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आखिर क्यों है 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी संभव

5 years and 5 trillion dollar economy

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार बहुमत की सरकार बनने के साथ ही देश में आर्थिक विकास के नए लक्ष्य भी तय हो गए हैं। पिछले पांच साल के आंकड़े भारत के आने वाले 5 सालों के लिए सकरात्मक है। । 2014 से 2019 के दौरान औसत आर्थिक विकास की दर 7.3 प्रतिशत रही है। राजस्व में तेजी से वृद्धि हुई है। मैक्रो लेवल अर्थव्यवस्था में स्थिरता आई है और चालू खाते व राजकोषीय घाटे में भी कमी दर्ज की गई है। मोदी सरकार देश के नागरिकों को बेहतर जीवन देने के प्रयास में जुटी है।

गरीबी हटाओ - अब मात्र नारा नहीं

हर गांव को सड़क, हर गरीब को घर, हर घर में शौचालय व बिजली कनेक्शन और 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये तक के मु्फ्त इलाज के लिए बीमा सुरक्षा मिली है। डेढ़ करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों को आवास दिया गया। 2014 तक जितने गैस कनेक्शन दिए गए थे उससे अधिक कनेक्शन इन पांच वर्षों में दिए गए। हम कह सकते हैं कि बुनियादी सुविधाओं के साथ जीवन जीने की सुविधाएं अब सबके लिए उपलब्ध हो रही हैं। अगले 5 साल में ‘हर घर में नल से जल’ देने का अभियान भी सरकार ने शुरू कर दिया है। नदियों को निर्मल और अविरल बनाने तथा जल प्रबंधन भी प्रधानमंत्री के एजेंडे में हैं।

जन-धन, आधार ने दिए आर्थिक अधिकार

प्रधानमंत्री मोदी ने पहले कार्यकाल में अच्छी अर्थनीति और साफ सुथरी राजनीति के बेहतर सम्मिश्रण से लोगों के जीवन को सुगम बनाने का प्रयास किया। जन धन खाता और आधार के कारण आम जन को पहली बार सही मायने में आर्थिक अधिकार मिले।

सरकार मूल सुरक्षा के उपायों के साथ सामाजिक – आर्थिक विकास को निचले तबके तक पहुंचाने के लिए विभिन्न उपायों के जरिए गरीबों को मूलभूत सेवाएं प्रदान करने पर भी ध्यान दे रही है। आधार ने इस वर्ग के लिए बड़े रास्ते खोले हैं। प्रत्येक व्यक्ति को एक विशिष्ट संख्या प्रदान करके अब सरकार लक्षित सहायता प्रदान करने में सक्षम हो गई है।

वर्तमान में देश की 90 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या के पास आधार कार्ड है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए 35 करोड़ से अधिक बैंक खातों में एक ट्रिलियन रूपए के करीब धनराशि जमा हुई है।

वर्तमान में 370 नकद आधारित योजनाओं के माध्यम से 55 केन्द्रीय मंत्रालय डीबीटी के अंतर्गत लाभार्थियों को सीधा पैसा उनके खाते में भेजते हैं।

अंतिम छोर तक लोगों को सुविधाएं पहुंचाने की एक प्रमुख पहल प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना थी, जो 2016 में आरंभ हुई थी। 3 वर्ष की अवधि के भीतर 5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए जाने का मूल लक्ष्य निर्धारित किया गया था। आज देश में 7 करोड़ से अधिक महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन जारी किए गए हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

पिछले पांच साल में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खूब जोर दिया गया। हर गांव तक वाहन पहुंचने वाली सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नेशनल हाईवे पर भी अब तक की सबसे तेज गति से काम चल रहा है। वह दिन दूर नहीं, जब रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं भी हवाई अड्डे जैसी हो जाएंगी। जलमार्ग यातायात और हवाई यात्रा के सेक्टर में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने वाली है। कहा जा सकता है कि इन योजनाओं के फलीभूत होने के बाद वर्ष 2024 का भारत एक ‘नया भारत’ होगा।

शहरों का आधुनिकीकरण, हर मौसम के लिए उपयुक्त सड़कें, अच्छी मेट्रो रेल सेवाएं और बेहतर जल निकासी, ये सब कुछ आने वाले वर्षों में दिखाई देंगे। मोदी सरकार गांवों के गरीबों की तरह शहरी गरीबों को भी आवास उपलब्ध कराएगी।

अब तक निर्मित 1,32,000 किलोमीटर सड़कों में से 20 प्रतिशत से अधिक सड़कें पिछले पांच साल में बनी हैं। देश में टियर 3 और टियर 4 नगरों की ‘उड़ान सेवा’ से संपर्क बढ़ाकर 40 लाख अतिरिक्त सिटिंग क्षमता का निर्माण करते हुए, उड़ान फ्लाइटों के साथ 30 निष्क्रिय व सेवाधीन एयरपोर्टों को मुख्यधारा में लाया गया है।

