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किसानों को जोड़ते हुए तेजी से बढ़ रहा है ई-नाम

e-NAM growing fast

जुलाई के पहले सप्ताह में केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय द्वारा लोक सभा में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार 30 जून, 2019 तक 1.64 करोड़ किसान और 1.24 लाख व्यापारी ई-नाम के साथ रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

मंत्रालय के आकड़ों के अनुसार जितने भी किसानों ने ई-नाम के साथ रजिस्ट्रेशन कराया है उनमें से 49 प्रतिशत किसान इस डिजिटल प्लेटफार्म का लाभ उठा चुके हैं। और अधिक संख्या में किसानों को इस प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए सरकार कदम उठा रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में अमूमन 26 करोड़ 31 लाख लोग ऐसे हैं जो खेती से जुड़े हैं। उनमें 11.89 करोड़ किसान हैं तो 14.43 करोड़ लोग खेतिहर मजदूर।

ई-नाम यानि नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट। यह किसानों के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां वे अपनी उपज देश भर में ऑनलाइन किसी भी कृषि बाजार में बेच सकते हैं। ई- नाम मंडी के साथ ही प्रयोगशाला लगा होता है जिसमें माइक्रोस्कोप, ग्रेड बताने वाली मशीन, मॉयस्चर चेकिंग मशीन आदि लगी होती हैं ताकि किसानों की फसल की गुणवत्ता उनकी ग्रेडिंग और उनकी छटाई तुरंत हो सके। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ तुरंत प्राप्त हो जाता है। ई-नाम 2016 में शुरु किया गया था।

आकड़ों से स्पष्ट है कि ई-नाम धीरे धीरे पूरे देश के किसानों को एक प्लेटफार्म पर ला रहा है। भले ही सभी राज्य एक जैसा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ का आकड़ा काफी उत्साहबर्द्धक हैं जहां ई-नाम से रजिस्टर्ड 91 प्रतिशत किसानों ने इसका लाभ उठाया है। तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के 80 प्रतिशत से अधिक किसानों ने ई-नाम प्लेटफार्म पर अपनी उपज बेची है। बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में ऐसे परिणाम अभी नहीं आ सके हैं। लेकिन उत्तरप्रदेश ऐसा राज्य बन गया है जहां  ई-नाम से सबसे अधिक किसान जुड़े हैं।

ई-नाम के प्लेटफार्म से कृषि व्यावसाय कितना आगे बढ़ गया है यह इन आकड़ों से पता चलता है। अभी तक ई-नाम पोर्टल से 2,58,76,015 मिलियन टन कृषि उपजों की बिक्री हो चुकी है। रूपए में देखें तो कुल 71,069 करोड़ का व्यवसाय ई-नाम पोर्टल के जरिए हुआ है। भारत सरकार ई-नाम के खाते में राज्यों को वर्ष 2016 से वर्ष 2019 तक 423.23 करोड़ रुपये दे चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने का जो लक्ष्य रखा है उसमें ई नाम की बड़ी भूमिका है। सरकार की उम्मीद के मुताबिक ई-नाम से किसान तेजी से जुड़ रहे हैं और उसका लाभ उठा रहे हैं।

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