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खवर कुरैशी: कुलभूषण केस में पाकिस्तान का वकील कभी कांग्रेस सरकार का भी वकील था

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खवर कुरैशी, एक ऐसा नाम, जो आज कल भारत-पाकिस्तान के बीच तेजी से तैर रहा है। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी आईसीजे में जब 17 जुलाई को यह फैसला आया कि पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय जल सेना के पूर्व कमांडर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान फांसी नहीं दे सकता और उनसे राजनयिक संपर्क की अनुमति पाकिस्तानी को तुरंत देनी होगी, तो भारत में ख़ुशी का माहौल छा गया।

भारत की ओर से आईसीजे में पक्ष रखने वाले अतंरराष्ट्रीय मामलों के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इसे भारत की एक अहम सफलता बताया। तो वहीं कुलभूषण यादव को रिहा नहीं करने और उनके खिलाफ पाकिस्तान में फिर से ट्रायल चलाने के आईसीजे के आदेश को पाकिस्तान अपनी जीत बताने में लगा है।

बहरहाल खवर कुरैशी को लेकर पाकिस्तान में एक बार फिर यह राय बनाने की कोशिश की जा रही है कि उसी की काबिलियत के कारण आईसीजे ने भारत की यह मांग ठुकरा दी कि कुलभूषण जाधव को तुंरत रिहा किया जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि यह खवर कुरैशी कौन है।

खवर कुरैशी

खवर कुरैशी ब्रिटिश मुस्लिम परिवार से है। उसने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से लॉ में बैचलर डिग्री और मास्टर डिग्री हासिल की है। खवर कुरैशी को कानून की दुनिया में एक बेहतरीन ब्रेन माना जाता है। वह ब्रिटेन की महारानी का भी वकील है और उसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अदालतों में अलग अलग देशों का प्रतिनिधित्व करने का अनुभव प्राप्त है। खवर कुरैशी का पाकिस्तान से लगाव है और वह पाकिस्तान की मदद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फोरम पर करता रहा है। खवर पाकिस्तान की यात्रा भी करता रहा है।

खवर कुरैशी कैसे करता रहा है भारत की खिलाफत

कुलभूषण यादव मामले में पाकिस्तान का पक्ष रखने के लिए वह इस्लमाबाद के दौरे पर खुद आया था, जहां उसने पाकिस्तान के विदेश मंत्री, तत्कालिन चीफ जस्टिस और एटर्नी जनरल से मुलाकात भी की।

अगस्त 2018 में वह लाहौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के निमंत्रण पर ‘ पब्लिक इंटरनेशनल लॉ एंड पाकिस्तान’ पर आयोजित एक सेमिनार को भी संबोधित किया, जहां उसने पाकिस्तान के वकीलों को ‘इंडस वाटर ट्रिटी’ और ‘कश्मीर’ के मामले में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की स्थिति पर भाषण दिया और पाकिस्तानी वकीलों से इस मामले में अलर्ट रहने को कहा।

खवर कुरैशी कोई पहली बार पाकिस्तान का पक्ष लेकर भारत के खिलाफ किसी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नहीं खड़ा हुआ है, बल्कि यूके के हाई कोर्ट में भी एक मामला पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ लड़ रहा है, जिसमें हैदराबाद के निजाम द्वारा 1947 में पाकिस्तान को 35 मिलियन पौंड देने की बात कही गई है। यह पैसा 72 सालों से लंदन के एक बैंक अकाउंट में रखा गया है। इस पर पिछले महीने ही अंतिम सुनवाई हुई है।

कांग्रेस की वकालत करने वाले बुद्धजीवियों की मदद से खबर कुरैशी ने कुलभूषण जाधव केस में भारत के खिलाफ तथ्य रखे

खवर कुरैशी ने भारत के खिलाफ जो भी दलील दिए, वे सब भारतीयों द्वारा जाने अनजाने में उपलब्ध कराई गई सूचनाओं के आधार पर भी दिए। आईसीजे में कुलभूषण जाधव को भारतीय जासूस होने के सबूत के तौर पर खवर कुरैशी ने भारत के ही तीन प्रकाशनों में छपे लेखों का सहारा लिया। उसने भारतीय मीडिया की खबरों का हवाला देने से पहले अंगेजी में एक कहावत कही- ‘ इंडिया इज लिविंग न ए वंडरलैंड, इट इज सिटिंग ऑन ए वीक वाल आफ लाइज, जस्ट लाइक हम्प्टी डम्प्टी, एंड वन डे विल हैव ए ग्रेट फॉल। फिर इस कहावत को सिद्ध करने के लिए उसने इंडियन एक्सप्रेस में छपे करण थापर के लेख, फ्रंट लाइन पत्रिका में छपे प्रवीण स्वामी के लेख और द क्विंट छपे चन्दन नंदी के एक लेख को उद्धृत किया। इन तीनों लेखों में जाधव के रॉ एजेंट होने और भारत की स्थिति कमजोर होने की स्टोरी छापी गई थी। इन लेखों में तमाम सबूत का भी हवाला दिया गया था।

जब खवर कुरैशी को कांग्रेस सरकार ने भारत का वकील चुना

भारत के खिलाफ हर मोर्चं पर खड़े इस अंतरराष्ट्रीय बैरिस्टर को हमीं ने शाबासी भी दी। लगभग 20-21 साल पहले जब अमेरिकी कंपनी एनरान ने महाराष्ट्र से दाभोल पावर प्रोजेक्ट को बाहर करने के मामले में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में भारत के खिलाफ मामला दायर किया था। वाजपेयी सरकार में सालिसिटर जेनरल रहे हरीश साल्वे भारत की ओर से इस मुकदमें की पैरवी कर रहे थे। उन्होंने 2002 में यह पद छोड़ दी थी लेकिन इस मामले में वह भारत की ओर से आगे भी पैरवी करने के लिए तैयार थे।

लेकिन जब 2004 में यूपीए की सरकार आई तो उनको हटाकर फॉक्स एंड मंडल लॉ फर्म को इस केस में नियुक्त कर दिया गया और फॉक्स एंड मंडल लॉ फर्म को कहा गया कि वह खवर कुरैशी को इस मामले में भारत का पक्ष रखने के लिए नियुक्त करे। वैसा ही हुआ भी। खवर कुरैशी के इस मामले में भारत की ओर से पैरवी करने के बावजूद यह केस हम हार गए।

खवर कुरैशी का पाकिस्तान के प्रति लगाव और हमारे खिलाफ लड़ने की उनकी मानसिकता को समझना चाहिए। क्या कांग्रेस सरकार ने ऐसे व्यक्ति को भारत का वकील चुनने से पहले उसकी पृष्ठ्भूमि की जांच की थी?

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