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सभी मोर्चों पर विफल पाकिस्तान फिर विघटन की ओर?

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इमरान खान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने 9 महीने हो गए, इस बीच पाकिस्तान के नौ करम हो गए। हमारा पड़ोसी देश अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, आशंका है कि यदि हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो पाकिस्तान बिखर भी सकता है। पाकिस्तान इस समय सभी मोर्चों पर विफल देश है। अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यह देश इस समय दूसरों की मदद पर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पैकेज पर निर्भर है।

10 जून को पाकिस्तान की जनता के नाम अपने संदेश में इमरान खान ने खुद कहा कि यदि पाकिस्तान की जनता कर नहीं देती, अपनी बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों की घोषणा नहीं करती और बाहर के मुल्कों में रखे पैसे वापस लेकर नहीं आती तो मुल्क चल नहीं सकता। बकौल इमरान खान इस समय पाकिस्तान का कर राजस्व 4 हजार अरब पाकिस्तानी रुपया है उसमें से आधी रकम विदेशी कर्ज की किस्तों में चली जाती है और मुल्क चलाने के लिए सिर्फ 2 हजार अरब रुपये बच जाते हैं, जिससे उनका देश का खर्चा नहीं चल सकता।

जबर्दस्त राजनीतिक संकट

पाकिस्तान की समस्या सिर्फ आर्थिक नहीं है। पाकिस्तान में इस समय जबर्दस्त राजनीतिक संकट भी खड़ा हो गया है। महंगाई चरम पर है, गैस और बिजली के बिल समेत रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। हालात तो यहां तक पहुंच गए हैं कि रमजान के महीने में सरकार को उचित मूल्य की दुकाने जगह जगह खोलनी पड़ी ताकि रोजा रखने वाले अपनी जरूरत के सामान खरीद सकें। विपक्ष इमरान खान की सरकार को ना सिर्फ घेरने की जुगत में लगा है, बल्कि इमरान की सरकार को गिराने की भी तैयारी चल रही है। इमरान खान भी यह जानते हैं कि जनता जब त्राहि त्राहि करे तो विरोध को रोकना आसान नहीं होता। इसलिए इमरान की सरकार वहां नैब के जरिए राजनीतिक विरोधियों को कुचलने में लगी है।

नैब पाकिस्तान की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी है। इसी नैब ने मुस्लिम लीग और पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी के तमाम नेताओं पर मुकदमा दायर कर रखा है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कोट लखपत जेल में पहले से कैद हैं और अब पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी के नेता और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को भी नैब ने गिरफ्तार कर लिया है। मुस्लिम नून लीग के शहबाज शरीफ और उनके बेटे हमजा शरीफ पर भी गिरफ्तारी की तलवारें लटक रही हैं।

इमरान खान की सरकार ने न सिर्फ राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने के लिए नैब का इस्तेमाल किया है बल्कि न्यायपालिका पर भी इसके जरिए दबाव बना दिया है। सरकार ने वहां सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश काजी फैज इसा और सिंध हाई कोर्ट के न्यायाधीश के के आगा के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले दर्ज करा दिए हैं। इन दोनों के खिलाफ किसी व्यक्ति ने शिकायत की और उसको आधार बनाकर इनके खिलाफ मामला दायर कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि इमरान का यह न्यायपालिका से सीधा टकराव पाकिस्तान के लिए अच्छा नहीं होगा।

कर्ज में आकंठ डूबा पाकिस्तान

पाकिस्तान अंदर से पूरी तरह खोखला हो चुका है। इस समय उस पर 30 हजार अरब का कर्ज है। विदेशी मुद्रा का भंडार महज 8 से 10 अरब डॉलर का ही बचा है। कर्ज देने वालों में प्रमुख देश चीन है। इस समय पाकिस्तान का चीन पर 10 अरब डॉलर का कर्ज है जो उसने ग्वादर पोर्ट और सीपैक (पाकिस्तान में चीन द्वारा बनाया जा रहा एक आर्थिक कॉरिडोर) बनाने के लिए दिया है। पाकिस्तान अंदर से इतना टूट चुका है कि उसे अब सिवाय बाहर की दुनिया से पैसे मांगने के कुछ और दिखाई नहीं दे रहा है। पहले सउदी अरब से तीन अरब डॉलर की मदद, फिर चीन से गुप चुप तरीके से कुछ मदद और अब आईएमएफ के साथ अंतिम रूप से सौदे बाजी चल रही है।

