Explained National

कश्मीर में विकास का एजेंडा

Kashmir development model

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे में कश्मीर का विकास बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। अन्य राज्यों की तरह यहां भी सामाजिक उत्थान की सभी योजनाओं को प्रमुखता से लागू किया जा रहा है। यदि योजनाओं और उनके लाभार्थियों की संख्या कश्मीर में देखे और उसका विश्लेषण करें तो कोई नहीं कह सकता ये परिणाम कश्मीर जैसे उस राज्य का है जहां से सिर्फ आतंक की खबरें ही प्रमुखता से आती हैं। लेकिन भारत सरकार आतंकवादियों  को धत्ता बताते हुए राज्य के लोगों का विकास करने में जी जान से जुटी है।

सामाजिक उत्थान की योजनाएं

इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने जितनी भी सामाजिक उत्थान की योजनाएं चलाई हैं उन सबका क्रिन्यावयन जम्मू कश्मीर में काफी अच्छे से हो रहा है। सरकार से प्राप्त आकड़े के अनुसार मार्च 2019 तक जम्मू कश्मीर के 10,09,115 परिवारों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर मिल चुका है। 3,79,818 घरों में सौभाग्य योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन जुड़ चुका है। जन धन योजना के तहत 20,74,299 परिवारों के बैंक खाते खुल चुके हैं। मार्च 2019 तक 79,54,364 एलईडी बल्ब वितरित हो चुके हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण योजना के तहत 6567.949 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो चुका है। 1,50,302 किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठा रहे हैं। मार्च 2019 तक मुद्रा योजना के तहत 3,68,103 उद्यमियों के लोन स्वीकृत हुए और 8196.29 करोड़ रुपये वितरित भी कर दिए गए हैं। यही नहीं 10,78,048 धरों में स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्मित किए गए हैं और आयुष्मान भारत योजना के तहत 6 लाख 13 लोग जुड़ चुके हैं और 5 लाख तक मु्फ्त इलाज से लाभान्तिव हो रहे हैं। स्पष्ट है कि सरकार कश्मीर के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।

वाजपेयी की राह पर प्रधानमंत्री मोदी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रास्ते पर चलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भी इंसानियत, जम्हूरियत, कश्मीरियत के दायरे में कश्मीर मसला हल करने की कोशिश की है। इसी महीने अंतिम रविवार को अपने मन की बात में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जो कश्मीर में घृणा फैलाना चाहते हैं या विकास के काम में बाधा उत्पन्न करना चाहते हैं वे कभी भी सफल नहीं हो सकते। प्रधानमंत्री ने मन की बात में यह भी बताया कि जम्मू कश्मीर के लोग मुख्यधारा से जुड़ने के लिए व्यग्र हैं, जो बैक टू विलेज कार्यक्रम में भी दिखा। इस कार्यक्रम में 4500 राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों ने कश्मीर के लोगों से सीधे जुड़कर विकास की बातें की।

सरपंचों के जरिए विकास

जम्मू कश्मीर के 40,000 सरपंचों के जरिए विकास के लिए मोदी सरकार ने 3,700 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं । इस 3,700 करोड़ की राशि में करीब 1,850 करोड़ रुपये कश्मीर में गांवों के लिए आवंटित किए गए है। आजादी के बाद पहली बार कश्मीर घाटी में सरपंचों के लिए सीधे विकास कार्यों के इस्तेमाल के लिए यह राशि आवंटित की गई है। यह राशि सीधे सरपंचों तक पहुंचाई जा रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काफी जोर

सामाजिक योजनाओं के अलावा कश्मीर में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी मोदी सरकार काफी जोर दे रही है। केंद्र जम्मू कश्मीर में सैटेलाइट टाउनशिप, लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम कोरिडोर आदि पर भी काम शुरू कर चुका है। जल्द ही जम्मू संभाग में बंटालाब से ग्रेटरकैलाश को जोड़ने वाला 17 किलोमीटर लंबा और कश्मीर में उधेयवाला को इक्जिविशन ग्रांउड से जोड़ने वाला लाइट एलेवेटेड रेल ट्रांजिट सिस्टम कोरिडोर दिखाई देगा। श्रीनगर में भी दो ऐसे ही कोरिडोर बन रहे हैं एक 12.5 किलोमीटर लंबा कोरिडोर एचएमटी से इंदिरा नगर को जोड़ेगा और दूसरा 12.5 किलोमीटर लंबा कोरिडोर ओसमानाबाद से हजुरीबाग को जोड़ेगा। भविष्य की विकास योजनाओं को ध्यान में रखकर जम्मू कश्मीर के लिए मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अॅथोरिटी बनाया गया है। ग्रेटर श्रीनगर और ग्रेटर जम्मू में 50,000 मकानों के साथ सैटेलाइट शहर बनाया जा रहा है। इन दोनों शहरों में लाखों फुट के आईटी पार्क्स भी होंगे।

केंद्र सरकार कश्मीर और हिमाचल को जोड़ने वाली एक अतिमहत्वकांक्षी परियोजना पर भी काम कर रही है। हिमाचल के बिलासपुर-मनाली से लेह को जोड़ने वाली 465 किलोमीटर की रेल लाइन पर काम चल रहा है। जब यह रेल परियोजना पूरी हो जाएगी तो यह दुनिया की सबसे उची और लंबी रेल परियोजना होगी। इसमें एक 27 किलामीटर की ऐसी टनेल भी होगी जो दुनिया की सबसे लंबी टनेल होगी। वैसे इस रूट पर कुल 52 टनेल होंगी जिनकी सम्मिलित लंबाई  244 किलोमीटर होगी।

केंद्र सरकार डल झील का भी सौंद्रीयकरण करने जा रही है। कश्मीर की पहचान डल के चारों ओर नई लाइटें लगेंगी, फुटपाथ का फिर से निर्माण होगा और संगीतमय फौव्वारें भी लगाई जाएंगी। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को हर प्रकार से विकसित राज्य बनाने के प्रधानमंत्री के प्रयास सराहनीय भी है और आंखे खोलने वाले भी है। कम से कम उनके लिए जो इस जन्नत को जहन्नुम बनाने का सपना देख रहे हैं।

Share