Explained National

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बाद भारत की आपदा प्रबंधन पर एक और वैश्विक पहल

coalition for disaster resilient infrastructure

स्वच्छ भारत हो या बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, जल संचय या फिर मौजूदा सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान, पीएम मोदी के आह्वान पर पूरा भारत एक हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सौर ऊर्जा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्र में दुनिया की अगुआई कर रहा है। कभी भारत वैश्विक संगठनों का सदस्य मात्र बनता था और आज उनका आह्वान कर रहा है।

प्राकृतिक आपदा प्रबंधन का वैश्विक संगठन

अमेरिका के ह्यूस्टन में ऐतिहासिक कार्यक्रम ‘हाउडी मोदी’ के बाद प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे। न्यूयॉर्क में जलवायु परिवर्तन पर यूएनएसजी के शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपदाओं का सामना करने में सक्षम नई व्यवस्था की स्थापना के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की शुरुआत कर रहा है। उन्होंने विभिन्न देशों से आग्रह किया कि वह आधारभूत ढांचे के संरक्षण के आपदा में नष्ट होने की स्थिति में पुनःनिर्माण पर केन्द्रित इस गठबंधन में शामिल हों।

आपदा जोखिम न्यूनीकरण के महासचिव के विशेष प्रतिनिधि  मामी मिज़ुटोरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आपदा रोधी अवसंरचना के लिए वैश्विक गठबंधन (ग्लोबल कोएलिएशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर) शुरू करने का स्वागत किया।

द कोलिएशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर का महत्व

द कोलिएशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) एक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी है जो विकसित और विकासशील देशों को जलवायु और आपदामुक्त लचीले बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग प्रदान करेगी। UNDRR द्वारा समर्थित इस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का सचिवालय नई दिल्ली में स्थित होगा। इस गठबंधन में शामिल देश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आपसी सहयोग करेंगे। इससे न सिर्फ जानकारी का आदान प्रदान होगा, बल्कि तकनीकी सहायता के साथ-साथ आपदा प्रबंधन क्षमताओं और प्रभावी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी वृद्धि होगी। ये संगठन प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने के अलावा मानवजनित आपदाओं से निपटने में भी सक्षम और अभ्यस्त होगा।

ये संगठन एक परिवर्तनकारी पहल है

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आपदा प्रतिरोधी संरचना के लिए गठबंधन एक परिवर्तनकारी पहल है, जो दुनिया भर के शहरों, समुदायों और सरकारों को आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में मदद करेगी। इसकी सहायता से दुनिया भूकंप, सुनामी,  बाढ़ और तूफान के प्रभाव को कम करने में समर्थ होगी। इससे किफायती आवास,  स्कूलों,  स्वास्थ्य सुविधाओं और सार्वजनिक उपयोगिताओं को किसी भी प्राकृतिक या मानव निर्मित खतरे की संभावना से बचने के लिए आवश्यक मजबूत मानकों के अनुरूप बनाया जा सकता है।

2050 तक दुनिया की 68% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहेगी। जाहिर सी बात है इससे पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा। अगर हम पहले ही आपदा प्रबंधन की तैयारी रखते हैं तो निम्न और मध्यम आय वाले देश आपदाओं से प्रभावित हुए बिना सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

भारत से लाभ, भारत को लाभ

भारत भौगोलिक दृष्टि से चौतरफा प्राकृतिक आपदा संभावित क्षेत्र से घिरा हुआ है। हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन, भूकंप, नदियों के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा, समुद्री इलाके में तूफान और चक्रवात, शेष भारत में सूखे की स्थिति बनी रहती है। इन चुनौतियों से निपटने में भारत सक्षम हुआ है।

बीते वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ और हाल ही में उड़ीसा में चक्रवात से निपटने में भारत की प्रशंसा पूरी दुनिया में हुई है। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की योग्यताओं का लाभ पूरी दुनिया को मिलेगा।

ऐसे में भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में दुनिया भर के देशों को सहयोग गठबंधन में शामिल होने के लिए आह्वान करना और उनका नेतृत्व करना मानवता व कूटनीति दोनों दृष्टि से मील का पत्थर हैं।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भी है भारत की पहल

भारत की पहल पर शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में 80 देश शामिल हो चुके हैं। इसका शुभारंभ भारत व फ्रांस द्वारा 30 नवंबर 2015 को पेरिस में किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सर्वप्रथम इसकी घोषणा लंदन के वेंबली स्टेडियम में अपने उद्बोधण के दौरान की थी। यह संगठन कर्क व मकर रेखा के बीच स्थित राष्ट्रों को एक मंच पर ला रहा है। ऐसे राष्ट्रों में धूप की उपलब्धता ज्यादा है। संगठन में शामिल सभी देश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। इस प्रयास को वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिदृश्य में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस संगठन का अंतरिम सचिवालय राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान, गुड़गांव में बनाया गया है।

भारत के  इन अंतरराष्ट्रीय पहल की सराहना पूरी दुनिया में हो रही है और ये 130 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का विषय है।

Share