आईएमएफ के आगे पाकिस्तान का समर्पण

कहा जा रहा है कि आईएमएफ भले ही 6 अरब डॉलर का एक पैकेज देने के लिए तैयार हुआ है, लेकिन उसकी शर्तें काफी कड़ी हैं। आईएमएफ से बातचीत के बीच में ही पाकिस्तान को अपने वित्त मंत्री असद उमर को हटाना पड़ा। आईएमएफ के दबाव में इमरान ने स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान के गवर्नर तारिक बाजवा को बर्खास्त कर दिया, पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज के सीईओ रिचर्ड मोरिन को भी इस्तीफा देना पड़ा। कहा तो यही जा रहा है कि पैकेज के लिए पास्तिान ने आईएमएफ के सामने सरेंडर कर दिया है।

आईएमएफ फिर भी आसानी से पैकेज देने के लिए तैयार नहीं है। हाल के दिनों में पाकिस्तान की नीतियों में जो बदलाव हुए हैं उससे जो बाते सामने आई हैं उसमें प्रमुख है- पाकिस्तान अपना कर राजस्व हर हाल में बढ़ाएगा। इसके लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम पाकिस्तान को दिए गए हैं। पाकिस्तान सरकार ने 30 जून तक सभी के लिए अपनी संपत्ति की घोषणा को अनिवार्य कर दिया है। इमरान समेत सभी प्रमुख मंत्री बार बार लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि 30 जून तक लोगों ने अपनी संपति और आय की घोषणा नहीं की तो सरकार उनके साथ कोई रियायत नहीं बरतेगी। आईएमएफ की शर्तों में संभवतः वस्तुओं की कीमत पर कोई छूट नहीं देने की भी बात है तभी तो पाकिस्तान में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में लगातार वृद्धि की जा रही है।

आतंक की नीति पाकिस्तान पर ही भारी

पाकिस्तान की यह दुदर्शा जितना भ्रष्टाचार के कारण हुई है उतनी ही आतंकवाद को पनाह देने के कारण भी हुई है। दुनिया में कहीं भी आतंकवाद की कार्रवाई हो पाकिस्तान का कनेक्शन जरूर सामने आता है। यही कारण है पूरी दुनिया में पाकिस्तान को संशय की नजर से देखा जाता है और कोई भी प्रमुख देश पाकिस्तान के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध स्थापित नहीं करना चाहता। अब पाकिस्तान के सामने बड़ी समस्या फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स से अपने को बचाना भी है।

सितंबर में एफएटीएफ पाकिस्तान के मामले की समीक्षा करेगा। यदि पाकिस्तान आतंकवादियों को प्रश्रय और फंड नहीं देने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का पुख्ता सबूत नहीं देता तो उसे ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में भी डाला जा सकता है, फिर उसके बाद पाकिस्तान की हालत और खराब हो सकती है। पाकिस्तान ने भारत के दबाव में हालांकि अजहर मसूद और हाफिज सइद के खिलाफ कुछ कार्रवाई की है, लेकिन अभी भी आतंकवादी संगठनों को वित्तीय मदद पाकिस्तान की ओर से जारी है।

भारत का कड़ा रवैया

भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के प्रति पूरी दुनिया को सचेत ही नहीं किया है, बल्कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ माहौल बनाने में भी बड़ी कामयाबी हासिल की है। 2014 में ही जब से नरेंद्र मोदी की सरकार आई और अजित डोभाल को देश प्रमुख सुरक्षा सलाहकार बनाया गया तब से ही पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत का रवैया आक्रामक रहा है। यह हमने पीछे भी देखा है कि किस तरह भारत पर पाकिस्तान से आए आतंकवादियों के हमले के बाद हमने जवाब दिया है। चाहे उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की बात हो या फिर पुलवामा के बाद एयर स्ट्राइक की।  इसके पहले भारत की नीति इंतजार करने और देखने की थी। चाहे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद ने हमें हजारों जख्म दिए हों।

यहां तक कि मुंबई में 26/11 की घटना के बाद भी हमने संयम बरतने की नीति ही अपनाई, जबकि पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने हमारे सैकड़ों लोगों को मार दिया। अब हम वहां जाकर दुश्मनों को मारने की हिम्मत रखते हैं जहां से वे आतंकवाद को संचालित करते हैं। इतना ही नहीं हमने कूटनीतिक मामले में भी पाकिस्तान को अलग थलग कर दिया है।

पाकिस्तान में हर तरफ विभाजन की आहट

चीन और पाकिस्तान के बीच समझौता ही पाकिस्तान की बर्बादी का सबब बन सकती है, क्योंकि ग्वादर और सीपैक का विरोध पाकिस्तान के भीतर से ही हो रहा है। खास कर बलोचिस्तान के लोगों में इस परियोजना को लेकर भारी असंतोष है। उन्हें लगता है कि उनकी जमीन उनसे हमेशा के लिए छिन जाएगी और अतंतः चीन इस क्षेत्र पर कब्जा कर लेगा। अभी कुछ ही दिन पहले ग्वादर के एक होटल में आतंकवादी हमला हुआ था कहा जाता है कि इस हमले बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने अंजाम दिया था। बलोचिस्तान पहले से ही पाकिस्तान के लिए सिरदर्द रहा है। वहां बलोचिस्तान को आजाद करने की मुहिम वर्षों से चल रही है।

