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उपलब्धि: भारत दुनिया भर में दवा के क्षेत्र में महाशक्ति बनकर उभरा

  • हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन उपलब्ध कराने के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने पीएम मोदी को धन्यवाद कहा
  • कोरोना से लड़ने के लिए भारत ने अमेरिका भेजी 5 करोड़ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन
  • नेतन्याहू ने इजराइल को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात करने के लिए भारत को कहा थैंक्यू, पीएम मोदी बोले-हम मिलकर लड़ेंगे

ये हेडलाइंस याद हैं आपको! आज से करीब एक साल पहले पूरी दुनिया सहमी सी थी। कोरोना की वजह से विकसित देश भी घरों में कैद थे। हर चीज के लिए मारामारी मची थी। मानव रक्षक दवाइयों के लिए भी विकसित देश भारत की ओर निहार रहे थे। पीएम मोदी ने कहा था भारत जान भी जहान भी के सिद्धांत पर चलते हुए देश के साथ-साथ पूरी दुनिया की रक्षा का भार उठाएगा और ऐसा हुआ भी। इसी वक्त पीएम मोदी ने देश में आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया और नतीजी आज सबके सामने है। कोरोना महामारी के बीच भारत दुनिया में दवा के क्षेत्र में महाशक्ति बनकर उभरा है। दवाओं के देश में रूप में भारत का महत्व दुनिया जान गई है।

क्वाड ने किया भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी को समर्थन, एक अरब खुराक बनाएगा भारत

क्वाड की बैठक में कोरोना वायरस से परेशान दुनिया को निजात दिलाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। 12 मार्च को क्वाड समूह के देशों- भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने वर्चुअल मीटिंग में यह सुनिश्चित किया है कि वर्ष 2022 के अंत तक एशियाई देशों को दिए जाने वाले कोरोना वैक्सीन की 100 करोड़ खुराक का निर्माण भारत में किया जाएगा। साउथ इस्ट एशियाई देशों के अलावा विश्व के उन देशों में भी वैक्सीन की सप्लाई की जाएगी जो जरूरतमंद होंगे। इस बैठक में ये भी कहा गया कि अमेरिका भारतीय दवा निर्माता बायलॉजिकल-ई को साल 2022 के आखिर तक एक अरब कोविड-19 टीकों का उत्पादन करने के लिए आर्थिक सहायता देगा। यह घोषणा क्वाड सम्मेलन के बाद व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक दस्तावेज में की गई।

दुनिया ने माना भारत की उत्पादन गति का लोहा, चीन को मिलेगी मात!

इसे चीन की टीका कूटनीति के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। क्वाड की बैठक में चारों देशों ने तय किया कि भारत में वैक्सीन का उत्पादन काफी तेज गति से होता है और चूंकि भारत वैक्सीन का सबसे बड़ा निर्माता भी है, लिहाजा वैक्सीन उत्पादन की जिम्मेदारी भारत को दी गई है। जबकि, वैक्सीन उत्पादन में आने वाले खर्च का वहन अमेरिका करेगा। वहीं, जापान का जापान बैंक ऑफ इंटरनेशनल भी वैक्सीन उत्पादन में आने वाले खर्च में अपनी भागीदारी निभाएगा। जबकि, ऑस्ट्रेलिया वैक्सीन उत्पादन से डिस्ट्रीब्यूशन में शामिल लोगों को ट्रेनिंग देने के साथ वैक्सीन हर एक आदमी तक कैसे पहुंचे, इस काम को संभालने का काम करेगा।

कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई एकजुट है। हम सुरक्षित कोविड-19 टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक क्वाड साझेदारी शुरू कर रहे हैं।– पीएम मोदी

मतलब साफ है कि आगामी दो वर्ष में भारत दुनिया की वैक्सीन महाशक्ति के रूप उभरेगा।

भारत का वैश्विक अभियान वैक्सीन (टीका) मैत्री

कोरोना महामारी से उबारने के लिए भारत व्यापक स्तर पर ‘टीका मैत्री’ अभियान चला रहा है और भारत ने पड़ोसी दोशों के साथ अन्य देशों को कोरोना टीका उपलब्ध कराने के लिए ही मिशन वैक्सीन मैत्री (टीका मैत्री) की शुरूआत की। जनवरी से अब तक भारत ने कई पड़ोसी और मित्र देशों को भेंट के तहत लाखों कोरोना वायरस के टीके उपलब्ध कराए हैं। दुनिया के देशों को भारत द्वारा अनुदान सहायता और वाणिज्यिक आपूर्ति के तहत टीका उपलब्ध कराने के अभियान को ‘‘टीका मैत्री’’ का नाम दिया गया है। इसे टीका कूटनीति भी कहा जा रहा है। वैक्सीन मैत्री अभियान के तहत मालदीव, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मॉरीशस सहित खाड़ी देशों, कैरिबियाई देशों, अफ्रीकी देशों और प्रशांत द्वीपीय देशों को टीका भेजा गया है।

