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क्यों कुलभूषण जाधव हो सकते हैं मुक्त?

Kulbhushan Jadhav hearing ICJ india

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) कुलभूषण जाधव के मामले पर 17 जुलाई को फैसला सुनाएगा। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का कारण बने इस मामले की सुनवाई हेग स्थित आईसीजे के मुख्यालय में इस वर्ष फरवरी में पूरी हो गई थी। उल्लेखनीय है कि जाधव भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और उन्हें ईरान से अगवा कर पाकिस्तानी की आईएसआई बलोचिस्तान लेकर आई थी। जहां उन्हें रॉ का एजेंट बताकर बलोचिस्तान में आतंकवादी वारदातों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए अप्रैल 2017 में मौत की सजा पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत द्वारा सुना दी गई थी।  भारत इस सजा के खिलाफ मई 2017 में आईसीजे गया था जहां इस अंतराष्ट्रीय कोर्ट ने न सिर्फ फांसी के फैसले पर रोक लगा दी, बल्कि इस मामले पर पूरी सुनवाई भी की।

आइए देखते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और किन आधारों पर जाधव के पक्ष में फैसला आने की संभावना है।

पाकिस्तान को ही अपने पक्ष में फैसला आने का भरोसा नहीं

पाकिस्तान को ही भरोसा नहीं है कि कुलभूषण जाधव के मामले में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय उनके पक्ष में फैसला देगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मुहम्मद फैसल ने कहा हम फैसले का पूर्वानुमान नहीं लगा सकते। हां, हमने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा ठीक से लड़ा है और अपना पक्ष बेहतर ढंग से रखा है। पाकिस्तान की मीडिया भी यह कह रही है कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत का पलड़ा भारी है। पाकिस्तान के न्यूज चैनल एआरवाई के एक प्रोग्राम में यह जोर देकर कहा है कि मरियम नवाज और जस्टिस अर्शद मल्लिक के बीच हुई बातचीत के टेप आने के बाद भारत इसे सबूत के तौर पर पेश करेगा कि पाकिस्तान में न्याय नहीं होता वहां के न्यायाधीश राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रभावित होते हैं। यह इत्तेफाक ही है कि 17 जुलाई को जिस दिन कुलभूषण जाधव पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला आएगा, उसी दिन मरियम नवाज पाकिस्तान में न्यायपालिका के खिलाफ एक बड़ा जुलूस निकालने वाली हैं।

कैसे कुलभूषण को फंसाया गया

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाबलों ने जाधव को तीन मार्च, 2016 को बलोचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था जहां वह ईरान से घुस कर आए थे। पाकिस्तान के इस झूठे दावे को उजागर किया बलूच कार्यकर्ता मामा कदीर ने। उनका दावा है कि कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर ईरान के चाबहार से अगवा किया गया था। एक निजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कदीर ने दावा किया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाले मुल्ला उमर बलूच ईरानी ने जाधव को ईरान के चाबहार से अगवा किया था। यह भी कहा जा रहा है कि जनवरी, 2016 में पठानकोट हमले के बाद जब पाकिस्तान पर दबाव बढा तो उसने कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी और अपना अपराध स्वीकार करने वाला वीडियो जारी किया ताकि वह भारत पर अपने यहां आतंकवादी कार्रवाई कराने का आरोप लगा सके। भारत ने आधिकारिक रूप से यह कहा है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया जहां वह सेवानिवृत्ति के बाद व्यवसाय करने गए थे।

पाकिस्तान ने मानक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया

पाकिस्तानी की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को बिना किसी कानूनी सलाहकार की सहायता दिए अप्रैल 2017 में मृत्युदंड की सजा सुना दी। जबकि भारत ने जिंदा आतंकवादी कसाब के पकड़े जाने के बावजूद सभी आवश्यक कानूनी प्रकिया का पालन किया। कसाब को वकील भी उपलब्ध कराया गया। भारतीय नागरिक जाधव को ना तो राजनयिक संपर्क की अनुमति दी गई और ना ही वियना संधि के प्रावधानों का पालन किया गया।