यह योजना पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों में हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर राज्यों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया गया है। बड़े पुलों के निर्माण, रेलवे/राजमार्गों का विस्तार करने से कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार आया है। दिसंबर, 2018 में असम में 4.94 किलोमीटर लंबे बोगीवील पुल का उद्घाटन किया गया, जो एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल-सह-सड़क पुल है।

नए भारत का मार्ग प्रशस्त करती बैंकिंग प्रणाली

बैंकिंग और फाइनेंशियल क्षेत्र में सुधार लगातार जारी है। बैंकों के सुदृढ़ीकरण की प्रकिया चल रही है, ताकि बैंक संख्या में कम, वित्तीय रूप से ज्यादा मजबूत हों। बैंकों के पुर्नपूंजीकरण के लिए बजट में अच्छी खासी राशि का प्रावधान में किया गया है। तरलता के संकट से जूझ रही नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए भी बजट में अच्छा प्रावधान किया गया है। पहले से कुछ समस्याओं में चल रहे रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और एमएसएमई क्षेत्र के लिए भी बहुत सारी घोषणाएं बजट में की गई हैं। जीएसटी काउंसिल लगातार जीएसटी में सुधार कर रही है। मोदी सरकार ने प्रत्यक्ष कर क्षेत्र में बहुत सारे नियमों के सरलीकरण की घोषणा की है।

आकांक्षी भारत के लिए आदर्श बजट

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में आकांक्षी भारत की राजनीतिक दिशा क्या होगी, इसकी पूरी रूप रेखा प्रस्तुत की है। आर्थिक रूप से पिछड़े लोग अब बुनियादी सुविधाओं से आगे अपनी जिंदगी को नई धार दे सकते हैं। जो मध्यवर्गीय लोग हैं उन्हें अंतरिम बजट में 5 लाख रुपये तक की करयोग्य आमदनी पर जीरो टैक्स कर दिया गया था अब इस बजट में उन्हें कई क्षेत्रों में और छूट की सहुलियतें दी गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से होम लोन और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना शामिल है।

भारत आगे भी विश्व में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा। वर्ष 2024 तक भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को आधार देते हुए बजट में सरकार का डायरेक्शन उसी दिशा में हमें बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। 2014 से 2018 तक विश्व में कोई ज्यादा बदलाव नहीं दिखाई दिया है, फिर भी, भारत ने कई बड़े-बड़े कदम उठाए हैं। भारत चीन से उच्च दर पर वृद्धि दर हासिल करने वाली छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और इसने विश्व में तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था होने का तमगा हासिल किया है।

पहली बार मुद्रास्फीति (महंगाई दर) सबसे निचले स्तर पर

इन पांच वर्षों में औसत मुद्रास्फीति की दर पिछले पांच वर्षों की मुद्रास्फीति की दर के आधे से भी कम है, बल्कि यह स्वतंत्रता के बाद के इतिहास में निम्न स्तर पर है। चालू खाता घाटा नियंत्रण में है और विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर है। राजकोषीय घाटे पर भी अनुशासन लागू किया गया। देश में पर्याप्त रूप से विदेशी मुद्रा भंडार है, 14 जून तक देश में कुल 42220 करोड़ डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद रहा।

आयुष्मान भारत से स्वस्थ भारत की ओर

2018 में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से मात्र 100 रुपए प्रति माह के नाममात्र प्रीमियम पर 10 करोड़ बीपीएल परिवारों में प्रत्येक को उपचार के लिए 5,00,000 रुपए का बीमा कवर प्रदान किया जाता है। आज इस योजना में 15,000 से ज्यादा अस्पतालों का पैनल बन चुका है।

राज्यों की शक्तियां बढ़ीं, टेक्नोलॉजी फ्रेंडली कल्चर

केन्द्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया है। राज्यों को स्वतंत्र रूप से अपने राजस्व और व्यय का प्रबंधन करने की शक्ति प्रदान की गई।

दिवालियापन और दिवालिया संबंधी मामलों के समाधान के लिए आईबीसी मे एक समय सीमा निर्धारित है। जिसके तहत चूककर्ता (दीवालिया व्यक्ति) की परिसंपतियों की नीलामी पुनर्भुगतान के लिए की जा सकेगी। आईबीसी उधार संस्कृति को बदलने में सहायता कर रही है।

टैक्स मैनेजमेंट में टेक्नोलॉजी के प्रयोग के जरिए मानवीय दखल कम कर दिया गया है, जिससे अधिकतर करदाताओं का अनुभव सरकार के पक्ष में रहा है। जीएसटी को व्यवहार में लाने का लाभ उठाया जा सकता है।

और इस प्रकार सरकार ने देश में ना सिर्फ सकारात्मक सोच को जन्म दिया है, बल्कि कई ऐसे कदम उठाये है जिनसे भारत अगले 5 वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बन सकता है।

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