दुनिया के औषाधलय के तौर पर भारत की भूमिका असाधारण- ब्रिटेन के मंत्री लॉर्ड अहमद

पिछले दिनों ब्रिटेन के मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद ने कहा कि भारत ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान दुनिया के औषधालय के तौर पर जो भूमिका निभायी है वह असाधारण है।

‘‘भारत ने दुनिया के औषधालय के रूप में जो भूमिका निभाई है वह अभूतपूर्व है। भारत के साथ हमारा संबंध केवल द्विपक्षीय महत्व का नहीं है, यह इस बारे में भी है कि ये दोनों देश एकसाथ कैसे काम कर रहे हैं और वर्तमान कोविड​​-19 महामारी से बेहतर इसका कोई कोई चित्रण नहीं हो सकता है जिससे हम वर्तमान समय में जूझ रहे हैं। हमने ब्रिटेन और भारत के बीच दुनिया भर में प्रतिक्रिया जताने में एक मजबूत सहयोग देखा है जिसमें कोवैक्स सुविधा के तहत सहयोग भी शामिल है जिसके अंतर्गत दुनिया के जोखिम वाले देशों की मदद की जा रही है।’’- ब्रिटेन के मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद

भारत ने दुनिया को मुहैया कराईं अनिवार्य दवाइयां

कोरोना काल में दुनिया के 150 से अधिक देशों को भारत ने अनिवार्य दवाइयां मुहैया कराई हैं और 72 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरस ने टीकाकरण के लिहाज से भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बताया है।

फार्मा के लिए मिली पीएलआई को मंजूरी

बीते दिनों उद्योग एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार संवद्र्धन विभाग और नीति आयोग द्वारा उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना पर आयोजित परिचर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में पीएलआई योजना के अंतर्गत इस क्षेत्र में अगले पांच-छह वर्षों के दौरान 15,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। इससे जहां दवा क्षेत्र की बिक्री करीब तीन लाख करोड़ रुपये हो जाएगी, वहीं दवा निर्यात में भी करीब दो लाख करोड़ रुपये का इजाफा होगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, दवा क्षेत्र की अनेक प्रमुख कंपनियां इस योजना के तहत निवेश करने का मंतव्य जाहिर कर चुकी हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने 24 फरवरी को उत्पादन से जुड़ी इंसेंटिव योजना को फार्मास्यूटिकल्स उद्योग और आईटी हार्डवेयर उत्पादों के लिए मंजूरी दे दी थी। इस संबंध में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने एक प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने दावा किया था कि आने वाले समय में इस योजना के शानदार परिणाम दिखेंगे। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि पीएलआई स्कीम के तहत सरकार द्वारा दवा निर्माण के लिए कच्चे माल के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु विशेष प्रोत्साहन धनराशि भी सुनिश्चित की गई है। इससे दवाओं के एक्सीपियंट्स यानी पूरक पदार्थों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। स्थिति यह है कि देश में पूरक पदार्थों अर्थात कच्चे माल का करीब 70 फीसदी आयात करना पड़ता है। सरकार की रणनीति है कि दवाओं के कच्चे माल का देश में उत्पादन बढ़ाते हुए धीरे-धीरे इसकी आयात निर्भरता कम से कम कर दी जाए।

देश की अर्थव्यवस्था को गतिशील करने में फार्मा सेक्टर अहम भूमिका

इस समय कोविड-19 की चुनौतियों के बीच देश की अर्थव्यवस्था को गतिशील करने और देश के लिए विदेशी मुद्रा की कमाई करने में फार्मा सेक्टर अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई दे रहा है।

कोरोना के दौर में भारत ने दुनिया के करीब 150 देशों में कई दवाइयों का निर्यात करके फार्मेसी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनाडा इंडिया इन्वेस्ट सम्मेलन में

मौजूदा समय में भारत दवा उत्पादन के मूल्य के मामले में विश्व में 14वें और दवा उत्पादन की मात्रा के मामले में तीसरे स्थान पर है। विकासशील देशों के लिए दवाओं की लागत कम करने में भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई है। भारत विश्व को सबसे अधिक जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाला देश है। भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके पास अमेरिकी दवा नियामक यूएसएफडीए के मानकों के अनुरूप अमेरिका से बाहर सबसे अधिक संख्या में दवा बनाने के संयंत्र हैं।

कम लागत ने बढ़ाई देश की धाक

पिछले कई वर्षों में विश्वस्तरीय क्षमताओं और अनुकूल बाजार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत दुनिया के सबसे आकर्षक दवा बाजार के रूप में पहचान बढ़ा रहा है। दुनिया की करीब 60 फीसदी वैक्सीन भारत में बनाई जाती है। भारत के दवा उद्योग के आगे बढ़ने का प्रमुख कारण यहां कम लागत होना भी है।

