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कांग्रेस में महिलाओं के साथ बर्तावः सूची बहुत लंबी है!

Congress misbehave women

हाल ही में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने कई ट्वीट में यह बताया कि किस तरह पिछली कांग्र्रेस की सरकारों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व एक दम कम होता था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी की बात कर रही थीं।

जवाहरलाल नेहरू के पहले मंत्रिमंडल में सिर्फ एक महिला कैबिनेट मंत्री राजकुमारी अमृत कौर थीं, जबकि नेहरू के दूसरे कार्यकाल में किसी भी महिला को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया गया। अपने तीसरे कार्यकाल में भी नेहरू ने सिर्फ एक महिला को केबिनेट मंत्री बनाया।

इंदिरागांधी के कार्यकाल में किसी भी महिला को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया गया और राजीव गांधी की सरकार में  में भी केवल एक महिला को ही कैबिनेट मंत्री थी। जबकि इसके ठीक विपरीत नरेन्द्र मोदी की सरकार में छह महिलाओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।

ये सारी तथ्य कांग्रेस के बारे में क्या साबित करते हैं? यही न कि कांग्रेस नहीं चाहती कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की कोई भूमिका हो। बल्कि सच्चाई तो यह है कि यदि कांग्रेस पार्टी में भी किसी स्तर पर कोई महिला नेत्री निर्णय प्रक्रिया में शामिल है तो उन्हें भी बढ़ावा देने के बजाय कांग्रेस के ही नेताओं के हाथों उन्हें अपमानित होना पड़ता है।

ऐसे कई अवसर आएं , जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने महिला विरोधी या उनके सशक्तिकरण के खिलाफ फैसले लिए।

राजीव गाँधी

राजीव गाँधी की सरकार ने महिलाओं की समानता के अधिकार को कम करने वाला सबसे बड़ा चर्चित फैसला लिया। शाहबानो केस में जान बूझ कर महिलाओं के अधिकार को दरकिनार कर दिया गया। सत्तारूढ़ राजीव गाँधी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुस्लिम महिलाओं के तलाक के बाद गुजाराभत्ता देने के फैसले को बदलने के लिए संसद से एक अलग कानून पास कराया।

राहुल गाँधी

वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने महिलाओं के बारे एक भद्दी टिप्पणी की। उन्होंने महिलाओं के पोशाक पर एक बेहूदा सवाल किया। पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गाँधी ने यह प्रश्न किया कि क्या किसी ने संघ की शाखा में किसी महिला को हाफ पैंट पहन कर जाते हुए देखा है। राहुल गाँधी ने महिला सशक्तिकरण को महिला के पोशाक से जोड़ कर देखने की अपनी कुत्सित मानसिकता का परिचय दिया।

कपिल सिब्बल

यह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ही हैं जिन्होंने मोदी सरकार द्वारा तीन तलाक के चलन को खत्म करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के मुकदमें की पैरवी की थी।

दिग्विजय सिंह

कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी ही एक सहयोगी मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध एक घृणित लिंगी कटाक्ष किया। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन को ‘सौं टंच माल’ कहा।

संजय निरूपम

एक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरूपम ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के विरुद्ध लिंगी टिप्पणी की। संजय निरूपम ने उनको डांसर कहा था।

सुशील कुमार शिंदे

देश के गृहमंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने राज्य सभा में एक बहस के दौरान सपा सांसद जया बच्चन से कहा था ‘देखिए बहन यह गंभीर विषय है, यह कोई फिल्मी विषय नहीं है।’ बाद में शिंदे को इसके लिए माफी भी मांगनी पड़ी थी।

शीला दीक्षित

जब पत्रकार सौम्या विश्वनाथन का दिल्ली में 2008 में खून हुआ था तब उस समय की मुख्यमंत्री शीला दिक्षित ने इसका दोष सौम्या पर ही डाल दिया था। शीला दिक्षित ने कहा था कि महिलाओं को ज्यादा ‘धृष्टता’ नहीं करनी चाहिए।

शीला दिक्षित के शब्द थे  ‘सुबह तीन बजे तक अकेले उस शहर में जहां लोग यह सोचते हैं…आप जानते हैं न…आपको इनती धृष्टता नहीं करनी चाहिए’।

धर्मवीर गोयत

2012 में हरियाणा के हिसार जिला के कांग्रेस प्रवक्ता धर्मवीर गोयत ने पत्रकारों से कहा – 90 प्रतिशत बलात्कार के मामले में आपसी सहमति होती है।

धर्मवीर गोयत ने कहा- 90 प्रतिशत बलात्कार का मामला लड़का लड़की के बीच आपसी सहमति का होता है। लड़की – लड़के में प्यार होता है और लड़की बिना वह जाने कि लड़का अपराधी मानसिकता का हो सकता है, लड़के के साथ चल देती है। बलात्कार में राज्य का कोई दोष नहीं होता। वास्तव में यह आपसी सहमति के आधार पर सेक्स होता है।

ऊपर दिए गए उदाहरण से सब कुछ स्पष्ट हैं कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं का रवैया महिला विरोधी रहा हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि आखिर कांग्रेस पार्टी द्वारा संचालित सरकारों में महिलाओं की न्यूनतम उपस्थिति क्यों थी। इसके विपरीत, पीएम मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में न सिर्फ कई महिलाएं हैं, बल्कि उन्हें रक्षा और विदेश मंत्रालय जैसे अत्यधिक महत्वपूर्ण विभाग भी दिए गए हैं। विडंबना ही है कि कांग्रेस अध्यक्ष अनुचित रूप से भाजपा पर ही महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हैं।

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