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सपा-बसपा के ‘भ्रष्टाचारियों’ की अब खुल रही है कलई

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उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा ने बारी-बारी से कई वर्षों तक शासन किया। दोनों पार्टियों के शासनकाल घोटालों के कारण खूब चर्चा में रहे है। और दोनों ही पार्टियों की सरकारें एक दूसरे के तथाकथित भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एक्शन लेने से कतराती रही।

इस लेख में यूपी के उन चर्चित बेईमान धनवानों का जिक्र है, जिन्होंने सरकार को हजारों करोड़ का चूना लगाकर भ्रष्टाचार की जमीन पर अपना महल तैयार किया।

आजम खान भूमाफिया घोषित

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व सांसद आजम खां को रामपुर में भू माफिया घोषित किया गया है। एक शैक्षिक संस्थान बनाने की आड़ में किसानों की जमीनें कब्जाने के आरोप में फंसे आजम खां को प्रशासन ने भूमाफिया घोषित किया । शासनादेश के मुताबिक ऐसे लोगों को भूमाफिया घोषित किया जाता है, जो दबंगई से जमीनों पर कब्जा करने के आदी हैं। जो लोग अवैध कब्जे को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं और जिनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज है । उनका ही नाम उत्तर प्रदेश एंटी भू माफिया पोर्टल पर दर्ज कराया जाता है। सरकार इसकी निगरानी करती है। आजम खां पर आगे की कार्रवाई की जा रही है ।

आजम खां के खिलाफ एक सप्ताह के दौरान जमीन कब्जाने के 13 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें एक मुकदमा 12 जुलाई को प्रशासन की ओर से दर्ज कराया गया, जिसमें कहा गया है कि आलिया गंज के 26 किसानों ने जमीन कब्जाने का आरोप लगाया है।

आनंद कुमार का ‘आनंद खजाना’

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में नंबर दो की हैसियत रखने वाले मायावती के भाई आनंद कुमार पर आयकर विभाग ने पहली बार शिकंजा कसा है। दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) के आदेश पर नोएडा में उनके व उनकी पत्नी की सात एकड़ की एक व्यावसायिक संपत्ति को जब्त किया है । बेनामी संपत्ति कानून के तहत नोएडा में यह पहली बड़ी कार्रवाई है। सरकारी एजेंसियों का दावा है कि 400 करोड़ की इस संपत्ति के दस्तावेजों में तो कई मालिक हैं लेकिन शुरुआती जांच में केवल आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता लाभप्रद मालिक हैं। वह प्राधिकरण की नौकरी छोड़ने के बाद कुछ ही सालों में धन कुबेर बन गए।

आनंद कुमार ने 1994 में जूनियर अस्सिटेंट से नोएडा विकास प्राधिकरण में अपनी नौकरी की शुरुआत की थी और उन्होंने यहां पर करीब छह साल तक नौकरी की। वर्ष 1999-2000 में उन्होंने प्राधिकरण से नौकरी छोड़ दी थी और वह अन्य कारोबार करने लगे थे। जांच एजेंसियों का कहना था कि वर्ष 2007 में आनंद के पास करीब 7.5 करोड़ की संपत्ति थी। लेकिन सात साल में उनकी संपत्ति बढ़कर 1,316 करोड़ रूपये की हो गई थी, उनकी कंपनियों के मुनाफे में 18 हजार प्रतिशत का उछाल आया। मायावती ने उन्हें 23 जून 2019 को बसपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया था ।

भ्रष्टाचार के महारथी यादव सिंह

नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह की गिरफ्तारी की खबर सुर्खियों में रही। यूपी में चाहे सत्ता सपा की रही या बसपा की, यादव सिंह का सिक्का चलता रहा। 2015 से यादव सिंह पर इनकम टैक्स का शिकंजा कसता रहा, लेकिन न तो नोएडा अथॉरिटी ने और न ही तत्कालीन अखिलेश सरकार ने कोई बड़ा कदम उठाया। आखिर में जांच सीबीआई को सौंपी गई तो यादव सिंह की कुर्सी हिलने लगी और 3 फरवरी 2016 को उन्हें गिरफ्तार कर ही लिया गया।

900 करोड़ की संपत्ति के मालिक यादव सिंह पर इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा था। छापेमारी में 2 किलो सोना, 100 करोड़ के हीरे, 10 करोड़ कैश के अलावा कई दस्तावेज मिले थे। 12 लाख रुपये सालाना की सैलरी पाने वाले यादव सिंह और उनका परिवार 323 करोड़ की चल अचल संपत्ति का मालिक बन बैठा। आयकर विभाग ने खुलासा किया था कि यादव सिंह ने मायावती सरकार के दौरान अपनी पत्नी कुसुमलता, दोस्त राजेन्द्र मिनोचा और नम्रता मिनोचा को डायरेक्टर बनाकर करीब 40 कंपनी बना डाली और नोएडा अथॉरिर्टी से सैकडो बड़े भू-खण्ड खरीदे। बाद में उन्हें दूसरी कंपनियों को फर्जी तरीकों से बेच दिया।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पर भी सवाल उठा क्योंकि इन्हीं के राज में यादव सिंह पर 954 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले के आरोप लगे थे। हैरत है, इन सब की नाक के नीचे यादव सिंह ने 60 कंपनियां खड़ी कर लीं, बंगले बना लिए, करोड़ों का कैश जमा कर लिया था।

गायत्री प्रजापति का गोलमाल

सपा प्रमुख मुलायम सिंह के खासमखास रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ के बीच एक शिकायतकर्ता ने ईडी को 1717 पेज के दस्तावेज उपलब्ध कराया है, जिसमें दावा किया गया है कि गायत्री प्रजापति के पास 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति है।

कृष्ण कुमार सिंह नाम के इस व्यक्ति की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेज में कहा गया है कि 194 लोगों के नाम से गायत्री ने ये संपत्ति अर्जित की है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गायत्री ने 17 अलग-अलग कंपनियां बनाकर उसमें अवैध खनन से हुई काली कमाई का निवेश किया।  कंपनियां गायत्री के रिश्तेदारों और उनके करीबियों के नाम पर हैं।

बाबू सिंह कुशवाहा का ‘स्वास्थ्य भ्रष्टाचार ’

बसपा शासनकाल में वर्ष 2010 में एनआरएचएम योजना से हजारों करोड़ रुपए का घोटाला उजागर हुआ था। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और विधान परिषद सदस्य राम प्रसाद जायसवाल को पूछताछ के बाद मार्च 2012 में गिरफ्तार कर लिया था। इन दोनों लोगों को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला अस्पतालों को आवंटित राशि के दुरुपयोग के मामले में गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के पूर्व परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के लखनऊ स्थित आवास पर छापे भी मारे थे। इस मामले में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली और हरियाणा में भी कई जगहों पर छापे की कार्रवाई की जा चुकी है। सीबीआई ने इस घोटाले में जो प्राथमिकी दर्ज कराई थी, उसमें बतौर अभियुक्त बाबू सिंह कुशवाहा का नाम भी शामिल है। बाबू सिंह कुशवाहा कभी बसपा के संस्थापक कांशी राम के काफी करीबी माने जाते थे और बाद में मायावती ने भी उनको खूब बढ़ावा दिया।

इन भ्रष्टाचारियों पर लगातार कार्रवाई हो रही है, लेकिन ये विचारणीय है कि सपा-बसपा की सरकारों में ही आखिर क्यों इतना घोटाला-भ्रष्टाचार हुआ।

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