फार्मा उद्योग का आकार 40 अरब डॉलर से अधिक

वर्तमान समय में भारत के फार्मा उद्योग का आकार 40 अरब डॉलर से अधिक का है। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा के मुताबिक, भारत का फार्मा उद्योग 2024 तक 65 अरब डॉलर और 2030 तक 120 अरब डॉलर की ऊंचाई तक पहुंचने की संभावना रखता है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि भारत कोरोना-काल में फार्मा और मेडिकल सेक्टर की कई वस्तुओं का बड़ा उत्पादक और नया निर्यातक देश बन गया है।

दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के नए सोपान

भारत दुनिया में पीपीई किट का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, जिसकी दैनिक उत्पादन क्षमता प्रतिदिन पांच लाख से अधिक है। इसी तरह देश में बहुत कम समय में वेंटिलेटर की स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़कर तीन लाख प्रति वर्ष हो गई है।

देश ने एन-95 मास्क के उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता हासिल की है। भारत सर्जिकल मास्क, मेडिकल गॉगल्स और पीपीई किट का बड़े पैमाने पर निर्यात भी कर रहा है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 के दौर में चिकित्सकीय शोध और टीका बनाने में भी भारत की भूमिका अहम हो गई है। भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं। दुनिया में टीका बनाने के लिए ख्याति प्राप्त पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई), भारत बायोटेक, जाइड्स कैडिला जैसी औषधि कंपनियां वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल कर रही हैं। सरकार का मानना है कि जनवरी 2021 तक देश में एक से ज्यादा कंपनियों की वैक्सीन उपलब्ध होगी और जुलाई 2021 तक देश के 20-25 करोड़ लोगों को टीके लग चुके होंगे।

दुनिया की फार्मेसी बना भारत, 72 देशों को मेड-इन-इंडिया वैक्सीन की आपूर्ति

विदेशमंत्री एस जयशंकर ने पिछले दिनों राज्यसभा और लोकसभा में बताया कि वैश्विक महामारी के बीच विभिन्न देशों तक पहुंच ने ‘दुनिया की फार्मेसी’ के तौर पर भारत की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है। उन्होंने बताया कि हमने 72 देशों को मेड-इन-इंडिया वैक्सीन की आपूर्ति की है। देश की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल पर उन्होंने कहा कि यह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी परंपरा पर आधारित है। यह भारत की बढ़ती क्षमताओं का मानवता के लिए उपयोग करने की सरकार की सोच पर आधारित है। कैरिबियाई देशों से लेकर प्रशांत द्वीपीय देशों तक संदेश स्पष्ट है कि भारत के प्रधानमंत्री न केवल इन सभी देशों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़ना चाहते हैं बल्कि ठोस विकास कार्यक्रमों को समर्थन देना चाहते हैं।

हमारी क्षमताओं के देश से बाहर भी फायदे भी हुए। भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, पैरासिटामोल एवं अन्य दवाओं की जरूरतों को पूरी दुनिया में पूरा करने का प्रयास किया। कोविड-19 महामारी जैसी वैश्विक चुनौती के दौर में भी प्रधानमंत्री मोदी ने ‘प्रगाढ़ मित्रता’ को लेकर जो कदम उठाए उससे भारत का दुनिया में कद ऊंचा हुआ है और देश के प्रति सद्भाव की भावना पैदा हुई। इस दौरान दुनिया ने न सिर्फ भारत की ‘लोक केंद्रित कूटनीति’ और निस्वार्थ सेवाभाव को देखा बल्कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को लेकर उसकी क्षमता का भी पता लगा।‘- विदेशमंत्री एस जयशंकर

पीएम मोदी के नेतृत्व में नवाचार ने भारत को बनाया ‘दुनिया की फार्मेसी’

कोरोना महामारी के दौरान भारत ने न केवल नवाचार किया, बल्कि तेजी से महत्वपूर्ण दवाओं को दुनिया के कई हिस्सों में वितरित भी किया। भारत कम लागत वाली जेनेरिक, वैक्सीन और सस्ती दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जो मूल्य और मात्रा दोनों स्थितियों में दवाओं के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। इतना ही नहीं भारत के पास खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) अनुमोदित दवा निर्माण संयंत्रों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है।

COVID-19 महामारी ने न केवल भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग की ताकत को उजागर किया है, बल्कि इस क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा दिया है। निवेशकों के लिए आकर्षक अवसरों के साथ, भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र विदेशी व्यापार का एक प्रमुख घटक है। भारत दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए सस्ती और कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है और संयुक्त राज्य खाद्य और औषधि प्रशासन (USFDA) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अच्छे विनिर्माण आचरण (GMP) का संचालन करता है।

पीएम नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का नतीज धीरे-धीरे परिलक्षित हो रहा है। आज भारत दवा क्षेत्र में पूरी दुनिया में परचम लहरा रहा है और आने वाले दिनों में फार्मा सेक्टर न सिर्फ देश को और भी गौरवान्वित करेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से मजबूत भी करेगा और विकास व रोजगार के नए अवसर बनाएगा।

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