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ईवीएम से छेड़छाड़ के दावे निकले झूठे

EVM Fake Claims Election Commission

हाल ही में, सोशल मीडिया पर कई वायरल पोस्ट और वीडियो जारी किए गए हैं जो खूब वायरल भी हुए हैं, इनमें दावा किया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में हेरफेर किया जा रहा है। हालांकि, जैसे ही इन वीडियो ने सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू किया, भारतीय चुनाव आयोग और अधिकारी तमाम तथ्यों और सबूतों के साथ सामने आए हैं, और इस तरह के वीडियो या कथन या पोस्ट की सामग्री का खंडन  किया हैं।

हम यहां सोशल मीडिया पर ईवीएम के बारे में संभावित भ्रामक दावे और उन पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पाठकों तक पहुंचा रहे हैं।

चंदौली, उत्तर प्रदेश

दावा

उत्तर पद्रेश के चंदौली से एक वीडियो सामने आया जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई कि किस तरह से चुनाव के एक दिन बाद ईवीएम को तय स्टोर रूम में रखने के लिए लाया गया।

सच

दरअसल एक दिन बाद लाए गए ईवीएम वे थीं जिनका उपयोग चुनाव के लिए नहीं किया गया। इन्हें हम रिजर्व ईवीएम कह सकते हैं। चुनाव आयोग इसलिए अतिरिक्त ईवीएम को चुनाव बूथ पर भेजता है ताकि खराब होने वाली मशीनों को तत्काल दूसरी मशीनों से बदला जा सके। एक दिन बाद वे ही रिजर्व ईवीएम वापस लाई गई, ना कि वो ईवीएम जिन्हें चुनाव में प्रयोग किया गया था ।

नीचे दी गई पत्रावली, जिसके जरिए सभी उम्मीदवारों को यह सूचित किया गया है कि रिजर्व ईवीएम कहां रखी जाएंगी, से स्पष्ट है कि चुनाव ड्यूटी में लगे जिले के सभी प्रमुख अधिकारियों ने चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का विधिवत पालन किया।

चंदौली लोकसभा के रिटर्निंग ऑफिसर के इस बयान से स्पष्ट होता है कि चुनावों में इस्तेमाल किए गए ईवीएम और वीवीपैट को उम्मीदवारों या उनके एजेंटों की उपस्थिति में स्ट्रांग रूम में बंद कर दिया गया था। उसके बाद इनकी रखवाली की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंप दी गई थी। इन रिजर्व ईवीएम और वीवीपैट के ले जाने के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता वहां पहुंच गए। परन्तु जैसे ही उन्हें सच से अवगत कराया गया, उन्होंने अपना संतोष प्रकट किया।

चंदौली के रिटर्निंग ऑफिसर का बयान

समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष द्वारा लिखित में दिया गया संतुष्टि पत्र

गाजीपुर, उत्तरप्रदेश

दावा

गाजीपुर से महागठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अंसारी को तेजी से फैल रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है, जो यह दावा कर रहे हैं कि ईवीएम बदली जा रही है।

सच

गाजीपुर के रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरे तथ्य के साथ अफजाल अंसारी के दावे का जवाब दिया है। इस वीडियो में उनका यह बयान है।

इस स्पष्टीकरण से साफ है कि अफजल अंसारी चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के विपरीत वोट के लिए इस्तेमाल ईवीएम को देखने के लिए कई एजेंट चाहते थे। अधिकारियों ने स्ट्रांग रूम के पास भीड़भाड़ की आशंका को देखते हुए इससे इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में अफजल अंसारी ने चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों पर सहमति व्यक्त की और अपने विरोध को खत्म कर दिया।

झाँसी, उत्तर प्रदेश

दावा

झाँसी में एक और वीडियो सामने आया जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि बिना उम्मीदवारों की जानकारी के रिजर्व ईवीएम इधर से उधर की जा रही हैं।

सच

यहाँ झाँसी के रिटर्निंग ऑफिसर का बयान है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि चुनाव में इस्तेमाल की गई सभी ईवीएम को मतदान दलों के वापस आने के बाद पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में स्ट्रांग रूम में रखा गया था। इसमें चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का विधिवत पालन किया गया है। रिजर्व ईवीएम को सुरक्षित व मजबूत कमरों में रखे जाने की प्रक्रिया को लेकर कुछ भ्रम था। लेकिन, रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उम्मीदवारों को दिशानिर्देशों के बारे में सूचित कर दिया गया था।

सारण, बिहार

दावा

राष्ट्रीय जनता दल ने यह दावा किया कि ईवीएम से भरी एक गाड़ी सारण लोकसभा क्षेत्र के स्ट्रांग रूम के पास देखी गई।

सच

सारण जिले के अधिकारियों ने बयान जारी कर यह स्पष्ट किया कि जो ईवीएम चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए ले जाई गई थीं उन्हें ही वापस तय स्टोररूम में रखा गया।

निष्कर्ष

स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर सभी समाचार और वीडियो जो यह दावा कर रहे हैं कि ईवीएम की अदला-बदली हो रही है या उनके साथ कोई  छेड़छाड़ की जा रही है, बिल्कुल झूठे हैं। ये सारे बनावटी कथन प्रतीत हो रहे हैं, खासकर एग्जिट पोल के रुझानों के आने के बाद – यह देश की पूरी चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश है।

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