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किसानों के साथ 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य

agriculture export policy 2018 india

अगले पांच साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य के साथ ही एक लक्ष्य और जुड़ा है वर्ष 2022 तक किसानों की आय भी दुगुनी की जाए। प्रधानमंत्री मो्दी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि किसानों को साथ लिए बिना अर्थव्यवस्था का आकार नहीं बढ़ाया जा सकता। इसलिए इस बजट में कृषि निर्यात और कृषि मार्केटिंग पर ज्यादा जोर दिया गया है।

आइए देखते हैं कि भारत के कृषि निर्यात की संभावनाएं क्या हैं और सरकार की ओर से इसे बढ़ावा देने के लिए क्या प्रयास किया जा रहे हैं।

बजट में कृषि निर्यात पर जोर

बजट में जीरो बजट की खेती को बढ़ावा देने की बात की गई है । जीरो बजट की खेती के लिए जरूरी बीज, खाद, पानी आदि का इंतजाम प्राकृतिक रूप से ही किया जाता है, इसके लिए मेहनत जरूर अधिक लगती है, लेकिन खेती की लागत बहुत कम आती है और कीमत अधिक मिलती है। जीरो बजट कृषि के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जाएगी।

बजट में अन्नदाता को उर्जा दाता बनाने, कोपरेटिव के जरिए डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने, कृषि संरचना में बड़ा निवेश करने और  अगले 5 वर्षों में 10,000 नये कृषि उत्पादक संगठन बनाने की भी घोषणा की गई है। बजट में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई है।

कृषि निर्यात नीति 2018

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि निर्यात नीति को 2018 में ही मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्तावित नीति के लागू होने के बाद उम्मीद है कि भारतीय किसानों की आय दुगुनी करने में बहुत मदद मिलेगी। इस कृषि निर्यात नीति का मुख्य उद्देश्य ही भारतीय कृषि में निर्यात की संभावनाओं को और उभारना और विभिन्न सहायक योजनाओं और नीतियों के जरिए भारत को कृषि क्षेत्र में एक ग्लोबन पावर बनाना है।

इस कृषि निर्यात के जो उद्देश्य हैं उनमें  शामिल हैं:

भारत के 30 अरब डॉलर के कृषि निर्यात को बढ़ाकर 2022 तक 60 अरब डॉलर करना है और अगले कुछ वर्षों में कृषि निर्यात 100 अरब डॉलर तक ले जाना है।

निर्यात किये जाने वाले उत्पादों का विविधीकरण और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्द्धन कर ऊँची कीमतों पर निर्यात करना है। खास कर जल्दी खराब हो वाले वाले फल, फूल सब्जियों को प्रसंस्करित कर उनको निर्यात के योग्य बनाना है।

परंपरागत और गैरपरंपरागत तरीके से पैदा की गई देसी किस्मों व आर्गेनिक खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है।

कृषि उत्पादकों को बाजार तक सहज ढंग से पहुंचाने के लिए संस्थागत तंत्र का विकसित करना है।

किसानों को विश्व बाजार में अपने उत्पादों के निर्यात के काबिल बनाना है।

यह कृषि निर्यात नीति इसलिए भी जरूरी है ताकि कृषि निर्यातकों के सामने जो चुनौतियां आ रही हैं उसे पार पाने के लिए एक नीतिगत संरचना उपलब्ध हो सके। कृषि के लिए जरूरी ढांचागत सुविधाएं विकसित हो रही हैं। विश्व कृषि बाजार में जबर्दस्त उतार चढ़ाव आते हैं उसके लिए भी एक ऐसा प्लेटफार्म चाहिए जो उठते गिरते बाजारों का सही अंदाज लगा सके और कृषि निर्यातकों को समय पर सलाह दे सके।

इस समय भारत का विश्व कृषि निर्यात में हिस्सेदारी नाम मात्र की है। 2016 के आकड़े के अनुसार हमारी कृषि निर्यात की हिस्सेदारी केवल 2.2 प्रतिशत रही है। उच्च मूल्य वाले प्रसंस्करित कृषि उत्पादों में भी हमारी हिस्सेदारी चीन और अमेरिका के मुकाबले काफी कम है। प्रसंस्करित कृषि उत्पादों के विश्व निर्यात बाजार में हमारी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है। जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत और चीन की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है।

मोदी सरकार के नीतिगत फैसले

विश्व बाजार में अपने कृषि उत्पादों के प्रतिस्पर्धात्मक बनाने और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मोदी सरकार दुगुने उत्साह के साथ नीतिगत फैसले कर रही है। मोदी सरकार ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक पर अगले 5 साल में 25 लाख करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कलस्टर का निर्माण किया जा रहा है ताकि बड़े पैमाने पर उत्पाद के साथ उनकी मार्केंटिंग के लिए भी संयुक्त रूप से प्रयास किया जा सके। केंद्र सरकार इसमें राज्यों को भी साथ लेकर चल रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लक्ष्य सबके सामने रखा और उसमें उनकी भूमिका पर विस्तार से बातचीत की। मेक इन इंडिया के तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रोड्यूस इन इंडिया’ का अभियान चलाया जाने वाला है। प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों और आर्गेनिक कृषि उपजों को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

मॉडल एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (एपीएमसी) अधिनियम और ई-नाम जैसे कृषि मार्केटिंग प्लेटफार्म को सभी राज्य अपनाए इस बात को लेकर लगातार बैठकें भी चल रही है। मोदी सरकार एपीएमसी को लगातार आ रही  अड़चने को देखते हुए कृषि मार्केटिंग से जुड़ा एक नया अधिनियम भी ले कर आ रही है। यही नहीं एग्रीकल्चर प्रोडयूस एंड लाइवस्टॉक कांट्रैक्ट फार्मिंग एंड सर्विसेज एक्ट 2018 का प्रारूप सामने आ चुका है। इसको लेकर कई बैंठके भी हुई हैं।

कृषि क्षेत्र में भी निजी निवेश

कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के प्रयास प्रधानमंत्री लगातार कर रहे है। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण के जवाब में भी यह बात कही कि सिर्फ ट्रैक्टर बना देना कृषि क्षेत्र में निवेश नहीं है। निजी क्षेत्रों को कृषि क्षेत्र में लाने के लिए लीजिंग नियमों और कांट्रैक्ट फार्मिंग पर भी कुछ नए नियम लाने होंगे।

कृषि को भले ही उद्योग का दर्जा ना मिले लेकिन इसे उद्योगों को मिलने वाली सभी सुविधाएं मिले इसके लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है। कृषि मंत्रालय के साथ फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय, रेल मंत्रालय, शिपिंग एवं ट्रांसपोर्ट मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय भी जुड़ कर काम कर रहे हैं। इस नीति में एग्री स्टार्टअप खोलने का भी प्रस्ताव है। सरकार ने एक मोनिटरिंग फ्रेमवर्क भी स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। वाणिज्य मंत्रालय इसका नोडल डिपार्टमेंट होगा। इसमें राज्य सरकारों की भी भागीदारी होगी।

निष्कर्ष

इन नये सुधारों को लाने के पीछे मोदी सरकार का प्रमुख लक्ष्य यह है कि किसानों का कोई शोषण ना हो, उनकी उपज का उचित और समय पर कीमत मिल जाए साथ ही उनको विश्व बाजार में पहुंचाने के लिए पर्याप्त कानूनी और सहुलियतों का आधार मिल जाए।

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