।

पड़ोसी देशों के लिए भारत का अनूठा उपहार

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न आपदाओं के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में संचार सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इसरो का उपग्रह लॉन्च किया जिसका उपयोग पड़ोसी देश भी कर सकते हैं। पड़ोसी देशों के लिए भारत का यह अनूठा उपहार था जिसकी सार्क देशों ने भी सराहना की। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जूझ रहे ग्रह के विकास के लिए आपदा की तैयारियां करना आवश्यक है। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा के जोखिम कम करने के लिए विश्व स्तरीय मानकों के अनुसार भारत के शहरी नियोजन के मानदंड स्थापित करने को कहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए भारत की पहली राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) शुरू की। एनडीएमपी सेंडाई फ्रेमवर्क की तर्ज पर काम करता है और आपदा प्रबंधन एवं विकास प्रक्रिया के सभी स्तरों को चिह्नित करता है। भारत अब किसी विनाशकारी समुद्री लहर के तट से आगे भूमि पर उसकी दूरी की भविष्यवाणी करने में सक्षम है। इस भविष्यवाणी से जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद मिल रही है। गुजरात और उड़ीसा इसके गवाह हैं।

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