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सीएए पर पीएम मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री और राम मनोहर लोहिया के बयानों से विपक्ष की बोलती बंद की

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6 फरवरी 2020 को  पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान संसद को संबोधित किया। कई विपक्षी सदस्यों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएएए का मुद्दा उठाया गया था। पीएम मोदी ने अपने अंदाज में विपक्ष को करारा जवाब दिया। पीएम मोदी ने अतीत में दिए उनके ही नेताओं के बयानों को पढ़कर विपक्ष को आईना दिखाया।

3 अप्रैल 1964 का दिन, देश के प्रधानमंत्री थे जवाहरलाल नेहरू। श्रीनगर के हजरतबल श्राइन से कथित रूप से पैगंबर मोहम्मद के बाल चोरी होने की अफवाह पर पूर्वी पाकिस्तान के डक्का में दंगे भड़क गए थे। लाखों हिंदू शरणार्थी सीमा पार कर भारत में दाखिल हुए। भारतीय संसद इस मुद्दे पर मूकदर्शक नहीं बन सकती थी और इस पर बहस हुआ।

वामपंथी झुकाव वाले क्रांतिकारी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य त्रिदेब कुमार चौधरी ने एक प्रस्ताव रखा कि भारत को पाकिस्तान के सताए हुए अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर गौर करना चाहिए। 3 अप्रैल को लाल बहादुर शास्त्री और राम मनोहर लोहिया जैसे बड़े नेताओं ने इस मुद्दे पर चर्चा की।

लाल बहादुर शास्त्री का कथन

जहां तक पूर्वी पाकिस्तान का ताल्लुक है उसका यह फैसला मालूम होता है कि वहां से गैर मुस्लमान जितने हैं सब निकाल दिए जाएं। वह एक इस्लामिक स्टेट है। एक इस्लामिक स्टेट के नाते वह यह सोचते हैं की वहां इस्लाम को मानने वाले ही रह सकते हैं और गैर इस्लामी लोग नहीं रह सकतेलिहाजा, हिन्दू निकाले जा रहे हैं, ईसाई निकाले जा रहे हैं। मैं समझता हूं की करीब 37 हज़ार से ऊपर ईसाई आज हिंदुस्तान में आ गए हैं। बौद्ध वहां से निकाले जा रहे हैं।”

इस बयान द्वारा पाकिस्तान के पूर्वी विंग की कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई।

तब भारत क्या कर रहा था? आज जब केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारें भारत में शरणार्थियों को बसाने का विरोध कर रही हैं, शास्त्री जी ने 1964 में राज्य सरकारों के आचरण पर एक दिलचस्प अंतर्दृष्टि दी, जिनमें से अधिकांश कांग्रेस शासित थीं।

उन्होंने कहा था-

हमारी तमाम राज्य सरकारों ने इसको राष्ट्रीय प्रश्न के रूप में माना है। इसके लिए हम उनको बधाई देते हैं और ऐसा करते हुए हमें बड़ी ख़ुशी होती है। क्या बिहार और क्या उड़ीसा, क्या मध्य प्रदेश और क्या उत्तर प्रदेश, या महाराष्ट्र या आंध्र, सभी सूबों ने, सभी प्रदेशों ने भारत सरकार को लिखा है कि वे इनको अपने यहां बसाने के लिए तैयार हैं। किसी ने कहा है पचास हज़ार आदमी, किसी ने कहा है पंद्रह हज़ार परिवार, किसी ने कहा दस हज़ार परिवार बसाने की जिम्मेदारी लेने के लिए वो तैयार हैं। 

“अंत में, शास्त्री जी ने त्रिदेब चौधरी द्वारा रखे गए प्रस्ताव में संशोधन किया और संशोधित प्रस्ताव को निम्नानुसार रखा-

इस सदन की यह राय है कि पाकिस्तान के पूर्वी विंग में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन, संपत्ति और सम्मान की असुरक्षा के मद्देनजर, जहां पाकिस्तान के उस हिस्से में उन्हें सभी मानवाधिकारों से वंचित किया जाता है, भारत सरकार को पूर्वी पाकिस्तान से भारतीय संघ में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े लोगों के प्रवास में राहत प्रतिबंधों के अलावा विश्व का ध्यान आकर्षित करने के कदमों पर विचार करना चाहिए। ”

इस प्रकार लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान में सताए गए अल्पसंख्यकों के लिए सहानुभूति और चिंता दिखाई, जिसके उलट आज कांग्रेस सीएए के नाम पर उनका भी विरोध कर रही है।

राम मनोहर लोहिया का कथन- समाजवादियों के लिए एक चेतावनी

राम मनोहर लोहिया भारत की समाजवादी राजनीति के संरक्षक हैं। सपा, बसपा, जदयू, राजद, जेडीएस आदि सभी प्रमुख समाजवादी दलों ने राम मनोहर लोहिया से अपनी वैचारिक प्रेरणा ली है।

1964 में इस पर चर्चा करते हुए राम मनोहर लोहिया ने कहा था-

हिंदुस्तान का मुसलमान जिए और पाकिस्तान का हिन्दू जिए। मैं इस बात को बिलकुल ठुकराता हूं कि पाकिस्तान के हिन्दू पाकिस्तान के नागरिक हैं इसलिए हमें उनकी परवाह नहीं करनी है। पाकिस्तान का हिन्दू चाहे कहीं का नागरिक हो, लेकिन उसकी रक्षा करना हमारा उतना ही कर्त्तव्य है जितना हिंदुस्तान के हिन्दू या मुसलमान की।“

पीएम मोदी ने आज के समाजवादियों को राम मनोहर लोहिया के उन शब्दों का पालन करने का भी सुझाव दिया। इस तरह पीएम मोदी ने सीएए पर बेवजह का विरोध करने वाले विपक्षी पार्टियों की बोलती बंद कर दी।

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