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नरेंद्र तोमर का किसानों को खुला पत्र, कहा – राजनैतिक स्वार्थ से प्रेरित कुछ लोगों द्वारा फैलाये जा रहे सफेद झूठ को पहचानें

किसान विधेयक संशोधनों के पश्चात कुछ किसान संगठन सड़क पर विरोध प्रदर्शन में पिछले कई हफ़्तों से लगे हुए हैं। उनकी मांग इन संशोधनों को पूर्णतः खारिज करने के अलावा और कुछ भी नहीं है, और अपनी बात मनवाने के लिए वे न्यायिक एवं अन्यायिक हथकंडों को उपजोग में लाने में जूझे हुए हैं।

ऐसा नहीं है के सारे किसान संगठन विरोध कर रहे हैं। अनेखों संगठनों ने आगे बढ़कर इन संशोधनों का पूरजोर समर्थन कर सरकार से इन्हें बरकरार रखने की मांग अनेकों बार करी है। असहमत किसानों के साथ मोदी सरकार के अनेकों मंत्रियों संग चल रही परस्पर वार्ता में वह इसी मांग की रट लगाए बैठे हैं, और उनके इस हठ से वैमनस्य उत्पन्न करने के दुष्प्रभाव हो रहे हैं। मोदी सरकार द्वारा संशोधन में कुछ फेरबदल करने की पेशकश भी हुई है जो किसानों के उठाये मुद्दों को सुलझाने के लिए एक रास्ता दिखाती है। लेकिन समय बीतने पर यह स्पष्ट होता जा रहा है के ये चंद किसान संगठन न तो सभी किसानों की आवाज़ हैं, बल्कि ये लोग विरोधी राजनैतिक दलों की राजनीति के लिए क्रीड़ास्थली बनाने में लगे हुए हैं। कांग्रेस और वामपंथी दलों से जुड़े किसान संगठों के नकारात्मक रवैय्ये ने इस स्थिति को बेवजह विषम बनाने का काम किया है।

ऐसी परिस्थिति में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक खुला पत्र लिख कर न ही मोदी सरकार के द्वारा किसान हितैषी काजों को पुनःस्मरण करवाने का प्रयास किया है, बल्कि किसानों से विनती करी है के वे विपक्षी दलों की ओछी राजनीति से अपने को सुरक्षित करें, और कृषि विधेयक में लाये संशोधनों के चलते कृषि में आने वाले सकारात्मक बदलावों को पहचानें।

तोमर ने कहा - किसानों के हित के लिए सदैव तत्पर मोदी सरकार

अपने पत्र में नरेंद्र तोमर जी ने तर्क दिया के जिस सरकार ने किसानों को लगत का डेढ़ गुना MSP दिया और इसके माध्यम से पिछले छह वर्षों में किसानों के खाते में दोगुनी राशि पहुंचाई है, उस सरकार की MSP व्यवस्था जारी रखनी की बात पर विश्वास रखना चाहिए। साथ ही साथ, मोदी सरकार द्वारा बीज से बाज़ार तक हर क्षेत्र में लिए गए फैसले, जैसे नीम कोटेड यूरिया की उपलब्धि, किसान सम्मान निधि से समर्थन देना, साइल हेल्थ कार्ड देना, और गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग सेंटर बना कर किसान की आय में वृद्धि कराने के अनेकों प्रयासों को गिनाया।

इसके साथ ही तोमर जी ने प्रश्न पुछा के कौनसा ऐसा किसान संगठन है जिसने गत पच्चीस वर्षों से किसानों को खुला बाजार मुहैया कराने की वकालत न की हो? इस विषय पर अर्थशास्त्री, कृषि विशेषज्ञ और किसान के विचारों में समन्वय होने के बावजूद, कांग्रेस के दस वर्षों के शासन में अनेकों कृषि सुधार अधिनियमों के सर्व सम्मति से लाये जाने के, आज विपक्षी दल इसका दोगला विरोध कर रहे हैं। पत्र के माध्यम से नरेंद्र तोमर जी ने जो कृषि विधेयक सुधारों के सन्दर्भ में फैलाई जा रही अनेकों भ्रमों और भ्रांतियों का एक एक करके खंडन भी किया।

तोमर की चेतावनी - विपक्षी दलों के द्वारा रचे गए कुचक्र से सावधान

तोमर ने भरोसा दिलाया के वे किसान संगठनों संग लगातार बातचीत करते रहेंगे, किन्तु उन्होंने यह प्रार्थना करी के कुछ राजनितिक दलों और संगठों के द्वारा रचाये गए कुचक्र में फंसने से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने खेद व्यक्त किया के जिस कांग्रेस सरकार ने स्वामीनाथन फार्मूला के तहत MSP देने के वायदे को अंजाम तक नहीं पहुँचाया, तथा जिस आम आदमी पार्टी के नेता अपने ही चुनावी घोषणापत्र के विरोधाभास में आज ऐसी नकारात्मक राजनीति भुनाने में लगे हैं, एवं पहले इन्ही सुधारों का समर्थन करने वाले चंद किसान संगठन आज किसानों के हितैषी बने फिर रहे हैं। देश को बांटने वाली राजनितिक ताकतों के कुटिल प्रयासों से आगाह करते हुए उन्होंने विनती करी के इन अराजक तत्वों के  खेल में किसान न फंसे।

“मैं इस पत्र के माध्यम से हाथ जोड़कर यह विनती करता हूँ के ऐसे किसी के भी बहकावे में आए बिना, कृपया तथ्यों के आधार पर चिंतन मनन करें, ” तोमर ने पत्र में कहा। “आपकी हर शंका-आशंका को दूर करना, उसका उत्तर देना हमारी सरकार का दायित्व है। हम अपने इस दायित्व से न कभी पीछे हेट हैं और न ही कभी पीछे हटेंगे।”

“इन कृषि सुधारों की ऊर्जा से हम मिलकर भारत की कृषि को समृद्ध बनाएंगे, संपन्न बनाएंगे,”  इस उम्मीद के साथ नरेंद्र तोमर जी ने अपने पत्र की समाप्ति करी।

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