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गांव भारत का दिल, किसान देश की धड़कन

भारत का कृषि क्षेत्र COVID-19 महामारी के दौरान भी सकारात्मक वृद्धि के प्रमुख क्षेत्रों में से एक रहा है। पिछले 6 वर्षों में  भारत के किसान भी देश की विकास कहानी में सरकार के साथ शामिल हुए। किसानों का कल्याण मोदी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।

बजट 2021-22 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सुनिश्चित कीमत उपलब्ध कराने के लिए एमएसपी व्यवस्था में व्यापक बदलाव हुआ है, जो सभी कमोडिटीज के लिए लागत की तुलना में कम से कम डेढ़ गुना हो गया है। खरीद एक निश्चित गति से निरंतर बढ़ रही है। इसके परिणाम स्वरूप किसानों को भुगतान में भी बढ़ोतरी हुई है।

किसान और गांव केंद्रीय बजट के दिल में हैं। इस बजट में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई फैसले लिए गए हैं। कृषि मंडियों को सशक्त करने के लिए भी प्रविधान किए गए हैं।– पीएम मोदी

गेहूं खरीदारी से लाभान्वित किसान

गेहूं के मामले में, 2013-14 में किसानों को कुल 33,874 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वर्ष 2019-20 में 62,802 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया और 2020-21 में इसमें और सुधार हुआ तथा किसानों को 75,060 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इससे लाभान्वित होने वाले गेहूं किसानों की संख्या 2020-21 में बढ़कर 43.36 लाख हो गई जो 2019-20 में 35.57 लाख थी।

धान के किसानों को मिला लाभ

धान के लिए, 2013-14 में 63,928 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। 2019-20 में यह वृद्धि 1,41,930 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2020-21 में यह और सुधरकर 1,72,752 करोड़ रुपये हो गई। इससे लाभान्वित होने वाले धान किसानों की संख्या 2020-21 में बढ़कर 1.54 करोड़ पर हो गई, जो संख्या 2019-20 में 1.24 करोड़ थी।

दालों के लिए भी अधिक भुगतान

इसी तरह, दालों के मामले में 2013-14 में 236 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया। 2019-20 में यह धनराशि बढ़कर 8,285 करोड़ रुपये हो गई। इस समय 2020-21 में यह 10,530 करोड़ रुपये है, जो 2013-14 के मुकाबले यह 40 गुना से ज्यादा वृद्धि है।

स्वामित्व योजना हर गांव में होगी लागू

इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत, गांवों में संपत्ति के मालिकों को बड़ी संख्या में अधिकार दिए जा रहे हैं। अभी तक, 1,241 गांवों के लगभग 1.80 लाख संपत्ति मालिकों को कार्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं और वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 21-22 के दौरान इसके दायरे में सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव किया है।

कृषि कर्ज का लक्ष्य बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये

किसानों को पर्याप्त कर्ज उपलब्ध कराने के लिए, सरकार ने वित्त वर्ष 22 में कृषि कर्ज का लक्ष्य बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इसी प्रकार, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष के लिए आवंटन 30,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। नाबार्ड के अंतर्गत 5,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ बनाए सूक्ष्म सिंचाई कोष को दोगुना कर दिया जाएगा।

‘ऑपरेशन ग्रीन योजना’ में विस्तार

कृषि और सहायक उत्पादों में मूल्य संवर्धन व उनके निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए की गई एक अहम घोषणा के तहत, अब ‘ऑपरेशन ग्रीन योजना’ के दायरे में अब 22 जल्दी सड़ने वाले उत्पाद शामिल हो जाएंगे। वर्तमान में यह योजना टमाटर, प्याज और आलू पर लागू है।

1000 अतिरिक्त मंडियां जुड़ेंगी

ई-नैम्स में लगभग 1.68 करोड़ किसान पंजीकृत हैं और इनके माध्यम से 1.14 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है। पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए ई-नैम को कृषि बाजार में लाया गया है, ई-नैम के साथ 1,000 से ज्यादा मंडियों को जोड़ा जा चुका है। एपीएमसी को अपनी अवसंरचना सुविधाएं बढ़ाने के लिए कृषि अवसंरचना कोष उपलब्ध कराया जाएगा। 1000 अतिरिक्त मंडियों को जोड़ा जाएगा और मौजूदा बाजार ढांचे को मजबूत करने के लिए चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करते हुए ई-नैम जैसे डिजिटल पहल से सुसज्जित किया जाएगा।

मछली पालन के लिए नए कदम

वित्त मंत्री ने मछली पकड़ने और मछली उतारने वाले केन्द्रों के विकास में पर्याप्त निवेश का प्रस्तांव रखा। मत्स्य पालन के लिए, चेन्नई, कोच्चि और पारादीप सहित पांच प्रमुख केंद्र नदियों के साथ कृषि को बढ़ावा देने की योजना में जोड़े जाएंगे।

कपास के किसानों की प्राप्तियों में तेजी

इसी प्रकार, कपास के किसानों की प्राप्तियों में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जो 2013-14 की 90 करोड़ रुपये से बढ़कर 25,974 करोड़ रुपये (27 जनवरी 2021) के स्तर पर पहुंच गई।

अत्याधुनिक तकनीकों पर जोर

दिलचस्प बात यह है कि स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत ऋण के लिए मार्जिन मनी की आवश्यकता को 15% तक कम करने और कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को शामिल करने जैसी पहल के साथ भारत के कृषि क्षेत्र के प्रति आकर्षण को बढ़ावा दिया जाएगा साथ ही अत्याधुनिक तकनीकों पर जोर दिया जाएगा ताकि भारत के अन्नदाता स्वयं अपना भाग्य लिखने में प्रेरित और सक्षम हो सकें।

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