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इंदिरा जयसिंह : मामला क्या है?

Indira Jaisingh Lawyers collective CBI raid

सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह के घर और उनके एनजीओ ‘लायर्स कलेक्टिव’ पर सीबीआई की छापेमारी चर्चा का विषय बना हुआ है।  संसद में भी इस मामले को विपक्ष द्वारा उठाया गया।

इस लिए यह जानना जरूरी है आखिर यह मामला क्या है? सीबीआई ने किस आधार पर इंदिरा जयसिंह और उनके एनजीओ ‘‘लायर्स कलेक्टिव‘‘ के ठिकानों पर छापे मारे और इंदिरा जयसिंह खुद किन चीज़ों के लिए जानी जाती हैं ।

आइए जानते हैं इस पूरे मामले को।

सीबीआई के छापे की वजह

इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर पर यह आरोप है कि उन्होंने अपने एनजीओ ‘‘लायर्स कलेक्टिव‘‘ के जरिए विदेश से काफी मात्रा में चंदा लिया और उसका उपयोग राजनीतिक हितों के लिए किया । इस संबंध में बकायदा उनके खिलाफ गृहमंत्रालय की तरफ से शिकायत दर्ज कराई गई। सीबीआई का कहना है कि दोनों लोगों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद ही यह कार्रवाई की जा रही है।

अधिवक्ताओं के एक और स्वैच्छिक संगठन ’लायर्स व्याइस’ ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि इंदिरा जयसिंह और उनके पति के एनजीओ द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के खिलाफ गतिविधियों में प्रयोग किया।

सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी धन प्राप्त करने और उसके उपयोग से जुड़े नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करने को लेकर कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने एवं इसकी जांच की मांग करने वाली एक याचिका पर अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह उनके पति आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘‘लायर्स कलेक्टिव‘‘ से जवाब भी मांगा था। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने गृह मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया तथा आरोपों पर जवाब देने को कहा। इन्हीं तथ्यों के आधार पर सीबीबाई ने ये छापे डाले।

क्या है विदेशी चंदे का मामला?

सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका के अनुसार इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और ‘‘लायर्स कलेक्विटव’’ ने एफसीआरए, भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून का उल्लंघन किया है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा है कि गंभीर आरोप होने के बावजूद केंद्र की यूपीए की सरकार ने जयसिंह, उनके पति ग्रोवर और “लायर्स कलेक्टिव” की छानबीन नहीं की, जबकि चेक और नकदी के रूप में इन लोगों द्वारा खूब विदेशी चंदा प्राप्त किया गया।

टाइम्स नाउ में प्रकाशित खबर के अनुसार याचिका में कहा गया है कि 31 मई 2016 के आदेश से यह स्पष्ट है कि जयसिंह ने केंद्र के लिए जुलाई 2009 से मई 2014 तक अतिरिक्त सालीसीटर जनरल के रूप में काम करने के दौरान 96.60 लाख रूपया फीस के रूप में प्राप्त किया। इसके पहले इस संबंध में गृह मंत्रालय ने जयपुर निवासी राजकुमार शर्मा के पत्र का संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई शुरू की थी। पत्र में सूचना के अधिकार से प्रात जानकारी के आधार पर यह दावा किया गया था कि ‘‘लायर्स कलेक्टिव’’  ने 2006 के बाद से 28.5 करोड़ रुपया विदेशी चंदा के रूप में प्राप्त किया जिसमें से 7.2 करोड़ रुपया फोर्ड फाउंडेशन यूएसए से प्राप्त किया गया जबकि 4.1 करोड़ रुपया अत्यधिक विवादास्पद अमेरिकी दानदाता ओपेन सोसाइटी फाउंडेशन से लिया।

इन शिकायतों के आधार पर गृह मंत्रालय ने ’‘लायर्स कलेक्टिव‘’ का लाइसेंस 2016 में निलंबित कर दिया और विदेशी सहायता नियमन कानून (एफसीआरए) 2010 के कथित उल्लंघन को लेकर बाद में इस सुविधा को स्थायी रूप से रद्द कर दिया।

जब इंदिरा जयसिंह और मुख्य न्यायाधीश आये आमने सामने

सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार करने और उस पर नोटिस जारी करने के बाद इंदिरा जयसिंह ने इस पर कहा और इसे यह रंग देने की कोशिश की, कि चूंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की एक बर्खास्त महिला कर्मचारी का मुद्दा उठाया था, जिसने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, इसलिए उनके खिलाफ यह नोटिस जारी किया गया है। जबकि तीन जजों की एक आतंरिक जांच समिति ने इस आरोप को खारिज कर दिया था। लेकिन इंदिरा जयसिंह ने बकायदा एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि सीजेआई के खिलाफ शीर्ष न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के सिलसिले में अपनाई गई कार्यप्रणाली का मुद्दा उठाए जाने के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

इंदिरा जयसिंह की शख्सियत - क्या रहा है इतिहास

इंदिरा जयसिंह देशकी जानी मानी अधिवक्ता हैं। 1981 में इन्होंने ‘‘लायर्स कलेक्टिव‘‘ के नाम से एक एनजीओ का गठन किया। जिसको लेकर कई विवाद खड़े हुए हैं। ‘‘लायर्स कलेक्टिव‘‘ का उद्देश्य  वैसे तो महिला अधिकारों या दबे कुचले को न्याय दिलाने के लिए बताया गया है, लेकिन इसकी भूमिका राष्ट्रवादी विचारों के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय देखा गया है। डोमेस्टिक वायलेंस पर विधेयक तैयार करने और महिला अधिकारों के लिए लड़ने और उनके लिए न्याय हासिल करने लिए भी इंदिरा जयसिंह को जाना जाता है।

लेकिन साथ ही इंदिरा जयसिंह का नाम तमाम विवादों में भी आता रहा है।

उन्होंने मुंबई बम ब्लास्ट के मुख्य आरोपी याकूब मेनन की फांसी का भी विरोध किया।

निठारी जैसे जघन्य काण्ड के दोषी सुरेंद्र कोली की भी अधिवक्ता रही है और उसकी फांसी की सजा कम करने के लिए खड़ी हुई थी।

यह वहीं इंदिरा जयसिंह हैं जिन्होंने इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट की जज बनाने के खिलाफ इसलिए याचिका डाली कि पहले सरकार जस्टिस जोसफ का नाम क्लियर करे। इस पर सुप्रीम कोर्ट के तत्कालिन चीफ जस्टिस ने उन पर रोष जताते हुए बोला कि आपके बीच की महिला वकील सुप्रीम कोर्ट की जज बनने जा रही हैं और आप उसे रोकने को कह रही हैं।

देश में मानव अधिकार और समाज कार्य करने के नाम पर पिछले कुछ वर्षों में कई एनजीओ जांच के घेरे में आये है, लॉयर्स कलेक्टिव भी उनमें से एक हैं। बहरहाल विवादों के बीच कानूनी प्रकिया जारी है।

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