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पहले कहते थे लोक सभा चुनाव के बाद राम मंदिर पर फैसला हो और अब कहते हैं कि मामला लम्बा चलना चाहिये

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राम मंदिर मामले को सुप्रीम कोर्ट गंभीरता से रोजाना सुनवाई करके अपना निर्णय देना चाहती है, लेकिन इस राह में कोई न कोई व्यवधान पैदा हो ही जाता है। क्या वाकई में राम मंदिर मुद्दे पर कोई पेंच फंस रहा है या जानबूझकर सोची-समझी साजिश के तहत पेंच फंसाया जा रहा है? इस लेख में राम मंदिर के रुकावटों को खंगालने की कोशिश की गई है।

रोजाना सुनवाई पर बनी थी बात

मध्यस्थता के जरिए विवाद का कोई हल निकालने का प्रयास असफल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया। 1 अगस्त को मध्यस्थता समिति ने सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में फाइनल रिपोर्ट पेश की थी और सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि मध्यस्थता समिति के जरिए मामले का कोई हल नहीं निकाला जा सका है। मामले की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए शुक्रवार को एक नया फैसला लिया  कि अब सप्‍ताह के पांचों दिन अयोध्‍या जमीन विवाद मामले की सुनवाई की जाएगी।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ‘लंबे वक्त’ तक चलाना चाहते हैं केस

मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने मामले में पांच दिन सुनवाई किए जाने पर आपत्ति जताई है। राजीव धवन का कहना है कि यह सिर्फ एक हफ्ते भर का मामला नहीं है बल्कि लंबे समय तक चलने वाला मामला है। धवन ने कहा कि हमें दिन रात अनुवाद के कागज पढ़ने और अन्य तैयारियां करनी पड़ती हैं। राजीव धवन ने कहा कि इस मामले में इस तरह सुनवाई नहीं होनी चाहिए।

कपिल सिब्बल और राजीव धवन पहले भी डाल चुके हैं अडंगा

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर मामले की सुनवाई जुलाई 2019 तक यानी  लोकसभा चुनाव 2019 के बाद तक टालने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड का पक्ष रखते हुए कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि राम मंदिर मामले की सुनवाई को जुलाई 2019 तक टाल दिया जाए, क्योंकि मामला राजनीतिक हो चुका है। कपिल सिब्बल और राजीव धवन की ओर से कोर्ट में दलील दी गई थी कि इस मामले की जल्द सुनवाई सुब्रमण्यम स्वामी की अपील के बाद शुरू हुई, जो कि इस मामले में कोई पार्टी भी नहीं हैं। सिब्बल ने कहा था कि कोर्ट को देश में गलत संदेश नहीं भेजना चाहिए, बल्कि एक बड़ी बेंच के साथ मामले की सुनवाई करनी चाहिए।

राजीव धवन को कोर्ट से पहले भी पड़ चुकी है फटकार

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू होते ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा कि क्या हमें पर्याप्त समय मिलेगा? राजीव धवन के हस्तक्षेप करने पर सुप्रीमकोर्ट ने फटकार लगाई और कहा कोर्ट की मर्यादा का ख्याल रखें। सीजेआई ने कहा कोर्ट आपका पक्ष भी सुनेगा। सीजेआई ने साफ कहा कि ये कोर्ट में बर्ताव करने का सही तरीका नहीं है।

विहिप कह रही है अयोध्या मामले में देरी कर रही कुछ पार्टियां

अयोध्या आंदोलन में सबसे आगे रहे विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को लगता है कि कुछ पार्टियों की वजह से इस विवाद का निपटारा नहीं हो पा रहा है। विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल का कहना था कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय को कुछ वर्गों द्वारा की जा रही देरी की रणनीति से निपटने की आवश्यकता होगी।

प्रधानमंत्री मोदी भी देश को राम मंदिर मामले में जानबूझकर विलम्ब कराये जाने के षड्यंत्रों के विषय में सचेत कर चुके हैं

25 नवंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान कांग्रेस पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में अवरोध उत्पन्न करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में देर करने की नीति अपनाने और न्यायाधीशों को महाभियोग से डराने का खतरनाक खेल खेलने का आरोप लगाया था और जिस तरह से रोजाना सुनवाई से बचकर सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन केस को लंबे समय तक खींचना चाहते हैं और कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल अपनी प्रतिक्रियाएं देते आए हैं, उससे तो यही लगता है कि राम मंदिर की राह में रोड़े जान-बूझकर पैदा किए जा रहे हैं।

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