पाकिस्तान में बलोच अलग देश की मांग कर रहे हैं और उसे लेकर आंदोलन चला रहे हैं। उनकी मांगों पर विचार करने या उनके साथ वार्ता करने के बजाय पाकिस्तान आतंकवाद के जरिए उन्हें कुचलने का कुचक्र रचना शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने बलोचिस्तान में इस्लामिक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का माड्यूल तैयार कर भेज दिया। 2018 में इसी माड्यूल ने एक बम विस्फोट के जरिए प्रमुख बलोच नेता सिराज रायसानी और उनके 150 समर्थकों को उड़वा दिया। सिराज पाकिस्तानी सेना की कूट युद्ध नीति के शिकार हो गए। उल्लेखनीय है कि भारत हमेशा से बलोचिस्तान समस्या के शांतिपूर्वक समाधान का समर्थक रहा है।

वजीरिस्तान में भी युद्ध

खैबर पख्तूनखवा पाकिस्तान के चार प्रातों में से एक है। अमेरिका पर 9/11 के हमले के बाद यह क्षेत्र आतंकवादियों का गढ़ बन गया है। यहां तालिबान, तहरीक-ए- तालिबान, और अल कायदा जैसे खूंखार आतंकवादी संगठनों के अड्डे हैं। पाकिस्तान इन आतंकवादी तंजीमों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अमेरिका से वर्षों धन लेता रहा, लेकिन उसका इस्तेमाल उनको खत्म करने के बजाए उन्हें सुरक्षा देने और अफगानिस्तान तथा  भारत के खिलाफ कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करता रहा। प्रधानमंत्री मोदी सफल कूटनीति के जरिए अफगानिस्तान को अपने साथ लाने में कामयाब रहे। यह पाकिस्तान को नगावार गुजरा।

सिंधुदेश और गिलगित बाल्टिस्तान

पाकिस्तान के अन्य प्रांतों से भी अलगाववाद की आवाजें उठ रही हैं। गिलगित बाल्टिस्तान भारत का ही हिस्सा रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर गैरकानूनी ढंग से कब्जा कर रखा है। वहां के लोग अब पाकिस्तान से आजाद होना चाहते हैं। इसके दो प्रमुख कारण है। एक तो यह कि भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में विकास काफी तेजी से हुआ है और वहां के लोगों का जीवन स्तर काफी अच्छा है। यह अहसास गिलगित बाल्टिस्तान के लोगों को होता है कि यदि वे भारत के साथ रहेंगे तो उनका ज्यादा भला होगा।दूसरा, चीन पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर को लेकर भी उनके मन में पाकिस्तान को लेकर वितृष्णा हो गई है। उन्हें इस बात का डर है कि देर सबेर इस क्षेत्र में चीन का दबदबा कायम हो जाएगा।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन के अनुसार जिवे सिंध तेहरिक ने पाकिस्तान से सिंध को आजाद करने की मांग की है। यहां तक कि वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस ने भी पाकिस्तानी सरकार से मांग की है कि आजादी की मांग कर रहे सिंधी लोगों की हत्या करना बंद करे। पाकिस्तान में सिंध प्रात को मुक्त करने की मांग जोर पकड़ रही है।

निष्कर्ष

इन परिस्थितियों में पाकिस्तान काफी हद तक सिर्फ चीन पर आश्रित रह गया है। चीन भी पाकिस्तान को इसलिए बर्दाश्त कर रहा है क्योंकि वह अमरीका की तरह एक बड़े मार्शल प्लान पर काम कर रहा है। उसकी मंशा वन रोड वन बेल्ट के जरिए यूरोप और एशिया पर अपना दबदबा कायम करनाा है, जिसमें पाकिस्तान का एक बहुत बडा भूभाग उसके नियंत्रण में है। दूसरी तरफ भारत अमरीका के साथ सहयोग कर अफगानिस्तान में अपना प्रभाव जमा रहा है। यह संयोग ही है कि पाकिस्तान का अपने सभी पड़ोसियों के साथ संबंध खराब है। भारत की तरह अफगानिस्तान और ईरान भी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के शिकार हैं। इसलिए वे पाकिस्तान के बजाय भारत के साथ संबंध बनाए रखने के प्रति ज्यादा उत्सुक हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान इस समय बिखरने के कगार पर है। आतंरिक और बाहरी दबावों के कारण पाकिस्तान में फिर एक नये विभाजन की ओर जा सकता है।

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