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जेट एयर के लेनदारों की उम्मीद आईबीसी पर

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जेट एयरवेज के उधारियों को पैसे मिलने की संभावना अब काफी बढ़ गई है। मोदी सरकार जब से इनसालॅवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) लेकर आई है, बैंकों, अन्य वित्तीय संस्थानों और उधारियों के पैसे वापस मिलने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। पहले उधार लेकर भाग जाने वालों के खिलाफ किसी एक विंडो के जरिए समाधान नहीं मिल पाता था, जिसके कारण बैंकों व वित्तीय संस्थानों के साथ आम लोगों के पैसे भी डूब जाते थे। आईबीसी के तहत अब कोई भी दिवालिया होने वाली कंपनी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिव्यूनल (एनसीएलटी) में जा सकता हैं । जहां दिवालिया कंपनी और उसके प्रमोटर की संपत्तियों की नीलामी कर लेनदारों को पैसा वापस किया जाता है। 20 जून को एनसीएलटी ने जेट एयरवेज की इनसालॅवेंसी का आवेदन स्वीकार कर लिया था। स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने जेटएयरवेज को एनसीएलटी ले जाने की पहल की थी।

ताजा समाचार के अनुसार जेट एयरवेज के मामले में अंतरिम रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) के पास अभी तक लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के दावे आ चुके हैं। आईआरपी उन पेशेवर संस्थानों को कहते हैं, जिन्हें एनसीएलटी देनदारों की संपत्ति की बिक्री या नीलामी के जरिए लेनदारों के जायज बकाये का भुगतान करने में सहयोग करने के लिए नियुक्त करती है। जेट एयरवेज के मामले में ग्रांट थोरटोन कंपनी के आशीष छावछारिया को आईआरपी बनाया गया है।

इनसालॅवेंसी की प्रक्रिया

अभी तक जिन दावेदारों ने अपने बकाये की सूची आईआरपी को भेजी है उनमें 8,500 करोड़ रूपये के दावे भारत और विदेश के वित्तीय संस्थानों की तरफ से आए हैं। इनमें से 6,441 करोड़ रुपये के दावे भारतीय वित्तीय संस्थानों के हैं और 1,569 करोड़ रुपये के दावे विदेशी बैंकों के हैं। जेट एयरवेज के कर्मचारियों ने वेतन और अन्य भत्ते के रूप में 443.56 करोड़ के दावे किए हैं तो अन्य लेनदारों ने 12,373 करोड़ रुपये के दावे पेश किए हैं। इन अन्य लेनदारों में अधिकतर जेट एयरवेज के प्रमोटर नरेश गोयल की ही कंपनियां है। आईआरपी ने अभी इनके दावे को मंजूरी नहीं दी है।

एक बार देनदारी की वेरीफाइड सूची तैयार होने के बाद आशीष छावछारिया जेट एयरवेज की संपत्ति व एविएशन से संबंधित अनुमतियों जिनमें रूट्स आदि शामिल हैं को बेचने के लिए क्षमतावान निविदाकर्ताओं से एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट यानी अभिरूचि की अभिव्यक्ति को आमंत्रित करेंगे । इसकी सूचना जारी होने के बाद निविदाकर्ताओं को 15 दिन का समय मिलेगा। अभी तक जिन कंपनियों ने जेट एयरवेज को खरीदने में अपनी रूचि दिखाई है, उनमें हिंदुजा ग्रुप, जेट के कर्मचारियों द्वारा गठित एक उद्यम और यूके की आदी पार्टनर्स शामिल हैं। इसकी जानकारी खुद छावछारिया ने ही दी है।

कैसे डूबा जेट एयरवेज

यह आश्चर्य की बात है कि जेट एयरवेज उस समय डूबा है, जब एयरवेज बिजनेस बूम पर है। डायरेक्टर जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन की 2016-17 की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 9 वर्षों में वायुयान से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या दुगुनी हो गई है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि एविएशन मार्केट में मंदी के कारण जेट को कोई नुकसान हुआ है। यहीं नहीं भारत में औसत लोड फैक्टर 78 प्रतिशत से लेकर 92 प्रतिशत तक है। यानी सभी प्रमुख एयरलाइनों की सीटें 78 प्रतिशत से अधिक भरी हुई होती हैं। जेट का खुद का लोड फैक्टर 81.8 प्रतिशत रहा है। किसी भी स्टैडंर्ड से यह लोड फैक्टर काफी अच्छा माना जा सकता है। यहीं नहीं भारत से अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने वाली सभी एयरलाइनों में जेट की हिस्सेदारी सबसे अधिक 14.5 प्रतिशत रही है। यानी यहां भी जेट आय के हिसाब से अन्य एयरलाइनों से आगे रहा है। फिर भी जेट एयरवेज लगातार घाटे में कैसे चलता चला गया। यह आश्चर्य की बात है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जेट एयरवेज के डूबने के तीन बड़े कारण है। पहला यह कि जेट ने लो कॉस्ट एयरलाइन की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के लिए सहारा एयरलाइन का जो अधिग्रहण किया, वह उसके लिए अभिशाप साबित हुआ। यह डील पूरे 5000 मिलियन डॉलर की थी,  इतनी बड़ी राशि सहारा एयरलाइंस को खरीदने में खर्च की गई, लेकिन उसके अनुपात में जेट को आय प्राप्त नहीं हुई। इंडिगो के बाजार में आने के बाद इस प्रतिस्पर्धा में जेट पिट गया।

नए रूट पर जाने की जल्दी और उसके लिए अंधाधुंध कर्ज भी जेट एयरवेज के विघटन का कारण बना। कहा जा रहा है कि जेटएयरवेज ने इतना ज्यादा कर्ज ले लिया कि उसकी सर्विसिंग में ही परेशानी आने लगी और तीसरा सबसे बड़ा कारण जेट एयरवेज के प्रोमोटरों की मनमानी। कहा जाता है कि जेट एयरवेज में प्रबंधन में पेशेवर लोगों की सुनी नहीं जाती थी और प्रमोटर अपने हिसाब से कंपनी चला रहे थे।

सरकार सतर्क, कर्मचारियों के साथ

17 अप्रैल 2019 को जेट एयरवेज का ऑपरेशन बंद हो गया था। जिस समय जेट ने अपनी सभी फ्लाइटों को ग्राउंडेड करने का निर्णय लिया, उस समय जेट के साथ लगभग 20 हजार कर्मचारी काम कर रहे थे। उनमें 1300 तो पायलट थे। ये सभी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन धन्यवाद आईबीसी कोड का कि इन कर्मचारियों को उनका वेतन और क्षतिपूर्ति मिलने की संभावना पूरी तरह बन गयी है। सरकार ने भी उनको आश्वस्त किया है कि कर्मचारियों को अन्य एयरलाइंस में दुबारा नियुक्त करने में पूरी मदद करेगी। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने कहा है कि सरकार खुद एक ऐसे वेबसाइट को लांच कर रही है जिसमें जेट के सभी कर्मचारियों का विवरण होगा और उन्हें अन्य एयरलाइंस के साथ जोड़ने की प्रकिया में सहायता सरकार करेगी।

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