भारत के पूर्व सॉलीसिटर जनरल हरीश साल्वे ने एसीजे में कहा कि भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा जासूसी और आतंकवाद के आरोपों में अप्रैल 2017 में सुनाई गई मौत की सजा हास्यास्पद है। जिस प्रक्रिया के तहत पाकिस्तान ने जाधव को फांसी की सजा दी है वह दुनिया के किसी भी अदालत में वैध नहीं ठहरायी जा सकती।

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने ही फांसी पर रोक लगाई थी

भारत ने आठ मई 2017 को आईसीजे से मुकदमा दायर कर कहा था कि पाकिस्तान द्वारा जाधव तक राजनयिक से बार-बार इनकार करने से राजनयिक रिश्तों से संबंधित 1963 की विएना कन्वेंशन का घोर उल्लंघन हुआ है। इस पर सुनवाई करते हुए आईसीजे की 10 सदस्यीय पीठ ने 18 मई 2017 को मामले का निपटारा होने तक जाधव को फांसी की सजा देने से पाकिस्तान को रोक दिया था।

जाधव के खिलाफ कार्रवाई पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा

पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को रॉ का एजेंट बताकर और उन्हें बलोचिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों का दोषी बताकर सिर्फ प्रोपेगैंडा कर रहा है। जाधव के संबंध में ना तो कोई जांच की गई ना अपना बचाव करने के लिए जाधव को वकील दिया गया। बस आनन फानन में मौत की सजा सुना दी गई। हरीश साल्वे ने आईसीजे के न्यायाधीशों से कहा – पाकिस्तान दुष्प्रचार के लिए आईसीजे का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने राज्य समर्थित आतंकवाद से ध्यान भटकाने के लिए कुलभूषण जाधव का मोहरा के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान ने ना तो जाधव मामले में कोई विश्वसनीय साक्ष्य दिये हैं और ना ही उनका अपराध स्पष्ट रूप से बताया है। केवल जबरन कबूलनामे‘ पर जाधव को सजा सुनाई गई है। पाकिस्तान का पक्ष पूरी तरह से जुमलों पर आधारित है, तथ्यों पर नहीं।

पाकिस्तान का रवैया अमानवीय

पाकिस्तान ने जिस तरह से  कुलभूषण जाधव से उनके परिवार से मिलाया वह पूरी तरह अमानवीय था। उनकी पत्नी की हाथों की चूड़ियां, मंगलसूत्र और यहां तक कि उनकी सैंडल भी उतरवा दी। मां व पत्नी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान सामान्य बातचीत की जगह जाधव से पाकिस्तान ने यह कहलावाया कि वह आतंकवादी है और यहां वारदातों को अंजाम देने आए हैं। इसकी रिकार्डिग भी पाकिस्तान ने करवाई। पाकिस्तान के इस रवैये से भारत में काफी निराशा हुई। भारत ने इसके विरोध में बकायदा पाकिस्तान को पत्र भी लिखा। इसके अतिरिक्त भारत द्वारा जाधव को राजनयिकों से मिलने देने के 13 रिमाइंडर भेजने के बाद भी पाकिस्तान ने कोई जवाब नहीं दिया। पाकिस्तान की ओर से  आईसीजे में  पैरवी कर रहे वकील खावर कुरैशी ने भी भारत की दलीलों का जवाब पुराने आरोपों से ही दिया। कुरैशी ने भी पाकिस्तानी सेना के उस बयान को ही दोहराया जिसमें कहा गया था कि जाधव भारतीय नौसेना का अधिकारी और जासूस था, न कि व्यवसायी।

भारत को उम्मीद है कि 17 जुलाई को आईसीजे से फैसला जाधव के पक्ष में आएगा और पाकिस्तान से उनकी रिहाई हो सकेगी। पाकिस्तान चूंकि वियना कनवेंशन से बंधा हुआ है इसलिए उसे अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले को मानना भी पड़ेगा। और अगर ऐसा होता है तो यह प्रधानमंत्री मोदी की एक और बहुत बड़ी सफलता होगी।

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